न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन में खेले जा रहे पांचवें और आखिरी टी20 इंटरनेशनल में भी 15 साल के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। सीरीज पहले ही भारत के नाम हो चुकी थी, इसलिए फैंस और कई पूर्व क्रिकेटर उम्मीद कर रहे थे कि इस “डेड रबर” मैच में युवा खिलाड़ी को मौका मिलेगा। लेकिन टॉस के बाद ब्रॉडकास्टर से बातचीत में टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने दो टूक कहा, “मेरा काम हर किसी को खुश करना नहीं है। मेरा काम सही फैसले लेना है, लोकप्रिय फैसले नहीं।”
गंभीर ने और क्या कहा
एनडीटीवी, मनीकंट्रोल और इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंभीर ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया और बाहर की चर्चाओं के बीच लोकप्रिय फैसला लेना बहुत आसान है, लेकिन उनके लिए जरूरी है कि सही फैसला लिया जाए और ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के बीच “सिक्योरिटी” यानी भरोसे का माहौल बना रहे। उन्होंने माना कि टीम के पास बहुत टैलेंट है, लेकिन जिन खिलाड़ियों ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है, वे “लॉन्गर रोप” यानी ज्यादा मौके के हकदार हैं।
सीरीज जीतने के बाद खिलाड़ियों को प्रेरित रखने के सवाल पर गंभीर ने कहा कि देश के लिए खेलते समय लापरवाही की कोई जगह नहीं होती। उनके मुताबिक, उनकी सोच में “डेड रबर” जैसा कुछ नहीं होता और हर मैच कुछ नया सीखने और बेहतर होने का मौका होता है।
सूर्यवंशी को सीरीज में कितने मौके मिले
वैभव सूर्यवंशी इस सीरीज में सिर्फ दो मैच खेल पाए। क्राइस्टचर्च में दूसरे टी20 में उन्हें नंबर 3 पर भेजा गया, जो उनके लिए नई भूमिका थी, और वे 8 गेंदों पर सिर्फ 4 रन बना सके। वेलिंगटन में तीसरे टी20 में वे फिर ओपनिंग पर लौटे और 19 गेंदों पर 45 रन की तूफानी पारी खेली। मनीकंट्रोल के अनुसार, उन्होंने अभिषेक शर्मा के साथ पहले विकेट के लिए सिर्फ 7 ओवर में 133 रन जोड़े थे। इसके बावजूद ईशान किशन की वापसी के बाद उन्हें ऑकलैंड में चौथे टी20 से बाहर रखा गया और हैमिल्टन में भी यही कहानी दोहराई गई।
पांचवें टी20 में टीम में क्या बदलाव हुए
एनडीटीवी के मुताबिक, भारत ने चौथे टी20 वाली टीम में दो बदलाव किए और दोनों गेंदबाजी में थे। अक्षर पटेल की जगह वरुण चक्रवर्ती और मयंक यादव की जगह भुवनेश्वर कुमार को शामिल किया गया। कप्तान श्रेयस अय्यर टॉस हार गए और भारत को पहले बल्लेबाजी करनी पड़ी। ओपनिंग जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ही रही, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में भारत की टी20 वर्ल्ड कप खिताब बचाने की मुहिम में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि इस मैच में दोनों जल्दी आउट हो गए। पीटीआई के अनुसार, ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के अर्धशतकों की मदद से भारत ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 191 रन बनाए।
क्यों छिड़ी है बहस
सूर्यवंशी को लेकर सोशल मीडिया पर लंबे समय से बहस चल रही है। एक पक्ष का कहना है कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी आक्रामक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी को लगातार मौके देने चाहिए, खासकर तब जब सीरीज का नतीजा तय हो चुका हो। पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी सवाल उठाया कि क्या युवा खिलाड़ी को तभी मौका मिलेगा जब कोई सीनियर चोटिल होगा। दूसरा पक्ष गंभीर की बात से सहमत है कि जो खिलाड़ी लंबे समय से अच्छा कर रहे हैं, उन्हें बार-बार बदलने से टीम का संतुलन और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बिगड़ सकता है।
गंभीर की सोच समझिए
गंभीर पहले भी कह चुके हैं कि सूर्यवंशी को नियमित मौके के लिए इंतजार करना होगा। उनकी कोचिंग का एक बड़ा पहलू यही रहा है कि टीम में चुने गए खिलाड़ियों को यह भरोसा हो कि एक-दो खराब पारियों के बाद उन्हें बाहर नहीं किया जाएगा। सैमसन और अभिषेक की जोड़ी ने पिछले कुछ समय में भारत को कई तेज शुरुआत दी हैं, इसलिए टीम मैनेजमेंट इस कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ नहीं करना चाहता।
फैंस के लिए इसका मतलब और आगे क्या
- सूर्यवंशी अभी 15 साल के हैं, इसलिए टीम मैनेजमेंट उन्हें धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ढालने की रणनीति पर चलता दिख रहा है।
- घरेलू क्रिकेट और IPL में उनका प्रदर्शन आगे भी चयन का बड़ा आधार रहेगा।
- ओपनिंग स्लॉट में जब तक सैमसन और अभिषेक फॉर्म में हैं, सूर्यवंशी के लिए नियमित जगह बनाना मुश्किल रहेगा, जब तक कोई चोट या रोटेशन की स्थिति न बने।
साफ है कि गंभीर अपने चयन फैसलों पर बाहरी दबाव को हावी नहीं होने देना चाहते। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अगली सीरीज में सूर्यवंशी को कितने मौके मिलते हैं।
स्रोत: एनडीटीवी स्पोर्ट्स, मनीकंट्रोल, इंडिया टुडे, न्यूज9 और पीटीआई की रिपोर्ट्स।

