कर्नाटक के सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत की पहली किस्त जारी होने जा रही है। राज्य सरकार ने बेमौसम और कम बारिश से फसल गंवाने वाले पात्र किसानों को अधिकतम ₹2,500 की अंतरिम (मध्यवर्ती) सहायता देने का आदेश जारी किया है। कन्नड़ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के वरिष्ठ मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने बताया है कि यह रकम सोमवार (2 नवंबर) से किसानों के खातों में भेजी जानी शुरू होगी। लेकिन इस राहत के साथ जुड़ी 17 शर्तों को लेकर सियासत गरमा गई है।
किन किसानों को मिलेगा पैसा
न्यूज एजेंसी IANS के हवाले से छपी रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार ने 29 अक्टूबर को आदेश जारी कर सूखाग्रस्त तालुकों के किसानों को पहली किस्त के रूप में ₹2,500 देने की मंजूरी दी। राज्य के कुल 240 तालुकों में से 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) की रकम आने का इंतजार करने के बजाय राज्य सरकार यह पैसा अपने राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) से दे रही है।
सबसे अहम बात यह है कि किसानों को अलग से कोई आवेदन नहीं करना होगा। लाभार्थियों की पहचान राज्य के FRUITS पोर्टल (Farmer Registration and Unified Beneficiary Information System) और खरीफ फसल सर्वे के डेटा से की जाएगी। पैसा DBT के जरिए सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में आएगा। कन्नड़ प्रभा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से करीब 45 से 50 लाख किसानों को फायदा मिलने का अनुमान है।
17 शर्तों में क्या-क्या है
सरकारी आदेश में पात्रता और भुगतान से जुड़ी 17 बातें लिखी गई हैं। News18 कन्नड़ और अन्य रिपोर्ट्स के आधार पर इनमें प्रमुख हैं:
- राहत सिर्फ उन्हीं किसानों को, जो FRUITS पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जिनके पास Farmer ID है और जिनकी फसल सूखाग्रस्त घोषित तालुक में है।
- भुगतान आधार से जुड़े खाते में DBT के जरिए ही होगा।
- जिस कृषि भूमि का अधिग्रहण हो चुका है या जो गैर-कृषि उपयोग (NA) में बदल चुकी है, उस पर राहत नहीं मिलेगी।
- सरकारी जमीन पर फसल नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
- संयुक्त खाते वाली जमीन पर भुगतान FRUITS में पंजीकृत व्यक्ति को होगा, और एक ही जमीन पर दोहरा भुगतान रोका जाएगा।
- RTC (भूमि रिकॉर्ड) और फसल सर्वे में नाम अलग होने पर ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) 3 दिन में बायोमेट्रिक सत्यापन करेंगे।
- आधार और RTC में नाम का मिलान 70% से कम होने पर मामला तहसीलदार को जाएगा, जो 5 दिन में सत्यापन करेंगे।
- भुगतान से पहले जिलाधिकारी डिजिटल सिग्नेचर से जिले के डेटा को मंजूरी देंगे।
विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई
भाजपा ने इन शर्तों पर सरकार को घेरा है। IANS के मुताबिक, कारकल से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री वी. सुनील कुमार ने कहा कि सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए ₹2,500 पर 17 शर्तें लगाना उनका मजाक है। किसान संगठन और विपक्षी नेता प्रति किसान ₹25,000 मुआवजे की मांग करते रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी शर्तों को किसानों के लिए अड़चन बताया था।
वहीं डॉ. जी. परमेश्वर ने पलटवार करते हुए कहा कि इन शर्तों का मकसद असली लाभार्थियों तक पैसा पहुंचाना, एक ही व्यक्ति को दोबारा भुगतान रोकना और सार्वजनिक धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि 2 हेक्टेयर की सीमा केंद्र सरकार के SDRF/NDRF मानकों का हिस्सा है और 2005 से लागू है। उनके मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं कि 2 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन वाले किसान अयोग्य हैं, बल्कि मुआवजा अधिकतम 2 हेक्टेयर तक के नुकसान पर ही गिना जाएगा।
₹2,500 अंतिम रकम नहीं
सरकार ने साफ किया है कि यह सिर्फ पहली किस्त है। परमेश्वर के बयान के अनुसार, संशोधित SDRF/NDRF मानकों के तहत वर्षा आधारित फसलों के लिए ₹11,000 प्रति हेक्टेयर, सिंचित फसलों के लिए ₹22,000 और बहुवर्षीय व बागवानी फसलों के लिए ₹30,000 प्रति हेक्टेयर तक मुआवजे का प्रावधान है। बाकी रकम केंद्र से NDRF अनुदान आने के बाद दी जाएगी।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
अगर आप कर्नाटक के किसी सूखाग्रस्त तालुक के किसान हैं, तो ये बातें ध्यान रखें:
- FRUITS रजिस्ट्रेशन जांचें: आपकी Farmer ID बनी होनी चाहिए और जमीन के सर्वे नंबर उससे जुड़े होने चाहिए।
- आधार-बैंक लिंकिंग: खाते का आधार से जुड़ा और NPCI पर सक्रिय होना जरूरी है, वरना DBT अटक सकता है।
- नाम का मिलान: RTC और आधार में नाम में बड़ा अंतर है तो VAO या तहसील कार्यालय से संपर्क करें।
- आवेदन की जरूरत नहीं: कोई एजेंट या बिचौलिया पैसे लेकर “फॉर्म भरवाने” की बात करे तो सावधान रहें।
आगे सबकी नजर इस पर रहेगी कि पहली किस्त कितनी तेजी से खातों में पहुंचती है और केंद्र NDRF से कितनी राशि जारी करता है। बाकी मुआवजे की रकम और समय-सीमा पर राज्य सरकार की अगली घोषणा अहम होगी।
स्रोत: IANS/NewKerala, Asianet Suvarna News (कन्नड़ प्रभा), News18 कन्नड़, Kannada Oneindia।

