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6 नवम्बर 2026, शुक्र

RBI के नए फॉरेक्स नियम: FERR रिज़र्व, रद्द कॉन्ट्रैक्ट पर रोक—रुपये की रक्षा में सख्ती

मुंबई स्थित भारतीय रिज़र्व बैंक का भवन

भारतीय रिज़र्व बैंक ने रुपये की अस्थिरता थामने के लिए 10 अक्टूबर 2026 को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव नियमों में सख्ती की है। नए सर्कुलरों में रद्द कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने पर रोक, बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र वाले सौदों की सीमा घटाना और नया फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व (FERR) शामिल हैं। बैंकों का आकलन है कि निकट अवधि में रुपये पर राहत मिल सकती है, लेकिन हेजिंग महँगी हो सकती है।

RBI ने क्या बदला?

अधिकृत डीलरों को हिदायत दी गई है कि रद्द किए गए रुपये से जुड़े फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक न कराएँ। परिपक्वता पर रोलओवर मौजूदा नियमों के अधीन जारी रह सकता है। बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र साबित किए डेरिवेटिव करने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है—यह सीमा डीलरों और मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों दोनों पर लागू है।

सबसे चर्चित कदम FERR है। अधिकृत डीलर को उन रुपये-लिंक्ड फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर—जिनका नॉशनल 2 मिलियन डॉलर से अधिक हो और जो चालू खाते के तहत विदेशी मुद्रा खरीद के हेज हों—नॉशनल के रुपये समकक्ष का 20 प्रतिशत नकद रिज़र्व RBI के पास रखना होगा।

तेल रिफाइनरों के लिए डॉलर विंडो

ब्लूमबर्ग/ईटी रिपोर्टों के अनुसार RBI ने सरकारी तेल रिफाइनरों के लिए डॉलर विंडो भी खोली है। ये कदम रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुँचने के बाद आए। शुक्रवार को मुद्रा लगभग 96.9650 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड लो से थोड़ा ऊपर बंद हुई थी। इस साल रुपये में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है।

बाजार पर असर: राहत और लागत दोनों

कोटक महिंद्रा बैंक का कहना है कि निकट अवधि में USD/INR सब-95 की ओर भी जा सकता है और फॉरवर्ड प्रीमियम नरम हो सकते हैं, क्योंकि तेल कंपनियों और आयातकों की हेजिंग सीमित हो सकती है। हेजिंग लागत में 1 से 1.6 प्रतिशत तक इजाफा संभव बताया गया है। IDFC FIRST बैंक करीब 1.5 प्रतिशत लागत वृद्धि और नजदीकी अवधि में रुपये-प्रीमियम दोनों में नरमी की बात करता है।

विश्लेषक साफ कहते हैं कि कच्चा तेल महँगा रहे और विदेशी पूँजी का आउटफ्लो जारी रहे तो राहत अस्थायी हो सकती है। डायस्पोरा डिपॉजिट कार्यक्रम से पहले करीब 133 अरब डॉलर जुटाए गए और सितंबर की शुरुआत में फॉरेक्स रिज़र्व लगभग 800 अरब डॉलर के आसपास रहे; इसके बाद चार हफ्तों में करीब 51 अरब डॉलर की निकासी का जिक्र रिपोर्टों में है।

लिक्विडिटी और ब्याज दर का संदर्भ

RBI अक्टूबर में 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की ओपन मार्केट सेल कर रहा है। CRR की दैनिक रखरखाव जरूरत 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत की गई। बुधवार की मौद्रिक नीति में रेपो दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाई गई और रुख कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर शिफ्ट हुआ। IDFC FIRST का अनुमान है कि कोर लिक्विडिटी सरप्लस मार्च 2027 तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ सकता है।

आयातकों और आम निवेशक के लिए मतलब

नियमित आयातकों के लिए मुद्रा जोखिम हेज करना महँगा या जटिल हो सकता है। शेयर बाजार में FII बिकवाली और DII खरीद का संतुलन पहले से चर्चा में है; मुद्रा स्थिर रहे तो सेंटीमेंट को सहारा मिल सकता है, लेकिन वैश्विक तेल और बॉन्ड यील्ड अभी भी दबाव बनाए रख सकते हैं। निवेशकों को आधिकारिक सर्कुलर और बैंक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए—अफवाहों पर ट्रेडिंग जोखिम भरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

FERR क्या है?

फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व—बैंकों को कुछ बड़े रुपये-लिंक्ड फॉरेक्स हेज कॉन्ट्रैक्ट्स पर नॉशनल के 20 प्रतिशत के बराबर नकद रिज़र्व RBI के पास रखना होगा।

क्या रद्द फॉरवर्ड दोबारा बुक हो सकते हैं?

RBI ने रद्द रुपये-लिंक्ड फॉरेक्स डेरिवेटिव को दोबारा बुक कराने पर रोक लगाई है; मैच्योरिटी पर रोलओवर अलग नियम से चल सकता है।

रुपया तुरंत मजबूत होगा?

कई बैंक निकट अवधि में राहत की उम्मीद रखते हैं, लेकिन तेल कीमतें और पूंजी प्रवाह मध्यम अवधि तय करेंगे।

ये नियम कब से?

अक्टूबर 10, 2026 के सर्कुलरों के तहत लागू; सटीक प्रभावी तिथि के लिए आधिकारिक RBI सर्कुलर देखें।

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