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5 नवम्बर 2026, गुरु

कर्नाटक गन्ना किसान आंदोलन: 2 नवंबर को बेलगावी में ‘जेल भरो’, 5,500 रुपये प्रति टन की मांग; सरकार ने दिया 50+150 का ऑफर

कर्नाटक के श्रीरंगपट्टण के पास लहराता गन्ने का खेत

कर्नाटक में गन्ने के दाम को लेकर किसानों का आंदोलन और तेज होने जा रहा है। गन्ना किसान सोमवार, 2 नवंबर 2026 को बेलगावी की हिंडलगा सेंट्रल जेल पर ‘जेल भरो’ आंदोलन करेंगे। कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसिरु सेना के प्रदेश अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी के मुताबिक, किसान सुबह 11 बजे गुरलापुर क्रॉस पर इकट्ठा होंगे। उन्होंने इसे करीब एक महीने से चल रहे आंदोलन का अंतिम चरण बताया है।

शनिवार को बंद का मिला-जुला असर

इससे पहले शनिवार, 31 अक्टूबर को गन्ना किसानों के ‘कर्नाटक बंद’ का राज्य के कई हिस्सों में असर दिखा। द हिंदू के मुताबिक, किट्टूर कर्नाटक क्षेत्र में बंद का मिला-जुला असर रहा। बेलगावी, विजयपुरा, बागलकोट, धारवाड़ और हावेरी जिलों में सड़कें जाम की गईं। गोकाक, कागवाड़, निप्पाणी, अथणी और मुदलगी जैसे कस्बों में रास्ते रोके गए और निप्पाणी व कागवाड़ के पास कर्नाटक-महाराष्ट्र को जोड़ने वाली सड़कें भी बंद रहीं।

धारवाड़ में किसानों ने जुबली सर्कल के पास दो घंटे से ज्यादा सड़क रोकी, जिससे बस सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहीं। हावेरी में किसानों ने चीनी मंत्री रुद्रप्पा लमाणी के घर के बाहर धरना शुरू किया। विजयपुरा जिले के संगापुर गांव में प्रदर्शनकारियों ने उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल को घेर लिया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया। किसानों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मैसूरु में किसानों ने मैसूरु-ऊटी राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुछ देर के लिए जाम किया।

किसानों की मुख्य मांगें

अलग-अलग किसान संगठनों की मांगें थोड़ी अलग हैं, लेकिन मुख्य मुद्दा गन्ने का बेहतर दाम है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रमुख मांगें ये हैं:

  • गन्ने के लिए 5,500 रुपये प्रति टन, जिसमें राज्य सरकार की ओर से 1,000 रुपये प्रति टन का प्रोत्साहन शामिल हो (द हिंदू)।
  • चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) 31 रुपये से बढ़ाकर ज्यादा किया जाए। संगठनों ने 60 रुपये प्रति किलो तक की मांग रखी है।
  • FRP (उचित और लाभकारी मूल्य) की गणना के लिए रिकवरी का आधार घटाया जाए। डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक किसान 9.5% बेस रिकवरी बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
  • 14 दिन में भुगतान, बकाया न चुकाने वाली मिलों पर कार्रवाई, सरकारी निगरानी वाले तौल कांटे और गन्ने का फसल बीमा।

कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष हल्ली केरेहुंडी भाग्यराज ने कहा कि तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य FRP के ऊपर अतिरिक्त राशि देते हैं, इसलिए कर्नाटक को भी 1,000 रुपये प्रति टन अतिरिक्त देने चाहिए।

सरकार क्या कह रही है

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि उन्होंने केंद्र को पत्र लिखकर गन्ने का FRP कम से कम 50 रुपये बढ़ाने की मांग की है और वे जल्द संबंधित केंद्रीय मंत्री से मिलेंगे। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अतिरिक्त 50 रुपये देने का फैसला किया है, जबकि चीनी मिलें 150 रुपये और देंगी। शिवकुमार ने यह भी कहा कि चीनी का दाम 10 साल से नहीं बढ़ा है, जबकि किसानों की लागत दोगुनी हो गई है, और अगर केंद्र चीनी का दाम 50 रुपये तय करे तो वे गन्ना किसानों को उचित दाम की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने मिलों से तुरंत पेराई शुरू करने को भी कहा।

किसान नेताओं का कहना है कि राज्य और केंद्र एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। किसान नेता सुभाष मदनवार ने कहा कि राज्य केंद्र की ओर इशारा कर रहा है और केंद्र समितियां बनाकर मामला टाल रहा है।

FRP और SAP को आसान भाषा में समझें

FRP वह न्यूनतम कीमत है, जो केंद्र सरकार हर सीजन के लिए तय करती है और जिसे चीनी मिलों को किसानों को देना ही होता है। यह कीमत एक तय ‘रिकवरी’ (गन्ने से कितनी चीनी निकलती है) के आधार पर होती है। रिकवरी का आधार जितना ऊंचा रखा जाता है, कम रिकवरी वाले इलाकों के किसानों को उतना कम दाम मिलता है, इसलिए किसान आधार घटाने की मांग करते हैं। कई राज्य FRP के ऊपर अपनी ओर से SAP (राज्य परामर्शित मूल्य) या प्रोत्साहन देते हैं। कर्नाटक में किसान इसी अतिरिक्त राशि की मांग कर रहे हैं।

आप पर क्या असर पड़ेगा

अगर आंदोलन लंबा चला तो उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में सड़क यातायात और बस सेवाओं पर असर पड़ सकता है। 2 नवंबर को बेलगावी और आसपास यात्रा करने वाले लोग स्थानीय प्रशासन की ट्रैफिक सूचना देखकर निकलें। पेराई में देरी से किसानों के खेत में खड़ा गन्ना सूखने का खतरा भी बढ़ता है, जिससे उनकी आमदनी पर असर पड़ता है।

आगे सबकी नजर इस पर है कि राज्य सरकार किसानों से बातचीत में कोई नया प्रस्ताव लाती है या केंद्र FRP और चीनी के दाम पर कोई फैसला करता है।

स्रोत: द हिंदू, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, डेक्कन हेराल्ड

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