देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने माना है कि उसके कुछ ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का संदेह है। बैंक ने बुधवार, 21 अक्टूबर को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि डार्क वेब पर मौजूद करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले हैं, जिनमें ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी (PII) है। SBI ने साथ ही ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनके खातों में जमा पैसा सुरक्षित है। करोड़ों खाताधारकों वाले बैंक से जुड़ी इस खबर के बाद लोग सबसे ज्यादा यही जानना चाह रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए।
कौन-सी जानकारी लीक होने का संदेह
बिजनेस स्टैंडर्ड और CNBC TV18 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक के खुलासे में जिन जानकारियों का जिक्र है, वे ये हैं:
- ग्राहक का नाम, लिंग और जन्मतिथि
- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पता
- घर का पता
- ब्रांच की जानकारी और CIF (कस्टमर इंफॉर्मेशन फाइल) आइडेंटिफायर
- लीड आईडी और लोन व लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा
अब तक सामने आई जानकारी में यह नहीं कहा गया है कि इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड, ATM पिन, OTP या लेनदेन से जुड़े क्रेडेंशियल लीक हुए हैं। CNBC TV18 ने भी साफ लिखा है कि डार्क वेब पर रिकॉर्ड मिलने भर से यह साबित नहीं होता कि किसी का खाता हैक हुआ है या पैसा चोरी हुआ है।
SBI को कब और कैसे पता चला
बैंक के मुताबिक उसे 16 अक्टूबर को तीन जगहों से अलर्ट मिला: उसके थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर से, डिफेंस साइबर एजेंसी से और भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In से। इसके बाद SBI ने अपने साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स और कंटेनमेंट प्रोटोकॉल लागू किए और CERT-In के पैनल में शामिल एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को जांच सौंपी।
बैंक ने कहा है कि विस्तृत जांच से यह तय होगा कि डार्क वेब पर मिला डेटा कितना असली और पूरा है, यह कहां से निकला, कितना फैला है और ग्राहकों व बैंक के लिए इससे क्या जोखिम हैं। SBI का कहना है कि इस घटना का उसके कोर बिजनेस ऑपरेशन, वित्तीय प्रदर्शन या कामकाज की निरंतरता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। ग्राहकों के लिए जारी नोटिस में बैंक ने कहा कि ग्राहकों की संपत्ति, डेटा और भरोसे की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
3,897 का आंकड़ा छोटा, फिर चिंता क्यों
SBI के ग्राहकों की संख्या के मुकाबले 3,897 रिकॉर्ड बहुत छोटा हिस्सा है, लेकिन खतरा संख्या से ज्यादा जानकारी के प्रकार में है। अगर किसी ठग के पास आपका नाम, मोबाइल नंबर, पता, ब्रांच और लोन से जुड़ी जानकारी हो, तो वह खुद को बैंक अधिकारी बताकर बेहद भरोसेमंद तरीके से कॉल या मैसेज कर सकता है। ऐसे ‘टारगेटेड फिशिंग’ में लोग इसलिए फंस जाते हैं क्योंकि सामने वाला उनकी सही जानकारी बता देता है। इसीलिए यह मामला सिर्फ प्रभावित ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि हर बैंक ग्राहक के लिए सावधानी का संकेत है।
यह भी अहम है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और 3.75 लाख रिकॉर्ड में से बाकी डेटा किसका है, यह अभी साफ नहीं है।
ग्राहक संगठन ने क्या मांग की
डिजिटल अधिकारों पर काम करने वाली संस्था इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने SBI से मांग की है कि वह प्रभावित ग्राहकों को SMS, ईमेल और पत्र के जरिए सीधे और तुरंत सूचित करे, बताए कि कौन-सी जानकारी लीक हुई और उनके लिए अलग हेल्पलाइन शुरू करे। IFF ने यह भी पूछा है कि क्या KYC दस्तावेज भी उजागर हुए हैं और डेटा तक पहुंच कैसे बनी। संस्था ने भारतीय रिजर्व बैंक से भी कहा है कि जब तक डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के संबंधित प्रावधान लागू नहीं होते, तब तक बैंकों के लिए डेटा लीक की सूचना ग्राहकों को तय समय में देना अनिवार्य किया जाए। ये संस्था की मांगें हैं; इन पर SBI या RBI का जवाब अभी आना बाकी है।
आप पर क्या असर पड़ेगा: SBI ग्राहक अभी क्या करें
- OTP, पिन, पासवर्ड कभी न बताएं: बैंक कभी फोन, SMS या ईमेल पर ये जानकारी नहीं मांगता, चाहे कॉल करने वाला आपका नाम, ब्रांच या लोन डिटेल सही-सही बता दे।
- ‘KYC अपडेट’ वाले लिंक से बचें: “आपका खाता बंद हो जाएगा, KYC अपडेट करें” जैसे मैसेज के लिंक पर क्लिक न करें। केवल SBI की आधिकारिक वेबसाइट या YONO ऐप का इस्तेमाल करें।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप न डाउनलोड करें: किसी अनजान कॉलर के कहने पर रिमोट एक्सेस या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
- स्टेटमेंट नियमित देखें: SMS अलर्ट चालू रखें और खाते के लेनदेन पर नजर रखें। कोई अनजान ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर पर शिकायत करें।
- ठगी हो तो तुरंत 1930: साइबर फ्रॉड होने पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रोके जाने की संभावना उतनी ज्यादा रहती है।
आगे क्या
CERT-In से जुड़ी एजेंसी की जांच के बाद ही साफ होगा कि डेटा बैंक के सिस्टम से निकला, किसी वेंडर या पार्टनर से, या कहीं और से। SBI ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर रख रहा है और नियामकीय नियमों के मुताबिक जरूरी कदम उठाएगा। अगर बैंक प्रभावित ग्राहकों को सीधे सूचना भेजता है या जांच में नई जानकारी आती है, तो TrendFlash यह खबर अपडेट करेगा।
स्रोत: SBI का स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर और ग्राहक नोटिस (बिजनेस स्टैंडर्ड, CNBC TV18, द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट्स के आधार पर)।

