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7 नवम्बर 2026, शनि

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटकी तीन-स्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर साफ समयसीमा लगा दी है। LiveLaw और Hindustan Times के अनुसार जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) को निर्देश दिया कि चुनाव तीन महीने के भीतर पूरे हों—और वह भी मौजूदा आरक्षण ढांचे के तहत, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण शामिल है।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा

  • चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में कराए जाएं, जिसमें 27% OBC कोटा है
  • Dedicated Backward Classes Commission की जांच अधूरी होने मात्र से OBC सीटों को सामान्य (open) न माना जाए
  • अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला आरक्षण लागू कानून के मुताबिक बना रहे—ऊर्ध्वाधर आरक्षण की कुल सीमा के अधीन
  • राज्य सरकार SEC को स्टाफ, फंड, सुरक्षा व लॉजिस्टिक्स दे
  • आयोग अपनी जांच जारी रखे; सिफारिशों पर राज्य बाद में कानूनी कदम उठाए

बेंच का संदेश सीधा था—त्रिपल टेस्ट और अनुभवजन्य डाटा का लक्ष्य OBC आरक्षण को फिर से गढ़ना है, पर जांच पूरी होना हर चुनाव की पूर्व शर्त नहीं बन सकती। लंबे इंतजार से चुनावी लोकतंत्र खाली नहीं रह सकता।

क्यों अटके थे चुनाव

पिछले चुने हुए पंचायत निकायों का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो गया। 18 मई को राज्य ने Rural Local Bodies Dedicated Backward Classes Commission गठित किया, जो ग्रामीण निकायों में OBC पिछड़ेपन का अनुभवजन्य अध्ययन कर रहा है। सरकार का तर्क सुप्रीम कोर्ट के विकास किशनराव गवली समेत फैसलों के ‘ट्रिपल टेस्ट’ से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जांच के नाम पर चुनाव अनिश्चितकाल तक टाले जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने दोनों बातें साथ रखीं—आयोग काम करे, चुनाव रुके नहीं।

पूर्व ग्राम प्रधान ‘प्रशासक’—चुनौती खारिज

याचिकाकर्ताओं ने 25 मई 2026 के शासनादेश को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत कार्यकाल खत्म होने पर पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया। कोर्ट ने यह राहत खारिज की और UP पंचायत राज अधिनियम की संबंधित धाराओं को असंवैधानिक घोषित करने से इनकार किया। साथ ही चेतावनी दी कि तीन महीने की समयसीमा प्रशासक का कार्यकाल कानून से ज्यादा नहीं बढ़ाती—अस्थायी व्यवस्था चुनावी स्वशासन की जगह नहीं ले सकती।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

  • गांव के मतदाता: अगले तीन महीनों में नामांकन, मतदान और नई पंचायत गठन की तैयारी शुरू होनी चाहिए। वोटर सूची SEC के पास तैयार बताई गई है—अपना नाम/पता जांच लें।
  • OBC आरक्षण: फिलहाल 27% ढांचा बना रहेगा; आयोग की बाद की रिपोर्ट से भविष्य में बदलाव संभव है, पर इस चुनाव को रोकने का बहाना नहीं।
  • प्रशासक वाले गांव: चुनी हुई नई संस्था आने तक प्रशासनिक व्यवस्था कानून की सीमा में रहेगी; लंबे ‘केयरटेकर’ राज पर कोर्ट की नाराजगी साफ है।
  • आगे: सरकार व SEC को तुरंत चुनाव कार्यक्रम जारी करना है। विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ टकराव की आशंकाएं ट्रेड रिपोर्ट्स में हैं, पर कोर्ट की समयसीमा बाध्यकारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

पंचायत चुनाव कितने समय में कराने हैं?

फैसले की तारीख से तीन महीने के भीतर।

OBC आरक्षण कितना रहेगा?

इस चुनाव में मौजूदा 27% OBC आरक्षण के साथ; आयोग की जांच पूरी होने का इंतजार नहीं।

क्या पूर्व ग्राम प्रधान प्रशासक हटेंगे?

कोर्ट ने उनकी नियुक्ति वाली चुनौती खारिज की, पर कहा कि प्रशासक का कार्यकाल कानून से आगे नहीं बढ़ेगा और चुनाव समय पर पूरे हों।

कौन-सी बेंच ने आदेश दिया?

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद।

स्रोत: LiveLaw, Hindustan Times, Economic Times, News18, 15 अक्टूबर 2026।

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