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7 नवम्बर 2026, शनि

कैंसर दवा कीमत नियंत्रण: नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर 30% मार्जिन कैप, सालाना ₹2,500 करोड़ बचत

भारत में कैंसर अस्पताल की इमारत—दवा कीमत नियंत्रण से जुड़े स्वास्थ्य केंद्र का दृश्य

केंद्र सरकार ने कैंसर के मरीजों की जेब बचाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं की सप्लाई चेन पर लगने वाले मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित करने की मंजूरी दे दी गई है। सरकारी अनुमान के मुताबिक इससे दवाओं के दाम 70% तक घट सकते हैं और मरीजों को सालाना करीब ₹2,500 करोड़ की राहत मिल सकती है।

कैंसर दवा कीमत नियंत्रण: क्या बदलेगा?

शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल जरूरी कैंसर दवाओं पर पहले से सरकारी सीलिंग प्राइस लागू है। नई व्यवस्था उन नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं तक सुरक्षा बढ़ाती है, जो उस सूची से बाहर थीं। अब खुदरा पहुंचने से पहले जो अतिरिक्त मार्जिन जुड़ता था, उस पर लगाम लगेगी।

DGHS के तहत विशेषज्ञ समिति दवाओं की अंतिम सूची तय करेगी। उसके बाद NPPA फैसला लेकर अधिसूचना जारी करेगा। यानी कीमतें तुरंत नहीं, बल्कि अधिसूचना के बाद बदलेंगी।

मार्जिन कितना ज्यादा था?

NPPA के बाजार आंकड़ों में नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर औसत मार्क-अप करीब 170% पाया गया। कुछ मामलों में यह 700% या उससे भी ऊपर चला गया। रिटेल फार्मेसी, अस्पताल फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दामों में बड़ा फर्क भी सामने आया।

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक समेत राज्यों के साथ मरीजों व सिविल सोसाइटी ने महंगी कीमतों पर आपत्ति जताई थी। खरीद मूल्य और MRP के बीच का गैप खास तौर पर चर्चा में रहा।

2019 वाला अनुभव और अब का विस्तार

फरवरी 2019 में NPPA ने Drugs (Prices Control) Order, 2013 के पैरा 19 के तहत 42 चुनिंदा नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाया था। तब MRP 91% तक घटे और 526 ब्रांड्स पर सालाना करीब ₹984 करोड़ की बचत बताई गई। उसी रास्ते पर अब कवरेज बढ़ाया जा रहा है।

भारत में कैंसर की घटना दर करीब 60 प्रति लाख आबादी बताई जाती है। इलाज का खर्च परिवारों पर भारी पड़ता है, इसलिए आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च घटाना नीति का केंद्र है।

उत्पादन बनाए रखना जरूरी

सरकार ने साफ किया है कि नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखना होगा। नियम ब्रांडेड और जेनेरिक, घरेलू और आयातित, पेटेंटेड और नॉन-पेटेंटेड—सभी श्रेणियों पर लागू होने वाला है। मकसद सिर्फ कीमत घटाना नहीं, बल्कि उपलब्धता भी कायम रखना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सूची और अधिसूचना के बाद ही मरीजों को असल फायदा दिखेगा। फार्मा कंपनियों व वितरकों को नई मार्जिन सीमा के हिसाब से MRP दोबारा तय करने होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सभी कैंसर दवाएं सस्ती हो जाएंगी?

नहीं। फिलहाल मंजूरी नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर 30% मार्जिन कैप के लिए है। DGHS समिति सूची तय करेगी और NPPA अधिसूचना जारी करेगा। शेड्यूल्ड दवाओं पर पहले से सीलिंग प्राइस है।

मरीजों को कितनी बचत का अनुमान है?

सरकारी अनुमान के अनुसार कीमतें 70% तक घट सकती हैं और सालाना बचत करीब ₹2,500 करोड़ हो सकती है। 2019 के सीमित हस्तक्षेप में ₹984 करोड़ की सालाना बचत बताई गई थी।

दवाओं की कमी तो नहीं हो जाएगी?

निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने को कहा गया है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता बनी रहे।

कब से नए दाम लागू होंगे?

सूची अंतिम होने और NPPA की अधिसूचना जारी होने के बाद। सिर्फ मंजूरी की घोषणा से दाम तुरंत नहीं बदलते।

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