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6 नवम्बर 2026, शुक्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को वकीलों के एक समूह ने जस्टिस अजय भनोट की अदालत (कोर्ट नंबर 49) में तोड़फोड़ की। मामला एक दिन पहले अदालत में एक वकील के साथ कथित व्यवहार से जुड़ा बताया गया है। बार एंड बेंच और इंडिया टुडे (पीटीआई के हवाले से) की रिपोर्टों के अनुसार जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने नारेबाजी को अदालती कार्यवाही में दखल और “पूरी तरह अवमाननापूर्ण” माना और सीसीटीवी फुटेज से वकीलों की पहचान कराने का आदेश दिया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

इंडिया टुडे के अनुसार हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने 27 अक्टूबर की घटना को लेकर मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को पत्र लिखा था। पत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि कोर्ट में एक वकील ने एक पुलिस अधीक्षक से सीट खाली करने को कहा था, यह कहते हुए कि वह सीट उनके लिए नहीं है। एक अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ने बीच में आकर वकील को फटकारा और कहा कि वह जज से शिकायत करेंगे।

पत्र के अनुसार जज के कोर्ट में आने पर उन्हें घटना बताई गई तो उन्होंने वकील को डांटा और जेल भेजने का आदेश दिया। वकील के माफी मांगने पर जज ने उसे पुलिस अधिकारी से माफी मांगने को कहा। एक अन्य वकील के बीच में आने पर जज ने कथित तौर पर उसका मजाक उड़ाया। एसोसिएशन ने कहा कि इससे वकील समुदाय की गरिमा प्रभावित हुई और जज के आचरण को अवमाननापूर्ण बताकर मुख्य न्यायाधीश से उचित कार्रवाई की मांग की। ये आरोप बार एसोसिएशन के पत्र के हैं, जज की ओर से इस पर कोई बयान रिपोर्टों में नहीं है।

बुधवार को क्या हुआ

इंडिया टुडे के मुताबिक जब जस्टिस भनोट अपने कोर्ट में आए, तो वकीलों ने विरोध किया और कुछ ने नारे लगाए। इसके बाद वकीलों के एक समूह ने मेज-कुर्सियां तोड़ीं। पीटीआई के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि कुर्सियां फेंकी गईं और अलमारियां गिराई गईं। बार एंड बेंच के अनुसार वकीलों ने कोर्ट रूम नंबर 49 में फर्नीचर और अन्य सामान तोड़ने का आरोप है।

जस्टिस देशवाल का आदेश

जस्टिस देशवाल उस समय जमानत का एक मामला (देवेंद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) सुन रहे थे, जब कॉरिडोर में नारेबाजी हुई। आदेश में कहा गया कि ऐसी घटना अदालती कार्यवाही में हस्तक्षेप है, क्योंकि गरीब वादी न्याय के लिए हाईकोर्ट आते हैं और कुछ वकीलों को किसी खास अदालत से समस्या हो, तो भी वे नारे लगाकर दूसरी अदालतों की कार्यवाही में बाधा नहीं डाल सकते। अदालत ने कहा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल अदालत को डराने जैसा है, जो “पूरी तरह अनुचित” है।

आदेश में रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को सीसीटीवी फुटेज देखकर नारेबाजी करने वाले वकीलों को पहचानने का निर्देश दिया गया। पहचान के बाद मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को अनुशासनात्मक कार्यवाही और अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए भेजा जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को है। इंडिया टुडे ने लिखा कि रजिस्ट्रार को 19 नवंबर तक रिपोर्ट देनी है और फुटेज कोर्ट नंबर 66 के बाहर लगे कैमरे का है, जबकि बार एंड बेंच ने इसे जस्टिस देशवाल के कोर्ट के बाहर के क्षेत्र का फुटेज बताया। दोनों रिपोर्टों में कोर्ट नंबर पर अंतर है, इसलिए इसे आदेश की प्रति से ही पक्का समझें।

आगे क्या

अब पहचान की रिपोर्ट और 19 नवंबर की सुनवाई अहम होगी। इसके बाद ही तय होगा कि किन वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक या अवमानना कार्यवाही होगी। जस्टिस भनोट के आचरण पर बार एसोसिएशन की शिकायत पर मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर क्या कदम उठता है, यह रिपोर्टों में अभी सामने नहीं आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या हुआ?

वकीलों ने जस्टिस अजय भनोट की अदालत में विरोध के दौरान तोड़फोड़ की और नारेबाजी की।

अदालत ने क्या आदेश दिया?

जस्टिस देशवाल ने सीसीटीवी से वकीलों की पहचान कराने और मामला बार काउंसिल को भेजने तथा अवमानना कार्यवाही पर विचार करने का निर्देश दिया।

अगली सुनवाई कब है?

19 नवंबर को।

नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। जज के आचरण पर आरोप बार एसोसिएशन के पत्र के हवाले से हैं और अभी साबित नहीं हुए हैं।

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