राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को छह राज्यों के राज्यपालों की नई नियुक्तियों की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक संवाद में बताया गया कि ये नियुक्तियां संबंधित पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होंगी। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, उत्तराखंड और सिक्किम में राज्यपाल पद पर बदलाव होना है।
इसमें दो मौजूदा राज्यपालों का स्थानांतरण और चार नए चेहरों की नियुक्ति शामिल है। खास बात यह है कि चारों नए नाम लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और ओबीसी तथा अनुसूचित जाति पृष्ठभूमि से आते हैं।
कौन कहां गया: पूरी सूची एक नजर में
- केरल (केरलम): ओम प्रकाश माथुर — अभी तक सिक्किम के राज्यपाल; जुलाई 2024 से सिक्किम में थे
- तमिलनाडु: राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर — अभी तक केरल के राज्यपाल; जनवरी 2025 से केरल में, मार्च 2026 से तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे
- सिक्किम: दुष्यंत गौतम — नया नियुक्त; दिल्ली से दलित नेतृत्व वाले वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद
- कर्नाटक: डॉ. सुधा यादव — नया नियुक्त; हरियाणा की पूर्व सांसद, थवरचंद गहलोत की जगह
- ओडिशा: ब्रज मोहन राम — नया नियुक्त; झारखंड के पालामू से पूर्व लोकसभा सांसद, हरि बाबू कंभमपति की जगह
- उत्तराखंड: डॉ. ढाल सिंह बिसेन — नया नियुक्त; मध्य प्रदेश से पूर्व सांसद-विधायक, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह
डॉ. सुधा यादव: कर्नाटक की दूसरी महिला राज्यपाल
कर्नाटक के लिए यह नियुक्ति खास इसलिए है क्योंकि डॉ. सुधा यादव राज्य की दूसरी महिला राज्यपाल बनीं। इससे पहले स्वर्गीय सुषमा स्वराज इस पद पर रह चुकी हैं। डॉ. यादव आईआईटी रुड़की से एमएससी और पीएचडी (रसायन विज्ञान) हैं। उनके पति बीएसएफ डिप्टी कमांडेंट सुखबीर सिंह यादव कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। वे महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य भी रहीं।
अर्लेकर का पूर्णकालिक तमिलनाडु जाना क्यों मायने रखता है
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर मार्च 2026 से तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। अब उन्हें वहां पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया है। केरल में उनकी जगह सिक्किम से आए ओम प्रकाश माथुर लेंगे। दोनों दक्षिणी राज्यों में राज्यपाल-सरकार संबंध पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, इसलिए इन बदलावों पर राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है।
आप पर क्या असर पड़ेगा
सामान्य नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी पर राज्यपाल बदलने का सीधा असर आमतौर पर नहीं पड़ता। लेकिन राज्यपाल विधेयकों पर सहमति, विश्वविद्यालय कुलाधिपति के रूप में नियुक्तियां और संवैधानिक संकट के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्रों, विश्वविद्यालयों और राज्य विधानमंडल से जुड़े मामलों में नए राज्यपाल की शैली और प्राथमिकताएं आगे दिख सकती हैं। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विपक्षी सरकारें होने के कारण राज्यपाल पद अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनता है—इस लिहाज से आने वाले हफ्तों में राजभवन और सचिवालय के बीच समन्वय पर नजर रखना ठीक रहेगा।
आगे क्या?
नियुक्तियां पदभार ग्रहण करने की तारीख से लागू होंगी। कब-कब शपथ होगी, इसकी अलग-अलग राज्यों में घोषणा हो सकती है। तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। राजनीतिक दल और स्थानीय संगठन नए राज्यपालों का स्वागत या आलोचना दोनों कर सकते हैं—यह प्रक्रिया का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
किसने छह राज्यों के राज्यपाल नियुक्त किए?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन के संवाद के जरिए ये नियुक्तियां कीं।
केरल और तमिलनाडु में नए राज्यपाल कौन हैं?
केरल में ओम प्रकाश माथुर और तमिलनाडु में राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक की नई राज्यपाल कौन हैं?
डॉ. सुधा यादव। वे हरियाणा की पूर्व सांसद हैं और कारगिल शहीद की पत्नी के रूप में भी जानी जाती हैं।
ये नियुक्तियां कब से लागू होंगी?
संबंधित राज्यपाल जब अपना पदभार ग्रहण करेंगे, उसी तारीख से ये नियुक्तियां प्रभावी होंगी।

