UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 पास कर चुके 958 उम्मीदवार अब तक न तो अपनी सर्विस (IAS, IPS, IFS आदि) जान पाए हैं और न ही उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई है। वजह है OBC क्रीमी लेयर तय करने के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च 2026 का फैसला, जिसके बाद केंद्र सरकार ने कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। समाचार एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से रविवार (25 अक्टूबर) को बताया कि केंद्र अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रहा है और उसके बाद ही सर्विस एलोकेशन होगा।
पूरा मामला क्या है?
CSE 2025 का फाइनल रिजल्ट 6 मार्च 2026 को आया था। इसके सिर्फ पांच दिन बाद, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने Union of India बनाम Rohith Nathan मामले में फैसला सुनाया। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि OBC की क्रीमी लेयर का दर्जा सिर्फ माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राइवेट कंपनियों और PSU में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों के साथ, समान स्थिति वाले सरकारी कर्मचारियों के बच्चों से अलग व्यवहार करना “होस्टाइल डिस्क्रिमिनेशन” यानी भेदभाव है।
कोर्ट ने केंद्र की अपीलें खारिज कर दीं और छह महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं के लिए अतिरिक्त (सुपरन्यूमेरी) पद बनाने का निर्देश दिया था।
सरकार ने कोर्ट से क्या मांगा?
PTI के मुताबिक, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने फैसले के असर की जांच की, जिसमें सर्विस और कैडर एलोकेशन, मौजूदा वरिष्ठता (सीनियरिटी), पुरानी भर्तियां और OBC आरक्षण नीति लागू करने से जुड़ी दिक्कतें शामिल थीं। इसके बाद 24 अगस्त को विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक विविध आवेदन (Miscellaneous Application) दाखिल कर स्पष्टीकरण मांगा।
DoPT चाहता है कि उसे CSE 2025 के 958 उम्मीदवारों को सर्विस एलोकेट करने की अनुमति मिले, और इसके लिए वही क्रीमी लेयर निर्धारण माना जाए जो 11 मार्च के फैसले से पहले लागू था। सरकार का तर्क है कि एक बार सर्विस एलोकेशन हो जाने के बाद उसे पलटना मुश्किल होता है, इसलिए वह कोर्ट के निर्देश के बिना आगे नहीं बढ़ना चाहती। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को केंद्र की इस अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
पहली बार अटका फाउंडेशन कोर्स
हर साल UPSC से चुने गए अफसरों का फाउंडेशन कोर्स मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में आमतौर पर अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत में शुरू होकर दिसंबर तक चलता है। इस बार LBSNAA के कैलेंडर में यह अगस्त के आखिरी हफ्ते में दर्ज था, लेकिन अक्टूबर खत्म होने को है और कोर्स शुरू नहीं हुआ। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आजादी के बाद यह पहली बार है जब किसी बैच का फाउंडेशन कोर्स इस तरह रुका है।
राहत की बात यह है कि सूत्रों के अनुसार, कोर्स में देरी का इन उम्मीदवारों की वरिष्ठता, ग्रेडेशन या दूसरी सेवा शर्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सूत्रों ने यह भी बताया कि DoPT और सभी ट्रेनिंग संस्थान जल्द से जल्द एलोकेशन और कोर्स शुरू करने के लिए तैयार हैं।
क्रीमी लेयर का नियम आखिर है क्या?
OBC आरक्षण का फायदा पिछड़े वर्ग के सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे, इसके लिए “क्रीमी लेयर” यानी आर्थिक-सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को आरक्षण से बाहर रखा जाता है। केंद्र ने 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) में इसके मानदंड तय किए थे और 14 अक्टूबर 2004 को एक स्पष्टीकरण जारी किया था।
- 1993 के नियम में इनकम/वेल्थ टेस्ट से वेतन और खेती की आय को बाहर रखा गया था।
- 2004 के स्पष्टीकरण में PSU और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की वेतन आय को जोड़ने की बात कही गई।
- गैर-सरकारी लोगों के लिए आय सीमा 1993 में 1 लाख रुपये सालाना थी, जो 2017 से 8 लाख रुपये सालाना है।
सरकारी कर्मचारियों के मामले में क्रीमी लेयर पद (जैसे ग्रुप A/ग्रुप B अफसर) से तय होती है, लेकिन प्राइवेट कंपनियों, यूनिवर्सिटी और कई राज्य संस्थानों के पदों की सरकारी पदों से “समानता” (equivalence) का सवाल सालों से लटका था। इसी वजह से कई ऐसे उम्मीदवार, जिनके माता-पिता PSU या प्राइवेट नौकरी में थे, सिर्फ वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर में मान लिए गए और उन्हें OBC कोटे का फायदा नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल वेतन को क्रीमी लेयर का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता, दर्जा (status) भी देखना होगा।
करीब 100 पुराने उम्मीदवारों का भविष्य भी जुड़ा
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह विवाद सिर्फ 2025 बैच तक सीमित नहीं है। 2016 के बाद से CSE पास कर चुके लगभग 100 ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनका OBC दर्जा क्रीमी लेयर बताकर खारिज कर दिया गया था। कोर्ट का अंतिम आदेश इनके भविष्य पर भी असर डाल सकता है।
आप पर क्या असर पड़ेगा और आगे क्या?
- CSE 2025 के चयनित उम्मीदवार: सर्विस एलोकेशन और LBSNAA ट्रेनिंग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही शुरू होगी। सूत्रों के मुताबिक सीनियरिटी सुरक्षित रहेगी।
- OBC उम्मीदवार और अभ्यर्थी: अगर कोर्ट का फैसला पूरी तरह लागू होता है तो PSU और प्राइवेट नौकरी वाले माता-पिता के बच्चों के लिए क्रीमी लेयर का आकलन बदल सकता है। इसका असर UPSC के अलावा दूसरी केंद्रीय भर्तियों पर भी पड़ सकता है।
- आगे: अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर है जो 24 सितंबर को सुरक्षित रखा गया था। उम्मीदवार किसी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय DoPT, UPSC और LBSNAA की आधिकारिक सूचना ही देखें।
फिलहाल सरकार या सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई नई तारीख घोषित नहीं हुई है। जैसे ही कोर्ट का आदेश आता है, TrendFlash पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
स्रोत: PTI (India Today, The Tribune के जरिए), The Indian Express, सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च 2026 का फैसला।

