एशियन पैरा गेम्स 2026 में गुरुवार, 22 अक्टूबर का दिन भारत के लिए दो गोल्ड लेकर आया। बिना बाहों के जन्मीं तीरंदाज शीतल देवी और तोमन कुमार की जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट का स्वर्ण जीता, जबकि 44 साल की सुवर्णा राज ने महिलाओं की F54 डिस्कस थ्रो में सोना अपने नाम किया। मेरठ की स्वाति चौधरी ने तीरंदाजी की W1 कैटेगरी में भारत का अब तक का पहला मेडल (सिल्वर) जीतकर इतिहास रचा। जापान के आइची-नागोया में चल रहे इन खेलों से जुड़ी खबरें गूगल ट्रेंड्स इंडिया पर “खेल” और “sports” सर्च में ऊपर बनी हुई हैं।
शीतल-तोमन का गोल्ड: फाइनल में कैसे जीते
PTI के हवाले से रेडिफ, फ्री प्रेस जर्नल और CNBC TV18 की रिपोर्ट्स के मुताबिक टॉप सीड भारतीय जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया के तेओदोरा ऑडी आयुदिया फेरेली और केन स्वागुमिलांग को 151-148 से हराया। पहले एंड के बाद भारत 38-37 से आगे था और दूसरे एंड के बाद बढ़त 77-73 हो गई, जिसमें भारतीय जोड़ी ने सिर्फ एक अंक गंवाया। तीसरा एंड इंडोनेशिया ने एक अंक से जीता, लेकिन भारत की तीन अंकों की बढ़त बनी रही। आखिरी एंड में दोनों जोड़ियों ने 38-38 अंक बनाए और भारत ने गोल्ड पक्का कर लिया।
इससे पहले क्वालिफिकेशन (रैंकिंग राउंड) में शीतल और तोमन ने 1,402 अंक जोड़कर पिछले विश्व रिकॉर्ड को दो अंकों से तोड़ा था। सेमीफाइनल में चाइनीज ताइपे के खिलाफ मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां तोमन का आखिरी तीर स्कोरिंग जोन से बाहर गया और शून्य मिला। उस समय शीतल ने आठ तीरों में सिर्फ तीन अंक गंवाए और भारत 142-141 से फाइनल में पहुंचा। यह इन खेलों में भारत का तीरंदाजी में पहला गोल्ड है। मिक्स्ड टीम में यह शीतल का लगातार दूसरा एशियन पैरा गेम्स गोल्ड है; 2022 हांगझोउ संस्करण (जो 2023 में हुआ) में उन्होंने राकेश कुमार के साथ यह खिताब जीता था।
कौन हैं शीतल देवी और तोमन कुमार
जम्मू-कश्मीर की शीतल देवी जन्म से बिना बाहों की हैं। वह पैरों से कंपाउंड धनुष संभालती हैं और कंधे व जबड़े की मदद से डोरी खींचकर तीर छोड़ती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह इस समय अपनी कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर-1 हैं और पेरिस पैरालंपिक 2024 में राकेश कुमार के साथ मिक्स्ड टीम ब्रॉन्ज जीत चुकी हैं। इन्हीं खेलों में उन्होंने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड डबल्स का सिल्वर भी जीता था।
31 साल के तोमन कुमार छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के नवागांव गांव के रहने वाले हैं। वह CRPF में कांस्टेबल और कोबरा (CoBRA) कमांडो रह चुके हैं। फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ एक सर्च ऑपरेशन के दौरान IED धमाके में उनका बायां पैर काटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने पैरा तीरंदाजी अपनाई, 2025 में वर्ल्ड चैंपियन बने और पुरुष कंपाउंड कैटेगरी में दुनिया के नंबर-1 पैरा तीरंदाज तक पहुंचे।
सुवर्णा राज का सोना और स्वाति चौधरी का ऐतिहासिक सिल्वर
इंडिया टीवी और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्रेटर नोएडा की सुवर्णा राज ने F54 डिस्कस थ्रो में पांचवें प्रयास में 15.66 मीटर फेंककर गोल्ड जीता। छह में से चार प्रयासों में उन्होंने 15 मीटर से ज्यादा की दूरी तय की। ईरान की शाहला हदीदी (15.45 मीटर) दूसरे और वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन (14.65 मीटर) तीसरे स्थान पर रहीं। 2022 संस्करण में सुवर्णा 15.39 मीटर के साथ आठवें स्थान पर रही थीं। F54 कैटेगरी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है; ये थ्रोइंग चेयर पर बैठकर मुकाबला करते हैं।
तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने महिलाओं के W1 व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकान से 4-6 से हारकर सिल्वर जीता। वह एक समय 4-2 से आगे थीं, लेकिन चौथे सेट में चीनी तीरंदाज ने तीन बार 10 लगाकर मुकाबला पलट दिया। W1 कैटेगरी में यह भारत का पहला मेडल है। बैडमिंटन में प्रमोद भगत-मनीषा रामदास (मिक्स्ड डबल्स SL3-SU5) और कृष्णा नागर-नित्या श्री सुमति शिवन (मिक्स्ड डबल्स SH6) ने ब्रॉन्ज जीते, जबकि तुलसीमति मुरुगेसन और नितेश कुमार SL3-SU5 मिक्स्ड डबल्स के फाइनल में पहुंच गए हैं।
मेडल टैली में भारत कहां
स्पोर्टस्टार और न्यूज नेशन की पदक तालिका के मुताबिक गुरुवार दोपहर (करीब 11:50 बजे IST) तक भारत 16 गोल्ड, 22 सिल्वर और 33 ब्रॉन्ज के साथ कुल 71 मेडल लेकर पांचवें स्थान पर था। चीन 121 गोल्ड के साथ सबसे ऊपर है, उसके बाद उज्बेकिस्तान, जापान और दक्षिण कोरिया हैं। गोल्ड की गिनती से रैंक तय होती है, इसलिए 72 मेडल वाला थाईलैंड (15 गोल्ड) भारत से नीचे है। 21 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत के ज्यादातर गोल्ड एथलेटिक्स से आए हैं, जहां सिमरन ने 100 और 200 मीटर T12 में गोल्ड डबल पूरा किया।
आगे क्या: नजर किस पर रहेगी
खेल अब आखिरी चरण में हैं। भारत को बैडमिंटन फाइनल (तुलसीमति-नितेश), पुरुष एकल SL4 (21 अक्टूबर तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक सुहास एलवाई समेत तीन भारतीय सेमीफाइनल में पहुंचे थे) और एथलेटिक्स की बाकी स्पर्धाओं से और पदकों की उम्मीद है। पिछली बार हांगझोउ में भारत ने 29 गोल्ड समेत रिकॉर्ड 111 मेडल जीते थे, इसलिए अब बड़ा सवाल यही है कि आखिरी दिनों में भारतीय दल उस आंकड़े के कितना करीब पहुंचता है। पदक तालिका बदलने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
स्रोत: PTI (रेडिफ, फ्री प्रेस जर्नल, CNBC TV18), दैनिक भास्कर, इंडिया टीवी, आज तक, स्पोर्टस्टार और न्यूज नेशन की 21-22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स।

