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6 नवम्बर 2026, शुक्र

लोक आस्था का महापर्व छठ इस साल 13 नवंबर 2026 से शुरू होकर 16 नवंबर को समाप्त होगा। Drik Panchang और SanatanBodh की गणना के मुताबिक नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर को है, खरना शनिवार, 14 नवंबर को, संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर को और उषा अर्घ्य व पारण सोमवार, 16 नवंबर को होगा। यहां चारों दिन की तारीख, दिल्ली और पटना के अर्घ्य के समय और व्रत की परंपराएं एक जगह दी जा रही हैं।

छठ पूजा 2026: चार दिन का कार्यक्रम

  • पहला दिन, नहाय-खाय (13 नवंबर, शुक्रवार): व्रती नदी, तालाब या घर में स्नान करके घर की सफाई करते हैं और एक सात्विक भोजन लेते हैं।
  • दूसरा दिन, खरना या लोहंडा (14 नवंबर, शनिवार): दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजा होती है और गुड़ की खीर व रोटी का प्रसाद खाया जाता है।
  • तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य (15 नवंबर, रविवार): डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
  • चौथा दिन, उषा अर्घ्य और पारण (16 नवंबर, सोमवार): उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।

अर्घ्य का समय: दिल्ली और पटना

SanatanBodh की तालिका के अनुसार नई दिल्ली में 13 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:42 बजे होगा। 14 नवंबर को खरना के दिन सूर्यास्त शाम 5:28 बजे है। 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य के लिए नई दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:28 बजे और पटना में 5:01 बजे है। 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के लिए नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:44 बजे और पटना में 6:07 बजे है। Drik Panchang के दिल्ली के आंकड़े भी यही हैं।

अन्य शहरों में शाम के अर्घ्य का समय कुछ इस तरह बताया गया है: लखनऊ 5:16 बजे, वाराणसी 5:10 बजे, रांची 5:04 बजे, कोलकाता 4:53 बजे, मुंबई 6:00 बजे और बेंगलुरु 5:50 बजे। पंचांगों में एक-दो मिनट का फर्क सामान्य है, इसलिए घाट पर थोड़ा पहले पहुंचना बेहतर होता है।

15 नवंबर या 16 नवंबर: संध्या अर्घ्य कब?

अक्सर तारीख को लेकर उलझन रहती है। SanatanBodh के अनुसार शाम का अर्घ्य उस दिन दिया जाता है जिस दिन सूर्यास्त के समय षष्ठी तिथि हो। षष्ठी तिथि 14 नवंबर को रात 11:25 बजे से 16 नवंबर को रात 2:02 बजे तक है। इसलिए 15 नवंबर के सूर्यास्त के समय षष्ठी है और उसी दिन संध्या अर्घ्य होगा। 16 नवंबर की सुबह उषा अर्घ्य और पारण का दिन है।

छठ व्रत की मान्यताएं और परंपराएं

Drik Panchang के अनुसार छठ पूजा सूर्य देव को समर्पित है और यह मुख्य रूप से बिहार और पड़ोसी नेपाल में मनाया जाता है। खरना के बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि यह साल का इकलौता मौका है जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस पर्व को प्रतिहार, डाला छठ, छठी और सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। छठ में सूर्य के साथ छठी मैया की पूजा होती है, जिन्हें लोक मान्यता में षष्ठी देवी माना गया है।

परंपरा के अनुसार प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है और उसमें प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता। पूजा में बांस के सूप और दौरा का प्रयोग होता है, ठेकुआ मुख्य प्रसाद है और गन्ना, नारियल, केला व मौसमी फल सूप में सजाए जाते हैं। पारिवारिक परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।

स्वास्थ्य का ध्यान

निर्जला व्रत लंबा होता है। गर्भवती महिलाएं, बीमार लोग या नियमित दवा लेने वाले व्रती अपने स्वास्थ्य के हिसाब से डॉक्टर की सलाह लेकर फैसला करें। घाट पर भीड़ और गहरे पानी में उतरते समय सावधानी रखें।

बैंक और दफ्तर

RBI की सूची के अनुसार 16 नवंबर 2026 को छठ पूजा (प्रातः अर्घ्य) के कारण बिहार और झारखंड में बैंक बंद रहेंगे। अन्य राज्यों में छुट्टी की सूची अलग है, इसलिए अपने राज्य के सरकारी आदेश देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

छठ पूजा 2026 कब से कब तक है?

13 नवंबर (नहाय-खाय) से 16 नवंबर (उषा अर्घ्य और पारण) तक।

पटना में संध्या अर्घ्य का समय क्या है?

15 नवंबर को पटना में सूर्यास्त शाम करीब 5:01 बजे है, इसलिए अर्घ्य इससे पहले दिया जाता है।

उषा अर्घ्य कब दिया जाएगा?

16 नवंबर, सोमवार की सुबह। पटना में सूर्योदय करीब 6:07 बजे और नई दिल्ली में 6:44 बजे है।

खरना किस दिन है?

खरना शनिवार, 14 नवंबर को है। इसी शाम प्रसाद के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है।

नोट: समय पंचांग की गणना पर आधारित हैं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार थोड़े अलग हो सकते हैं।

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