गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई को हाल ही में अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के सबसे कड़े सुरक्षा वाले हिस्से “दो सौ खोली” यानी ब्लॉक 200 में शिफ्ट किया गया है। इस ब्लॉक में आतंकवाद और दूसरे गंभीर अपराधों के आरोपी करीब 200 कैदी रखे जाते हैं। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से दी गई है और जेल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इकोनॉमिक टाइम्स, मनीकंट्रोल और नवभारत टाइम्स ने भी इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है।
क्या है “दो सौ खोली” ब्लॉक?
रिपोर्ट के अनुसार, “दो सौ खोली” साबरमती जेल का मैक्सिमम-सिक्योरिटी हिस्सा है। इसकी क्षमता 200 कैदियों की है, इसी वजह से इसे यह नाम मिला है। ब्लॉक को 50-50 कैदियों के चार अलग-अलग सेक्शन में बांटा गया है, ताकि कैदी एक सेल से दूसरे सेल में आ-जा न सकें और पूरी तरह अलग रहें। बताया गया है कि बिश्नोई की सेल का आकार करीब 7.5 x 11 फीट है।
इसी ब्लॉक में 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस के दोषी भी बंद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां आमतौर पर वे कैदी रखे जाते हैं जिनके जेल से बाहर ले जाए जाने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत रोक लगी होती है। आसान शब्दों में, ऐसे कैदियों को पेशी या किसी दूसरे काम के लिए जेल से बाहर ले जाना बहुत मुश्किल होता है, और उनकी ज्यादातर अदालती सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होती है।
पहले “दस खोली” में था बिश्नोई
इस शिफ्टिंग से पहले लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल के ही “दस खोली” नाम के छोटे हाई-सिक्योरिटी हिस्से में था, जिसमें सिर्फ 10 कैदी रखे जाते हैं। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, बिश्नोई को 2023 में पंजाब की बठिंडा जेल से साबरमती लाया गया था। उससे पहले वह दिल्ली की तिहाड़ जेल और पंजाब की अलग-अलग जेलों में रह चुका है।
दो साल से कोई सीधी कॉल नहीं: जांच एजेंसियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023-24 से पहले बिश्नोई पर जेल से ही रंगदारी की कॉल करने, धमकी भरे ऑडियो-वीडियो भेजकर अपना नेटवर्क चलाने और अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू देने के आरोप लगते रहे। उस दौर में कॉल सेंटर मालिकों को कथित धमकी वाली रिकॉर्डेड कॉल और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ उसकी कथित बातचीत भी सामने आई थी।
लेकिन जांचकर्ताओं के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि पिछले दो साल में बिश्नोई की ओर से कोई सीधी कॉल या संपर्क दर्ज नहीं हुआ है। अब वह बिना किसी शारीरिक मेलजोल और डिजिटल एक्सेस के, चौबीसों घंटे निगरानी में अकेला रखा गया है। बाहरी दुनिया से उसका संपर्क सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालती सुनवाई और अपने वकील से कानूनी सलाह तक सीमित बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वह सेल में सुबह ध्यान करता है, हनुमान चालीसा पढ़ता है, व्रत रखता है और शाकाहारी भोजन करता है।
जेल में बंद, फिर भी गैंग सक्रिय?
बिश्नोई भले ही अलग-थलग हो, रिपोर्ट्स कहती हैं कि उसका सिंडिकेट अब भी विदेशों से चल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उसके करीबी गुर्गों का एक “शैडो कैबिनेट” विदेश में बैठकर रोजमर्रा का काम संभालता है। एक ग्रुप भर्ती, टास्क और लॉजिस्टिक्स देखता है, जबकि दूसरा प्लानिंग, फंडिंग और टारगेट चुनने का काम करता है। रिपोर्ट के अनुसार गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे बड़े नाम FBI के “ऑपरेशन हार्डबॉल” के बाद से अंडरग्राउंड हैं।
मलयाला मनोरमा की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। NIA, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, पंजाब पुलिस और मुंबई पुलिस मिलकर इस गैंग के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, संपत्तियां जब्त की गई हैं और विदेश में बैठे सदस्यों के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और FBI जांच चल रही है।
बैकग्राउंड: क्यों चर्चा में रहता है बिश्नोई गैंग
लॉरेंस बिश्नोई का नाम 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद देशभर में सुर्खियों में आया था, जिसकी जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी। इसके बाद अभिनेता सलमान खान को धमकियों और 2024 में मुंबई में NCP नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या जैसे मामलों में भी इस गैंग का नाम जांच में सामने आया। इन मामलों में अदालती प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए कई आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
इस कदम का क्या मतलब है और आगे क्या?
- नेटवर्क पर लगाम की कोशिश: सुरक्षा एजेंसियों का मकसद यह है कि जेल के अंदर से किसी भी तरह का संपर्क, जैसे फोन, संदेश या दूसरे कैदियों के जरिए बात, पूरी तरह बंद हो।
- विदेशी मॉड्यूल बड़ी चुनौती: जानकारों का मानना है कि सरगना को अलग करने से सीधा नियंत्रण कमजोर होता है, लेकिन विदेश में बैठे गुर्गों पर कार्रवाई के बिना गैंग पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए प्रत्यर्पण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अहम रहेंगे।
- आम लोगों के लिए सीख: अगर किसी को किसी गैंग के नाम से रंगदारी या धमकी की कॉल आए, तो घबराने या पैसे देने के बजाय तुरंत 112 पर या नजदीकी थाने में शिकायत करें। ऐसी कॉल का नंबर, रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट सबूत के तौर पर संभालकर रखें। साइबर ठगी से जुड़ी शिकायत 1930 पर भी की जा सकती है।
फिलहाल यह जानकारी सूत्रों पर आधारित है। गुजरात जेल विभाग या केंद्रीय एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि आने पर हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

