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6 नवम्बर 2026, शुक्र

CJP नेता सौरव दास-आशुतोष रांका तिहाड़ से रिहा, अगले दिन क्राइम ब्रांच का समन; पूछताछ में नहीं पहुंचे, मांगा समय

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल का मंच, फाइल फोटो

तिहाड़ जेल से रिहाई के 24 घंटे के भीतर ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर सौरव दास और आशुतोष रांका फिर दिल्ली पुलिस के रडार पर हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को और CJP के एक और नेता अजिंक्य शिंदे को गुरुवार, 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित अपने दफ्तर में पेश होने का नोटिस भेजा था। लेकिन समाचार एजेंसी ANI ने दिल्ली पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों नेता आज पूछताछ में शामिल नहीं हुए और उन्होंने पुलिस से और समय मांगा है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस अब उन्हें नया नोटिस दे सकती है। यह खबर इस वक्त गूगल ट्रेंड्स इंडिया पर सबसे ज्यादा सर्च हो रहे विषयों से जुड़ी खबरों में सबसे ऊपर है।

किस मामले में आया क्राइम ब्रांच का नोटिस

इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू और मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नोटिस 13 अक्टूबर की घटना से जुड़ा है। उस दिन CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन बुलाया था। पुलिस का आरोप है कि दास और रांका बैरिकेड लांघकर और एक निजी परिसर से होते हुए जंतर-मंतर पहुंचे, जबकि जंतर-मंतर को हाल ही में तय विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा (डिनोटिफाई) दिया गया है। वहां उन्होंने तिरंगा फहराया।

इस घटना पर दोनों के खिलाफ दो केस दर्ज हुए थे, जिन्हें अब क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। ताजा समन ट्रेसपासिंग (अनधिकृत प्रवेश) वाले केस में है, जो जनता दल (यूनाइटेड) की शिकायत पर दर्ज हुआ था। JD(U) का दफ्तर प्रदर्शन स्थल से सटा हुआ है। जांच में सरकारी आदेश की अवहेलना का आरोप भी शामिल है; रिपोर्ट्स में इसके लिए धारा 188 का जिक्र किया गया है। ध्यान रहे, ये अभी पुलिस के आरोप हैं, किसी अदालत ने इन पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।

सात दिन बाद कैसे हुई रिहाई

दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बुधवार, 21 अक्टूबर को नई दिल्ली जिले के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के तौर पर काम कर रहे एसीपी ऋतु राज ने उनकी रिहाई का आदेश दिया। हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इसके लिए तीन शर्तें रखी गईं:

  • दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत (श्योरिटी) देनी होगी, जो जांच पूरी होने तक लागू रहेगी।
  • उन्हें लिखित में भरोसा देना पड़ा कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर कानून के मुताबिक दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं होता, वहां किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। आगे कोई भी विरोध “संविधान के दायरे में” होगा।
  • हर सुनवाई में पेश होना होगा। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे है, जिसमें दोनों और उनके जमानतियों को मौजूद रहने को कहा गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनवाई के दौरान उनके वकील ने पुलिस की ओर से बताए गए आचरण के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी। पुलिस ने हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। इससे पहले बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष सुनवाई में दोनों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसे आदेश के खिलाफ सही रास्ता पहले सेशंस कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर करना है। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के समय भी दोनों ने इसी तरह के बॉन्ड भरे थे।

रिहाई के बाद फिर उठाई CEC के इस्तीफे की मांग

बुधवार देर रात तिहाड़ से बाहर आने के कुछ घंटों बाद दोनों नेता एक वीडियो में तिरंगा थामे नजर आए और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि दास और रांका उनसे “कहीं बड़े नेता” हैं। यह मांग विपक्ष के उस अभियान से जुड़ी है, जिसमें SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सियासी प्रतिक्रियाएं

मामले पर राजनीति भी तेज है। ANI के मुताबिक भाजपा नेता प्रकाश रेड्डी ने दोनों को “राजनीति से प्रेरित लोग” बताया और कहा कि CJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि देश को “अराजक सोच” वालों के हाथ में नहीं जाने दिया जा सकता। दूसरी ओर, CPI महासचिव डी. राजा ने कहा कि INDIA गठबंधन जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल बनाने के लिए लड़ेगा। PTI के मुताबिक गुरुवार को प्रस्तावित INDIA गठबंधन की वर्चुअल बैठक टाल दी गई है, जिसमें 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली की तैयारी पर भी चर्चा होनी थी।

आगे क्या: अगले कुछ दिन क्यों अहम हैं

  • नया नोटिस: पुलिस सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच दोनों को पूछताछ के लिए नई तारीख का नोटिस दे सकती है। जांच में शामिल होना या न होना आगे की कानूनी स्थिति पर असर डाल सकता है।
  • 23 अक्टूबर की सुनवाई: SEM के सामने दोपहर 3 बजे सुनवाई होगी, जहां जांच अधिकारी को जमानतियों के सत्यापन की रिपोर्ट देनी है।
  • शुक्रवार का मार्च: हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक छात्रों, किसानों और सिविल सोसायटी समूहों के गठबंधन ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ ने शुक्रवार को दिल्ली में मार्च बुलाया है। इसमें अभिजीत दीपके, नेहा बोरा, आइशी घोष, प्रशांत भूषण, परकला प्रभाकर, प्रकाश राज, राकेश टिकैत और तुषार गांधी को न्योता दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए पुलिस से अनुमति नहीं मांगी गई है।
  • नेहा बोरा की याचिका: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 हजार रुपये के ‘पीस बॉन्ड’ नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर गुरुवार दोपहर सुनवाई तय थी।

आप पर क्या असर पड़ेगा

अगर आप दिल्ली में रहते हैं या नई दिल्ली इलाके (कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, जंतर-मंतर) से रोज गुजरते हैं, तो अगले कुछ दिनों में प्रदर्शन और पुलिस बंदोबस्त के चलते ट्रैफिक डायवर्जन या रास्ते बंद होने की संभावना है। निकलने से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अपडेट जरूर देखें। बड़े सवाल पर नजर रखें कि क्या जंतर-मंतर दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित होगा, क्योंकि दशकों से यह राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध की सबसे जानी-पहचानी जगह रही है। TrendFlash इस मामले में हर नई कानूनी और राजनीतिक जानकारी पर नजर रखे हुए है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू, मनीकंट्रोल, NDTV इंडिया (ANI/PTI/IANS इनपुट के साथ)।

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