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7 नवम्बर 2026, शनि

बंगाल में 31 दिसंबर तक 2.5 लाख लोगों को CAA से नागरिकता: CM शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, मतुआ समुदाय को 50 करोड़

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को ऐलान किया कि राज्य सरकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदनों की सुनवाई तेज करेगी और 31 दिसंबर तक 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता देने का लक्ष्य है। उन्होंने मतुआ समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में आयोजित इंटरनेशनल मतुआ गोसाई कन्वेंशन 2026 को संबोधित कर रहे थे। ठाकुरनगर मतुआ समुदाय का पारंपरिक गढ़ और आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली ठाकुरनगर यात्रा थी।

मुख्यमंत्री ने क्या-क्या कहा

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, अधिकारी ने कहा, “पश्चिम बंगाल में अब तक CAA के तहत सिर्फ 25,000 लोगों को नागरिकता मिली है… हम सुनवाई तेज करेंगे और 31 दिसंबर तक 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता देंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने CAA लागू किया, सिर्फ ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया।

उन्होंने राज्य में BJP सरकार बनने का श्रेय मतुआ समुदाय के समर्थन को दिया। द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि जिन 70 विधानसभा सीटों पर मतुआ समुदाय ने उनके प्रतिनिधि चुने हैं, वहां के लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

मतुआ समुदाय के लिए घोषणाएं

  • मतुआ समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का अनुदान।
  • CAA के तहत नागरिकता पाने वाले सभी पात्र अनुसूचित जाति (SC) के लोगों को SC प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
  • राज्य सरकार जनवरी में चुनाव आयोग से संपर्क करेगी, ताकि CAA प्रमाणपत्र पाने वालों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़ सकें।
  • CAA प्रमाणपत्र मिलने के बाद मतुआ समुदाय की 25 से 60 साल की महिलाओं को अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ दिलाने का भरोसा।
  • पात्र परिवारों को राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना और आयुष्मान भारत कार्ड दिलाने में मदद।
  • ठाकुरनगर के लिए अलग नगरपालिका, मतुआ महातीर्थ में नया मंदिर और सालाना बारुणी मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने का वादा।
  • आवेदनों की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में एक अधिकारी तैनात किया जाएगा।

CAA क्या है?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 में संसद से पास हुआ था और इसके नियम मार्च 2024 में अधिसूचित हुए। यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के उन लोगों को भारतीय नागरिकता का रास्ता देता है, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए थे। आवेदन ऑनलाइन होते हैं और दस्तावेजों की जांच व सुनवाई के बाद नागरिकता प्रमाणपत्र जारी होता है।

मतुआ समुदाय कौन है?

मतुआ एक अनुसूचित जाति समुदाय है, जिसकी जड़ें आज के बांग्लादेश में हैं। 19वीं सदी के आखिर में हरिचांद ठाकुर के नेतृत्व में शुरू हुए सामाजिक सुधार आंदोलन से यह समुदाय जुड़ा है, जिसने अविभाजित पूर्वी बंगाल के नमशूद्र समाज को संगठित किया। बंटवारे और उसके बाद के दशकों में बड़ी संख्या में मतुआ परिवार पश्चिम बंगाल आकर बसे। दक्षिण बंगाल की कई सीटों पर इस समुदाय का चुनावी असर काफी अहम माना जाता है, इसलिए नागरिकता का मुद्दा उनके लिए भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों रूप से बड़ा है।

विपक्ष का रुख

पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार CAA का विरोध करती रही थी। मुख्यमंत्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतुआ समाज को बांटा और उनके लिए कुछ नहीं किया। इन आरोपों पर तृणमूल की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी।

आवेदकों पर क्या असर पड़ेगा?

  • जिन लोगों ने CAA के तहत आवेदन किया है, उनकी सुनवाई जल्दी होने की उम्मीद है। अपने सभी दस्तावेज, जैसे भारत आने की तारीख से जुड़े कागजात, तैयार रखें।
  • नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही वोटर लिस्ट में नाम, SC प्रमाणपत्र और योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा, जैसा सरकार ने कहा है।
  • 2.5 लाख आवेदनों को दो महीने में निपटाना बड़ा प्रशासनिक लक्ष्य है। असल रफ्तार सुनवाई की व्यवस्था और दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करेगी।

आगे क्या?

अब नजर इस पर रहेगी कि राज्य सरकार सुनवाई के लिए कितनी नई व्यवस्था करती है और दिसंबर के अंत तक कितने प्रमाणपत्र जारी होते हैं। जनवरी में चुनाव आयोग के साथ वोटर लिस्ट को लेकर होने वाली बातचीत भी अहम होगी।

स्रोत: PTI (The Economic Times, India Today), The Statesman।

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