छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक का सबसे बड़ा दावा कर दिया है। एजेंसी का आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय शराब सिंडिकेट से जुटाई गई करीब 860 से 880 करोड़ रुपये की नकदी रायपुर में कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी।
ED ने सोमवार, 12 अक्टूबर को जारी बयान में यह दावा किया। PTI के हवाले से Daily Excelsior, Rediff और Amar Ujala ने इसे रिपोर्ट किया है। ध्यान रहे, ये सभी ED के आरोप हैं, जिन पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल पर नया आरोपपत्र
ED के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ 9 अक्टूबर को विशेष PMLA अदालत में नया पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसके अगले दिन, 10 अक्टूबर को रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब इलाके में उनके दो फ्लैट अस्थायी रूप से अटैच किए गए, जिनकी कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है।
अग्रवाल को ED ने अगस्त में इस मामले में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पिछले हफ्ते एजेंसी ने उन्हें राज्य के कथित चावल मिलिंग घोटाले से जुड़े एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी गिरफ्तार किया।
नकदी कैसे पहुंची? ED का दावा
एजेंसी का आरोप है कि सिंडिकेट की नकदी का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। अग्रवाल के निर्देश पर यह रकम शंकर नगर स्थित राजीव भवन पहुंचाई जाती थी, जहां अग्रवाल के अधीन काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना इसे लेते थे। ED का कहना है कि करीब 72 करोड़ रुपये अग्रवाल के नियंत्रण में रहे।
ED के अनुसार सिंडिकेट के उस समय के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान इस पूरे तंत्र की पुष्टि करते हैं। खबर लिखे जाने तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस या अग्रवाल के वकीलों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
2,883 करोड़ का घोटाला, अब तक 9 गिरफ्तार
ED का आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच एक सिंडिकेट ने आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (CSMCL) पर नियंत्रण कर 2,883 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की। तरीके कई बताए गए हैं:
- देसी शराब की सप्लाई पर अवैध कमीशन
- डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बेहिसाब शराब की बिक्री
- डिस्टिलर्स से सालाना कमीशन
- विदेशी शराब के लिए FL-10A लाइसेंस व्यवस्था का इस्तेमाल
इस केस में ED अब तक सात आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और CSMCL के पूर्व MD अरुण पति त्रिपाठी शामिल हैं। करीब 610 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच हो चुकी हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा
यह सियासी खबर से ज्यादा जनता के पैसे की खबर है। शराब की बिक्री से मिलने वाला आबकारी राजस्व किसी भी राज्य की कमाई का बड़ा जरिया होता है। ED के आरोप सही साबित होते हैं तो इसका मतलब होगा कि जो पैसा सरकारी खजाने में जाकर सड़क, स्कूल और अस्पताल पर खर्च होना था, वह निजी जेबों में गया।
डुप्लीकेट होलोग्राम वाला आरोप उपभोक्ताओं के लिए भी चेतावनी है। होलोग्राम इसीलिए लगाया जाता है ताकि टैक्स चुकाए गए असली माल की पहचान हो सके। बिना हिसाब का माल बिकने से राजस्व के साथ गुणवत्ता की निगरानी भी कमजोर होती है।
कानूनी नजरिए से समझें तो पूरक आरोपपत्र का मतलब है कि जांच एजेंसी नए सबूत या नए आरोपी के साथ अदालत गई है। अस्थायी कुर्की की पुष्टि PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) से होती है, और आरोपी इसे चुनौती दे सकते हैं। दोष तभी तय होगा जब अदालत ट्रायल के बाद फैसला सुनाएगी।
आगे क्या
ED ने कहा है कि अपराध की कमाई के बाकी लाभार्थियों की पहचान के लिए जांच जारी है। आरोप सीधे पार्टी दफ्तर तक पहुंचने से मामला और गरमा सकता है। कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अदालत में अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ED ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में क्या नया दावा किया है?
ED का दावा है कि घोटाले की करीब 860-880 करोड़ रुपये की नकदी रायपुर स्थित कांग्रेस दफ्तर राजीव भवन पहुंचाई गई। यह एजेंसी का आरोप है, अदालत का फैसला नहीं।
रामगोपाल अग्रवाल कौन हैं?
वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष हैं। ED ने 9 अक्टूबर को उनके खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया और उनके दो फ्लैट अटैच किए।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए?
ED के मुताबिक अब तक नौ लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें चैतन्य बघेल, कवासी लखमा और अनिल टुटेजा शामिल हैं।
कुल घोटाला कितने का बताया गया है?
ED के अनुसार 2019 से 2023 के बीच 2,883 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई हुई।

