झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गम्हरिया थाने में घरेलू विवाद के बाद मदद मांगने पहुंची एक महिला ने थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर पर थाना परिसर के अंदर ही दुष्कर्म का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद आरोपी नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि थाना प्रभारी समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें खुद आरोपी भी शामिल है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, घटना 29 अक्टूबर (गुरुवार) की रात की है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि गुरुवार शाम पति से उसका झगड़ा हुआ था। मारपीट की आशंका से वह घर छोड़कर पड़ोसी के घर चली गई और वहीं से मोबाइल फोन पर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद PCR वैन पड़ोसी के घर पहुंची और महिला को रात में गम्हरिया थाने ले आई।
बयान के अनुसार, ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने महिला को आराम करने के लिए थाने का एक कमरा दे दिया। आरोप है कि इसी कमरे में थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता का आरोप यह भी है कि शोर मचाने पर वहां पहुंचे चार पुलिसकर्मियों ने उसकी कोई मदद नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, बचाव में महिला ने चाकू से वार किया, जिससे आरोपी की उंगली कट गई। ये सभी बातें पीड़िता के आरोप और शुरुआती रिपोर्ट पर आधारित हैं, जिनकी जांच चल रही है।
FIR, SIT और गिरफ्तारी
पीड़िता के लिखित आवेदन पर गम्हरिया थाने में शनिवार (31 अक्टूबर) को प्राथमिकी दर्ज की गई। सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (SP) मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर सरायकेला के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया। SDPO की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए घटना वाले कमरे को सील कर दिया गया है। पुलिस ने आरोपी के घटना के समय पहने कपड़े भी जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए रांची स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजने की प्रक्रिया चल रही है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया।
किन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
SP ने कर्तव्य में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के आरोप में ये कार्रवाई की है। निलंबित पुलिसकर्मियों में शामिल हैं:
- गम्हरिया थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संजय प्रसाद
- सब इंस्पेक्टर मनोज साहू
- सब इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह
- हवलदार मुनेश्वर कुमार
- आरक्षी संतोष राय
- आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा (निलंबित और गिरफ्तार)
पुलिस बयान के अनुसार, निलंबित पांचों पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। कई अंग्रेजी मीडिया रिपोर्ट्स में “5 सस्पेंड” लिखा गया है क्योंकि उनमें आरोपी को अलग गिना गया है; आरोपी को जोड़कर कुल संख्या छह होती है।
सियासत भी गरमाई
मामले पर राज्य की राजनीति भी तेज हो गई है। PTI के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि राज्य में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं और पुलिस प्रशासन को किसी का डर नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अफसर पैसे देकर पोस्टिंग पाते हैं और सत्ता के संरक्षण में बालू, लौह अयस्क और कोयले की चोरी होती है। ये विपक्ष के आरोप हैं; JMM-कांग्रेस-RJD गठबंधन सरकार की ओर से इन पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
क्यों गंभीर है यह मामला
थाना वह जगह है जहां मुसीबत में फंसा व्यक्ति सबसे पहले सुरक्षा की उम्मीद लेकर जाता है। हिरासत या पुलिस परिसर के भीतर यौन हिंसा को कानून बेहद गंभीर अपराध मानता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी किसी लोक सेवक या पुलिस अधिकारी द्वारा अपनी अभिरक्षा या परिसर में किए गए दुष्कर्म के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इसी वजह से इस मामले में सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि उस रात ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। महिला को रात में थाने में किस व्यवस्था के तहत रखा गया, क्या महिला पुलिसकर्मी मौजूद थी, और शोर मचने के बाद क्या कदम उठाए गए, ये सवाल SIT जांच के केंद्र में रहेंगे।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
यह मामला हर उस महिला के लिए अहम है जिसे कभी पुलिस की मदद लेनी पड़ सकती है। नियमों के मुताबिक, महिलाओं से जुड़े मामलों में महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी अपेक्षित होती है और किसी महिला को सामान्यतः रात में थाने में रोके रखने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश हैं। अगर आप या आपका कोई परिचित किसी संकट में है, तो 112 (आपात सेवा) और 181 (महिला हेल्पलाइन) जैसे नंबरों का इस्तेमाल किया जा सकता है, और शिकायत दर्ज कराते समय महिला अधिकारी की मांग करना आपका अधिकार है।
आगे की बात करें तो SIT अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर चार्जशीट तैयार करेगी। निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी चलेगी। आरोपी को अदालत में दोषी साबित होने तक कानून की नजर में आरोपी ही माना जाएगा। TrendFlash इस मामले से जुड़े नए आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए हुए है।
नोट: कानून के तहत यौन अपराध पीड़िता की पहचान उजागर करना अपराध है, इसलिए इस रिपोर्ट में उनसे जुड़ी कोई पहचान योग्य जानकारी नहीं दी गई है। स्रोत: NDTV/PTI, हिंदुस्तान, Times Now।

