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7 नवम्बर 2026, शनि

Rahul Gandhi SIR याचिका में SC रजिस्ट्री ने 14 दोष बताए; सुनवाई बुधवार को टल सकती है

सुप्रीम कोर्ट भवन—राहुल गांधी SIR याचिका से जुड़ी खबर का प्रतीकात्मक चित्र

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य INDIA ब्लॉक नेताओं द्वारा चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका में 14 तकनीकी/प्रक्रिया संबंधी दोष चिह्नित किए हैं। मामला Rahul Gandhi vs Election Commission of India के रूप में दर्ज है। ABP Live, Hindustan Times, India TV, News18 और IANS की रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि हुई है।

याचिका 12 अक्टूबर को दायर की गई। एडवोकेट एस. प्रसन्ना ने इसे तब फाइल किया जब राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले पहुँच नहीं पाए। अब दोष सुधार का काम चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार तक सारी खामियाँ पूरी करना मुश्किल हो सकता है, और बुधवार को सुनवाई लिस्ट होना भी तय नहीं।

कौन-कौन से 14 दोष बताए गए

रजिस्ट्री द्वारा चिह्नित खामियों में प्रमुख बातें ये हैं:

  • राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को छोड़कर 9 याचिकाकर्ताओं के वकालातनामे गायब
  • खड़गे के पहचान पत्र की कॉपी धुंधली/अस्पष्ट
  • कोर्ट फीस में ₹220 की कमी
  • प्रतिवादियों के नामों में असंगति
  • निजी पक्षों को जोड़ने का स्पष्ट स्पष्टीकरण न होना
  • पहले के फैसले की कॉपी संलग्न न करना
  • प्रिंटिंग संबंधी कमियाँ

ये दोष याचिका के मूल मुद्दे—मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया—पर अभी गुण-दोष की सुनवाई नहीं खोलते। पहले प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी मामला लिस्टिंग के करीब पहुँचेगा।

याचिका में क्या माँगा गया है

याचिका में SIR संबंधी निर्णयों की न्यायिक समीक्षा माँगी गई है। चुनाव आयोग से माँग है कि वह SIR फाइलें, बैठक रिकॉर्ड, ECINET–ERONET एक्सेस लॉग और 24 जून 2025 को संशोधन शुरू करने के फैसले से जुड़ी फाइल नोटिंग पेश करे।

इसके अलावा सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र ऑडिट कमेटी, बूथ-वार डिलीट किए गए मतदाताओं की सूची कारणों और लिंग/आयु ब्रेकडाउन के साथ प्रकाशित करने, राज्यों में चल रही SIR पर अंतरिम रोक, तथा ऑनलाइन Form-6 को Registration of Electors Rules, 1960 के अनुरूप बनाने की माँग भी शामिल है।

कौन-कौन जुड़े हैं याचिका से

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, डी. राजा, एम.ए. बेबी और ई.टी. मोहम्मद बशीर का नाम भी जुड़े नेताओं में लिया गया है।

जरूरी बात: यह याचिका SIR की वैधता को दोबारा खोलने का दावा नहीं करती। 27 मई को ADR बनाम ECI मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की SIR कराने की शक्ति को बरकरार रखा था। मौजूदा याचिका प्रक्रिया, पारदर्शिता और दस्तावेजी खुलासे पर ज्यादा केंद्रित दिखती है।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

अगर आप मतदाता हैं और आपके राज्य में SIR चल रही है या चलेगी, तो इस मामले की तात्कालिक सुनवाई अभी प्रक्रियात्मक रुकावट में फँसी है। रजिस्ट्री के दोष ठीक होने तक बुधवार की लिस्टिंग अनिश्चित है। यानी फिलहाल SIR पर कोई तत्काल सुप्रीम कोर्ट स्टे सिर्फ इस याचिका के फाइल होने से लागू नहीं होता।

पृष्ठभूमि समझें: SIR मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा है। विपक्ष इसे लेकर पारदर्शिता और डिलीशन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है; आयोग अपनी वैधानिक शक्ति का हवाला देता है, जिसे मई के फैसले में कोर्ट ने पहले ही स्वीकार किया। याचिका में माँगे गए दस्तावेज—फाइल नोटिंग, एक्सेस लॉग, बूथ-वार डिलीट लिस्ट—अगर बाद में कोर्ट माँगे तो आम मतदाता के लिए यह समझने का रास्ता खुल सकता है कि नाम क्यों कटे या जुड़े।

व्यावहारिक सलाह: अपनी वोटर स्लिप/EPIC और फॉर्म-6/आपत्ति प्रक्रिया की स्थिति स्थानीय बूथ ऑफिसर या चुनाव आयोग पोर्टल पर खुद जाँचते रहें। अदालती प्रक्रिया लंबी हो सकती है; व्यक्तिगत नाम की सुरक्षा के लिए आधिकारिक चैनल ही सबसे तेज रास्ता है। राजनीतिक दलों के दावे और जवाब दोनों को तथ्यों के साथ पढ़ें, अफवाहों पर निर्भर न रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कितने दोष बताए?

कुल 14 तकनीकी/प्रक्रिया संबंधी दोष चिह्नित किए गए हैं, जिनमें वकालातनामा, कोर्ट फीस और दस्तावेज संबंधी खामियाँ शामिल हैं।

क्या बुधवार को सुनवाई तय है?

रिपोर्ट्स के अनुसार दोष सुधार मंगलवार तक पूरा होना मुश्किल हो सकता है, इसलिए बुधवार को लिस्टिंग अनिश्चित है।

याचिका SIR की वैधता को चुनौती देती है क्या?

नहीं—यह SIR की वैधता को दोबारा नहीं खोलती। मई में ADR बनाम ECI में कोर्ट ने आयोग की SIR शक्ति को बरकरार रखा था।

याचिका में मुख्य माँग क्या है?

SIR फाइलों और लॉग का पेश होना, स्वतंत्र ऑडिट कमेटी, डिलीट मतदाताओं की बूथ-वार सूची, अंतरिम रोक और Form-6 नियमों के अनुरूप होना प्रमुख माँगें हैं।

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