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7 नवम्बर 2026, शनि

पीलीभीत वोटर लिस्ट गड़बड़ी: चुनाव आयोग ने 2 ERO को किया सस्पेंड, FIR में जुड़ेगी BNS धारा 198; 10,470 रिकॉर्ड बदले गए थे

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत शहर का जेएमबी तिराहा

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची से छेड़छाड़ के मामले में चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। साथ ही आयोग ने इन दोनों अधिकारियों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने को कहा है।

क्या है पीलीभीत वोटर लिस्ट का मामला

मामला 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से जुड़ा है। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने 22 अक्टूबर को माना था कि गड़बड़ी हुई है। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हुई थी। इसके बाद 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच एक कंप्यूटर असिस्टेंट ने “सुधार” के नाम पर 13,779 फॉर्म-8 आवेदन सिस्टम में दर्ज किए।

इनमें से 10,470 आवेदन मंजूर हुए और 3,309 खारिज किए गए। जांच में सभी 10,470 मंजूर प्रविष्टियां अनियमित पाई गईं। सबसे गंभीर बात यह रही कि दफ्तर में इन 13,779 में से किसी भी आवेदन का भौतिक फॉर्म या सहायक दस्तावेज मौजूद नहीं था। फॉर्म-8 का इस्तेमाल आमतौर पर मतदाता की जानकारी में सुधार, पता बदलने या रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए होता है।

TOI से बातचीत में CEO रिणवा ने कहा था कि यह कोई गलती या लापरवाही नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया अपराध है। उनके मुताबिक, ऑपरेटर अपने लॉगिन और OTP से आवेदन दर्ज करता है और ERO अलग लॉगिन, पासवर्ड और OTP से उसे मंजूर करता है, इसलिए “पासवर्ड चोरी” का बहाना नहीं चल सकता।

कैसे सामने आया मामला

रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत करने वालों में शामिल एडवोकेट फैजान अली खान को 12 अक्टूबर को पता चला कि उनके EPIC नंबर पर किसी और का नाम दर्ज है। उन्होंने अपने बूथ के 1,037 मतदाताओं में से 142 प्रविष्टियों में बदलाव पाया। इसके बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी यह मुद्दा उठाया। 22 अक्टूबर को कोतवाली थाने में दोनों ERO और VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और BNS की धारा 201 में FIR दर्ज की गई थी। (कुछ रिपोर्ट्स में दूसरे अधिकारी का नाम हेमंत कुमार लिखा गया है।)

चुनाव आयोग के आदेश में क्या-क्या

IANS और Indian Express के मुताबिक, 31 अक्टूबर को यूपी CEO को भेजे पत्र में आयोग ने ये निर्देश दिए:

  • दोनों ERO तत्काल निलंबित हों और उनकी चार्जशीट आयोग को जांच के लिए भेजी जाए।
  • आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा।
  • FIR में BNS की धारा 198 (लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना) जोड़ी जाए और अदालत में मामले की सख्ती से पैरवी हो।
  • पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूची की जांच रिपोर्ट एक हफ्ते में भेजी जाए।
  • कंप्यूटर ऑपरेटर पर की गई कार्रवाई और पीलीभीत सीट के पांच सहायक ERO (AERO) की भूमिका पर रिपोर्ट तीन दिन में दी जाए।
  • पूरे यूपी के सभी DEO/ERO अपने क्षेत्र की मतदाता सूची, खासकर फॉर्म 6, 7 और 8 से हुए जोड़, कटौती और बदलाव की दोबारा गहन जांच करें।

Indian Express के अनुसार, शनिवार को ही यूपी CEO ने दुरुपयोग के आरोपों के बाद राज्य के ERO दफ्तरों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के पासवर्ड निष्क्रिय करने का आदेश भी दिया।

सियासी पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब विपक्षी INDIA गठबंधन SIR और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। विपक्ष पीलीभीत जैसे मामलों को अपने आरोपों के समर्थन में पेश कर रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि गड़बड़ी पकड़ में आने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल यह मामला अदालत और विभागीय जांच के दायरे में है, और आरोपियों का दोष अभी साबित होना बाकी है।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

अगर आप उत्तर प्रदेश के मतदाता हैं, तो यह मामला आपके लिए एक चेतावनी है कि अंतिम सूची में नाम होने के बाद भी रिकॉर्ड की जांच करते रहना जरूरी है। आप ये कदम उठा सकते हैं:

  • चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल या Voter Helpline ऐप पर अपना EPIC नंबर डालकर नाम, पता और फोटो की जांच करें।
  • कोई गलत बदलाव दिखे तो अपने BLO या ERO कार्यालय में लिखित शिकायत करें, और 1950 हेल्पलाइन पर भी संपर्क कर सकते हैं।
  • सुधार के लिए खुद फॉर्म-8 भरें तो उसकी रसीद/रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।

आगे आयोग को एक हफ्ते में पीलीभीत की चारों सीटों की रिपोर्ट मिलनी है, और पूरे प्रदेश में फॉर्म 6, 7 और 8 की दोबारा जांच से और मामले सामने आ सकते हैं। प्रभावित मतदाताओं के रिकॉर्ड सुधारने का काम भी चल रहा है।

स्रोत: Indian Express, IANS, Times of India, CNBC-TV18।

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