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6 नवम्बर 2026, शुक्र

ओडिशा मुफ्त पाठ्यपुस्तक: कक्षा 9–10 के 28.7 लाख छात्रों को किताबें, ₹284 करोड़; कैबिनेट मंजूरी

भारतीय स्कूल कक्षा में शिक्षक और पाठ्यपुस्तक—ओडिशा मुफ्त पाठ्यपुस्तक का प्रतीकात्मक चित्र

ओडिशा मंत्रिमंडल ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को कक्षा 9 और 10 के सरकारी व सहायता-प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें देने की योजना मंज़ूर की। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि इससे करीब 28.7 लाख छात्र जुड़ेंगे। योजना पांच साल (2025–26 से 2029–30) चलेगी और अनुमानित खर्च ₹284.07 करोड़ है। पहले से SC/ST छात्रों को मुफ्त किताबें मिलती थीं; अब बाकी वर्ग के IX–X छात्रों तक दायरा बढ़ाया गया है।

योजना की मुख्य बातें

  • लाभार्थी: सरकारी और सरकारी-सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के कक्षा 9–10 के छात्र (मौजूदा SC/ST कवरेज के अलावा)
  • अवधि व बजट: 2025–26 से 2029–30; ₹284.07 करोड़
  • उद्देश्य: समान पहुंच, कमज़ोर परिवारों का बोझ घटाना, नामांकन बढ़ाना, ड्रॉपआउट कम करना, प्राथमिक से माध्यमिक में संक्रमण आसान करना
  • आपूर्ति: कागज़ खरीद, प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण पारदर्शी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से—ओडिशा जनरल फाइनेंशियल रूल्स के तहत
  • सत्यापन: स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग फील्ड वेरिफिकेशन से लाभार्थी डेटा जांचेगा; सत्र शुरू होने से पहले किताबें स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य

Hindustan Times (PTI), Times of India भुवनेश्वर और UNI ने यही आंकड़े रिपोर्ट किए।

पृष्ठभूमि: किताबों में गलतियों का विवाद

फैसला ऐसे समय आया है जब विभाग द्वारा सप्लाई की गई 55 पाठ्यपुस्तकों में 1,600 से अधिक गलतियां—स्पेलिंग से लेकर प्रसिद्ध हस्तियों के गलत नाम तक—पाए जाने का विवाद चल रहा है। विपक्ष ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की है। यह बैकग्राउंड है, न कि इस पोस्ट का केंद्र। मुफ्त किताबों का विस्तार और कंटेंट क्वालिटी—दोनों अलग लेकिन जुड़े मुद्दे हैं। अभिभावकों के लिए सबक साफ है: मुफ्त मिलना ज़रूरी है, पर छपी सामग्री सही भी हो।

इसी कैबिनेट दिन का एक और फैसला (संक्षेप)

शहरी तूफानी जल निकासी कार्यक्रम को ₹500 करोड़ (2026–27 से 2030–31) की मंजूरी मिली—जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए। फोकस यहां किताबों पर है; ड्रेनेज अलग इंफ्रा स्कीम है।

स्कूल स्तर पर इसका मतलब यह भी है कि प्रधानाचार्य और बीआरसीसी को लाभार्थी सूची समय पर अपलोड/वेरिफाई करनी होगी। देरी हुई तो सत्र बीच में किताबें पहुंचेंगी—फिर अभिभावक बाजार से खरीदने को मजबूर होते हैं। इसीलिए “सत्र से पहले आपूर्ति” का वादा सिर्फ प्रेस लाइन नहीं, प्रशासनिक डेडलाइन है।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • अभिभावक (कक्षा 9–10): सत्र शुरू होने से पहले स्कूल/ब्लॉक पॉइंट से किताबें मिलनी चाहिए। निजी गाइड/रेफरेंस अभी भी खरीद सकते हैं, पर कोर टेक्स्ट पर खर्च बचेगा।
  • SC/ST परिवार: पहले से मुफ्त कवरेज था; नया विस्तार अन्य वर्गों के लिए है—अपना पात्रता सर्टिफिकेट स्कूल में अपडेट रखें ताकि डबल लिस्टिंग/छूट न हो।
  • क्वालिटी चेक: गलतियों वाले विवाद के बाद अभिभावक और शिक्षक किताब मिलते ही विषय/नाम/मानचित्र चेक करें; गलती दिखे तो लिखित शिकायत ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दें।
  • अन्य राज्यों के पाठक: ओडिशा मॉडल दिखाता है कि माध्यमिक स्तर पर यूनिवर्सल फ्री टेक्स्टबुक राजनीतिक प्राथमिकता बन सकती है—अपने राज्य की स्कीम से तुलना करें।

आगे क्या

विभाग लाभार्थी सूची सत्यापित कर प्रिंटिंग ऑर्डर देगा। 2026–27 सत्र के लिए ब्लॉक पॉइंट पर डिलीवरी की बात रिपोर्ट्स में है। किताब-त्रुटि विवाद पर मंत्रालय/विभाग की अगली कार्रवाई अलग ट्रैक पर चलेगी। अभिभावकों को स्कूल नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर वितरण तारीख देखनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मुफ्त किताबें किन कक्षाओं के लिए हैं?

कक्षा 9 और 10—सरकारी व सरकारी-सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूल।

कितने छात्र लाभान्वित होंगे और खर्च कितना?

करीब 28.7 लाख छात्र; पांच साल में अनुमानित ₹284.07 करोड़।

क्या SC/ST छात्रों को पहले से मिलती थीं?

हां। नया फैसला बाकी वर्ग के IX–X छात्रों तक कवरेज बढ़ाता है।

किताबें कब मिलेंगी?

विभाग का लक्ष्य सत्र शुरू होने से पहले आपूर्ति है; सटीक ब्लॉक/स्कूल तारीख स्थानीय नोटिस से पता चलेगी।

स्रोत: Hindustan Times (PTI), Times of India Bhubaneswar, UNI, OdishaBytes / ABP Live कैबिनेट कवरेज (13-14 अक्टूबर 2026)।

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