गरीब बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को हर महीने पेंशन देने वाली केंद्र की सबसे पुरानी सामाजिक सुरक्षा योजना अब नए नाम से जानी जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को अगले पांच साल (2026-27 से 2030-31) तक जारी रखने की मंजूरी दी और इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया। योजना के लिए कुल ₹53,428 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
नाम बदलने से ज्यादा बड़ी खबर दिव्यांगजनों के लिए है। अब 40% दिव्यांगता वाले लोग भी पेंशन के दायरे में आएंगे, जबकि अब तक यह शर्त 80% की थी। साथ ही न्यूनतम उम्र की शर्त हटा दी गई है—यानी जन्म से ही पात्रता बनेगी।
किस योजना का क्या नया नाम
- NSAP → प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना → प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना → प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना → प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना
- राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना → प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना
यानी पेंशन योजनाओं के नाम से ‘इंदिरा गांधी’ हट गया है। लेकिन लाभार्थी के लिए असली सवाल यह है कि उसे क्या और कितना मिलेगा।
दिव्यांगजन पेंशन में तीन बड़े बदलाव
1. पेंशन की नई दर
सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक केंद्र की ओर से दिव्यांगजन पेंशन अब 0 से 79 साल की उम्र तक ₹375 प्रति माह और 80 साल या उससे ज्यादा उम्र पर ₹625 प्रति माह होगी।
2. 80% की जगह 40% दिव्यांगता
अब तक केवल गंभीर (80% या ज्यादा) दिव्यांगता वाले लोग इस पेंशन के हकदार थे। नई व्यवस्था में ‘बेंचमार्क दिव्यांगता’ यानी 40% को आधार बनाया गया है। यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप है, जो 40% बेंचमार्क तय करता है और कहता है कि दिव्यांगों की सहायता दूसरी समान योजनाओं से 25% ज्यादा होनी चाहिए।
3. उम्र की कोई न्यूनतम सीमा नहीं
पहले आवेदन के लिए न्यूनतम उम्र की शर्त थी। अब दिव्यांग बच्चे भी जन्म से इस योजना के दायरे में आ सकेंगे, जो गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन तथा परिवार लाभ योजना फिलहाल मौजूदा रूप में ही जारी रहेंगी—उनकी राशि या नियमों में कोई बदलाव घोषित नहीं हुआ है। सरकार के मुताबिक कुल 3.20 करोड़ लाभार्थी, सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में, इस फैसले के दायरे में हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा
- 40% से 79% दिव्यांगता वाले परिवार: अब तक जिनका आवेदन 80% की शर्त पर अटक जाता था, वे नई गाइडलाइन आने के बाद आवेदन कर सकेंगे—बशर्ते परिवार गरीबी रेखा (BPL) की पात्रता में आता हो।
- दिव्यांग बच्चों के माता-पिता: उम्र की शर्त हटने से बच्चे के नाम पर भी पेंशन का रास्ता खुलेगा।
- राज्य की टॉप-अप राशि: यह केंद्र का हिस्सा है। कई राज्य इसमें अपनी ओर से राशि जोड़कर पेंशन देते हैं, इसलिए आपके हाथ में आने वाली कुल रकम राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है।
- बुजुर्ग और विधवा लाभार्थी: नाम बदलने से आपकी चल रही पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा; दोबारा आवेदन की जरूरत की कोई बात विज्ञप्ति में नहीं है।
अभी से क्या तैयारी करें
नई गाइडलाइन आने तक ये कागज तैयार रखें—सरकारी अस्पताल/मेडिकल बोर्ड से बना दिव्यांगता प्रमाणपत्र या UDID कार्ड, BPL या राशन कार्ड से जुड़ा प्रमाण, आधार कार्ड और आधार से जुड़ा बैंक खाता। आवेदन आम तौर पर ग्राम पंचायत, ब्लॉक या नगर निकाय के समाज कल्याण कार्यालय के जरिए होता है। किसी एजेंट को पैसे न दें—यह योजना पूरी तरह मुफ्त है।
आगे क्या
कैबिनेट विज्ञप्ति के मुताबिक दिव्यांगजन पेंशन की नई पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और दरों से जुड़ी गाइडलाइन तीन महीने के भीतर जारी कर लागू की जाएगी। यानी नए आवेदकों को असल फायदा गाइडलाइन जारी होने के बाद ही मिलेगा। राज्यों को भी अपने पोर्टल और फॉर्म में बदलाव करने होंगे। NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी और यह संविधान के अनुच्छेद 41 (नीति-निर्देशक तत्व) के तहत केंद्र की जिम्मेदारी के रूप में 100% केंद्रीय सहायता से चलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना क्या है?
यह NSAP का नया नाम है, जिसके तहत गरीब बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को पेंशन और परिवार के कमाने वाले की मौत पर परिवार लाभ मिलता है।
दिव्यांगजन पेंशन अब कितनी मिलेगी?
केंद्र की ओर से 0-79 साल पर ₹375 और 80 साल से ऊपर ₹625 प्रति माह।
कितने प्रतिशत दिव्यांगता पर पेंशन मिलेगी?
अब 40% बेंचमार्क दिव्यांगता पर, पहले यह शर्त 80% थी।
नए नियम कब से लागू होंगे?
सरकार ने तीन महीने के भीतर गाइडलाइन जारी कर लागू करने की बात कही है।
स्रोत: PIB (कैबिनेट विज्ञप्ति, 14 अक्टूबर 2026), Mint, Hindustan Times, The Times of India।

