अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के खिलाफ चल रहा विरोध शुक्रवार रात हिंसक हो गया। भीड़ ने NHPC के दफ्तर और एक पुलिस थाने को आग लगा दी, कई पुलिस वाहन जला दिए और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समेत तीन नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की। हालात संभालने के लिए केंद्र सरकार ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियां, यानी करीब 250 जवान, भारतीय वायुसेना के विमान से नवी मुंबई से पासीघाट भेजे हैं।
क्या हुआ पासीघाट में?
आजतक और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 अक्टूबर (शुक्रवार) को सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग, इन तीन जिलों में स्थानीय संगठनों ने 12 घंटे का बंद बुलाया था। बंद के दौरान सियांग जिले में करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारियों के पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ करने और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की खबर आई। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों के पास कथित तौर पर दाओ, लाठियां और गुलेल थीं। पथराव के बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। मेबो में रनाघाट ब्रिज के पास भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
बंद खत्म होने के बाद रात में पासीघाट में अचानक हिंसा भड़क उठी, जो शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे तक चलती रही। भीड़ ने NHPC ऑफिस और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी और सात-आठ पुलिस वाहन भी जला दिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और विधायकों के घरों में तोड़फोड़ हुई। विधायक निनोंग एरिंग के मुताबिक, रात करीब 2 बजे 300-400 युवा उनके घर पहुंचे और तोड़फोड़ कर संपत्ति लूट ली। पथराव में एक डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
पासीघाट के डीएसपी टोनी तातक के अनुसार प्रदर्शनकारी मेबो इलाके से आए थे। भीड़ ने आदि समुदाय के प्रमुख संगठन आदि बाने केबांग के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की। पुलिस नुकसान का आकलन कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की 4 मांगें
रिपोर्ट्स के मुताबिक बंद का आह्वान चार संगठनों ने मिलकर किया था। उनकी मांगें ये हैं:
- गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
- निलंबित किए गए गांव के मुखियाओं को फिर से बहाल किया जाए।
- प्रोजेक्ट से जुड़े शुरुआती सर्वे बंद किए जाएं।
- इलाके में तैनात अर्धसैनिक और केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाया जाए।
सियांग प्रोजेक्ट क्या है और क्यों अहम है?
सियांग नदी तिब्बत से निकलती है। तिब्बत में इसे यारलुंग त्सांगपो, अरुणाचल में सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है। सरकार की योजना अपर सियांग जिले में इस नदी पर 11,200 मेगावाट क्षमता का बहुउद्देशीय बांध बनाने की है। इसके पीछे एक बड़ी वजह चीन है, जो तिब्बत में इसी नदी पर करीब 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बना रहा है। भारत को आशंका है कि चीन का बांध नदी के बहाव पर असर डाल सकता है और अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने पर अरुणाचल और असम में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
अप्रैल 2022 में जल शक्ति मंत्रालय ने NHPC से इस प्रोजेक्ट की शुरुआती व्यवहार्यता (प्री-फिजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। साल 2025 में जब तकनीकी जांच शुरू करने की कोशिश हुई, तभी से स्थानीय लोगों का विरोध तेज होने लगा। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल सिर्फ तकनीकी और पर्यावरणीय सर्वे हो रहे हैं, ताकि पता चले कि परियोजना कितनी संभव है। सरकार के मुताबिक इसका मकसद पानी का भंडारण और नियमन, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में मौसमी बाढ़ का खतरा घटाना और देश की जल व ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है।
स्थानीय लोग विरोध क्यों कर रहे हैं?
आदि समुदाय सियांग नदी को मां मानता है। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम का दावा है कि परियोजना से 27 गांव डूब सकते हैं और दर्जनों दूसरे गांव प्रभावित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना सर्वे आगे बढ़ाया जा रहा है। यानी विरोध की जड़ में जमीन, घर, खेती और सांस्कृतिक पहचान खोने का डर है। ध्यान रहे कि गांव डूबने का आंकड़ा फिलहाल किसान संगठन का दावा है, सरकार की ओर से अंतिम डूब क्षेत्र तय नहीं हुआ है, क्योंकि व्यवहार्यता अध्ययन अभी चल रहा है।
सरकार और विपक्ष ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन ये बहुत जरूरी है कि प्रदर्शन कानून के दायरे में रहें। किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” राज्य सरकार ने लोगों से परियोजना को लेकर अपुष्ट अफवाहों, भ्रामक दावों और फर्जी खबरों से बचने को कहा है और भरोसा दिलाया है कि आकलन में स्थानीय समुदायों और प्रभावित परिवारों के अधिकार, जमीन की सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत का ध्यान रखा जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हिंसा की निंदा की है, साथ ही बंद के दौरान आंसू गैस के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर पहुंचे RAF जवान अब स्थानीय पुलिस और पहले से तैनात CRPF के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बहाल करने में लगे हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा, आगे क्या?
अगर आप पूर्वी सियांग, सियांग या अपर सियांग जिले में रहते हैं या वहां जाने वाले हैं, तो फिलहाल स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सूचनाओं पर नजर रखें, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें और सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली खबरें आगे न बढ़ाएं। पासीघाट पूर्वोत्तर का एक अहम कस्बा है, इसलिए वहां की अशांति का असर आवाजाही और कारोबार पर भी पड़ सकता है।
बड़े स्तर पर देखें तो यह मामला विकास, सुरक्षा और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन का है। एक तरफ चीन के विशाल बांध के जवाब में भारत अपनी तरफ पानी रोकने और बाढ़ से बचाव की क्षमता बनाना चाहता है, दूसरी तरफ जिन परिवारों की जमीन और गांव दांव पर हैं, वे पहले भरोसा और सहमति चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार प्रदर्शनकारी संगठनों से बातचीत शुरू करती है या नहीं, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं और सर्वे पर क्या फैसला होता है, और हिंसा के आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है। TrendFlash इस खबर पर नजर बनाए हुए है।
स्रोत: आजतक, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स (25 अक्टूबर 2026)।

