अहमदाबाद में होने वाले 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में पहली बार केंद्र सरकार की आर्थिक मदद का आंकड़ा सामने आया है। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने गुजरात सरकार को इन खेलों के आयोजन के लिए ₹2,000 करोड़ की ग्रांट-इन-एड देने की प्रतिबद्धता जताई है। समाचार एजेंसी PTI की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम 2025 की कीमतों पर तय है, और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी खुदरा महंगाई के हिसाब से जोड़ने पर 2030 तक इसके करीब ₹2,500 करोड़ होने का अनुमान है।
यह प्रावधान खेल मंत्रालय की राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता योजना (Assistance to National Sports Federations, ANSF) के संशोधित नियमों में दर्ज है। इसी योजना की नई गाइडलाइंस में ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर, नेशनल गेम्स और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने के लिए ज्यादा मदद जैसे कई नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं। आइए समझते हैं कि यह फैसला क्या है, पैसा कहां से आएगा और खिलाड़ियों व आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है।
फैसला क्या है: ₹2,000 करोड़ की ग्रांट, शर्तों के साथ
PTI के मुताबिक खेल मंत्रालय ने संशोधित ANSF नियमों में लिखा है कि गुजरात सरकार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के आयोजन के लिए दी जाने वाली ग्रांट की ऊपरी सीमा ₹2,000 करोड़ (2025 की कीमतों पर) होगी। 2030 में CPI के हिसाब से समायोजित करने पर यह करीब ₹2,500 करोड़ होने की उम्मीद है। इस रकम का भुगतान ANSF योजना से ही किया जाएगा। मंत्रालय के शब्दों में, पैसा “as and when” यानी जब-जब गुजरात सरकार की ओर से ज़रूरत बताई जाएगी, तब जारी होगा।
तीन बातें यहां साफ समझनी ज़रूरी हैं:
- यह ऊपरी सीमा है, एकमुश्त भुगतान नहीं। पैसा किस्तों में, मांग के आधार पर जारी होगा।
- यह खेलों का कुल बजट नहीं है। यह केवल केंद्रीय खेल मंत्रालय की ग्रांट है। आयोजन की कुल लागत, गुजरात सरकार का अपना हिस्सा या इंफ्रास्ट्रक्चर पर अलग खर्च, इनका आधिकारिक आंकड़ा इस घोषणा में नहीं दिया गया है।
- ₹2,500 करोड़ एक अनुमान है। मंत्रालय ने इसके लिए “expected” (अनुमानित) शब्द इस्तेमाल किया है, क्योंकि असली रकम आने वाले वर्षों की महंगाई दर पर निर्भर करेगी।
हिसाब समझिए: महंगाई और योजना के बजट में हिस्सेदारी
₹2,000 करोड़ को 2030 में ₹2,500 करोड़ मानने का मतलब है पांच साल में कुल करीब 25% बढ़ोतरी। हमारे हिसाब से यह औसतन लगभग 4.6% सालाना महंगाई दर के बराबर बैठता है। अगर असल महंगाई इससे कम या ज्यादा रही, तो 2030 वाली रकम भी उसी हिसाब से बदलेगी।
दूसरा अहम आंकड़ा ANSF योजना का कुल बजट है। सरकार ने इस योजना को 2026-27 से 2030-31 तक (16वें वित्त आयोग का चक्र) जारी रखने की मंज़ूरी दी है, जिसका कुल परिव्यय ₹7,386.74 करोड़ है। यानी कॉमनवेल्थ गेम्स की ग्रांट (₹2,000 से ₹2,500 करोड़) इस पूरी पांच साल की योजना के लगभग 27% से 34% के बराबर है। यह हमारी गणना है। इससे दिखता है कि आने वाले वर्षों में खेल महासंघों को मिलने वाले पैसे का बड़ा हिस्सा एक ही आयोजन से जुड़ा रहेगा। इसीलिए यह देखना अहम होगा कि बाकी खेलों और खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए बजट कैसे संतुलित किया जाता है।
ANSF योजना क्या है और नई गाइडलाइंस में क्या जुड़ा
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 16 अक्टूबर की रिलीज़ के मुताबिक ANSF योजना ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, पैरालंपिक और विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में भारतीय खिलाड़ियों की मदद का “मुख्य तंत्र” है। इसके तहत राष्ट्रीय कोचिंग कैंप, एकेडमी में ट्रेनिंग, खिलाड़ियों के रहने-खाने, किट, बीमा, स्पोर्ट्स साइंस, विदेशी कोच, हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर, फिज़ियो-डॉक्टर, विदेश में ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं, और सीनियर-जूनियर-सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप का खर्च दिया जाता है।
मंत्रालय की जारी संचालन गाइडलाइंस में ये नए या बढ़े हुए प्रावधान शामिल हैं:
- अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने के लिए ₹50 करोड़ तक: अब किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) को भारत में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता कराने के लिए आयोजन के महत्व, भाग लेने वाले देशों और खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर ₹50 करोड़ तक की मदद मिल सकती है। प्रस्तावों की जांच खेल सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।
- ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर (OTC): एक-एक खेल को समर्पित, आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस उपकरणों वाले सेंटर बनाने की योजना है, ताकि खिलाड़ियों की विदेश में ट्रेनिंग पर निर्भरता कम हो। इन सेंटरों में ट्रेनिंग करने वाले एलीट खिलाड़ियों के कोच, तकनीकी स्टाफ, स्पोर्ट्स साइंस और उपकरणों का खर्च योजना से मिलेगा।
- नेशनल गेम्स के लिए ₹50 करोड़ तक: खेल उपकरण, टाइमिंग-स्कोरिंग-रिज़ल्ट (TSR) सेवाओं, तकनीकी अधिकारियों के मानदेय और तकनीकी संचालन के लिए।
- देसी खेलों की वैश्विक पहुंच: स्वदेशी खेलों को ओलंपिक, एशियन गेम्स या कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रदर्शन खेल (demonstration event) के रूप में शामिल कराने और दूसरे देशों में उनके महासंघ बनवाने की कोशिशों के लिए मदद।
- ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग: भारत के हाई परफॉर्मेंस सेंटरों में दूसरे विकासशील देशों के खिलाड़ियों-कोचों को स्कॉलरशिप और रियायती सुविधा देने का प्रावधान।
- BRICS, BIMSTEC जैसे मंचों के खेल आयोजन: ऐसे बहुपक्षीय समूहों के लिए प्रतियोगिताएं, सम्मेलन, शोध और वर्कशॉप कराने के लिए आर्थिक मदद।
- भारत में दफ्तर वाले अंतरराष्ट्रीय खेल निकाय: मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय या महाद्वीपीय खेल संस्थाओं को केस-दर-केस मदद।
PIB ने खुद कहा है कि ये नए हिस्से 2036 ओलंपिक बोली और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारी को ध्यान में रखकर जोड़े गए हैं। अहमदाबाद की 2036 ओलंपिक दावेदारी पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।
पृष्ठभूमि: अहमदाबाद को कैसे मिली मेज़बानी
केंद्रीय कैबिनेट ने 27 अगस्त 2025 को कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की बोली लगाने का प्रस्ताव मंज़ूर किया था। उसी समय यह भी तय हुआ था कि बोली स्वीकार होने पर होस्ट कोलैबोरेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे, ज़रूरी सरकारी गारंटियां दी जाएंगी और गुजरात सरकार को ज़रूरी ग्रांट-इन-एड दी जाएगी। अब उसी ग्रांट की रकम ANSF नियमों में तय हुई है।
इसके बाद 26 नवंबर 2025 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ स्पोर्ट की जनरल असेंबली में 74 सदस्य देशों और क्षेत्रों ने सर्वसम्मति से अहमदाबाद (आधिकारिक नाम “अमदावाद 2030”) को मेज़बान चुना। दौड़ में नाइजीरिया की राजधानी अबुजा भी थी। 2030 के खेल “सेंटेनरी” यानी शताब्दी संस्करण होंगे, क्योंकि पहले खेल 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में हुए थे। भारत इससे पहले 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी कर चुका है।
कैबिनेट की 2025 की रिलीज़ में बताया गया था कि खेलों में 72 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, और अहमदाबाद की खूबियों में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम, नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम लिया गया था, जहां 2023 वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल हुआ था।
ग्लासगो 2026 से कितना अलग होगा अहमदाबाद 2030
PTI के मुताबिक इस साल ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स पैसों की कमी के कारण काफी छोटे रखे गए थे। उनमें सिर्फ 10 खेल थे और हॉकी, कुश्ती और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल बाहर रहे। भारत के लिए इसे बड़ा झटका माना गया, क्योंकि हॉकी और कुश्ती जैसे खेलों में भारत पारंपरिक रूप से मज़बूत रहा है।
अहमदाबाद में तस्वीर बदलने की उम्मीद है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक 2030 के खेलों में 15 से 17 खेल होंगे। एथलेटिक्स, तैराकी, टेबल टेनिस, बाउल्स, वेटलिफ्टिंग (पैरा वर्ज़न के साथ), आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक, नेटबॉल और बॉक्सिंग कोर खेलों में हैं। बाकी खेलों के लिए जिनके नाम विचार में हैं, उनमें तीरंदाज़ी, बैडमिंटन, क्रिकेट T20, हॉकी, जूडो, शूटिंग, स्क्वैश और कुश्ती शामिल हैं। मेज़बान देश दो नए या पारंपरिक खेल भी प्रस्तावित कर सकता है। अंतिम सूची अभी आधिकारिक रूप से तय होनी है।
खिलाड़ियों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
- खिलाड़ियों के लिए: अगर कुश्ती, शूटिंग, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेल अंतिम सूची में आते हैं, तो भारतीय खिलाड़ियों के पास घरेलू मैदान पर ज्यादा पदक जीतने का मौका होगा। साथ ही ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर और विदेशी कोच-स्पोर्ट्स साइंस की मदद से 2030 और 2036 की तैयारी को रफ्तार मिल सकती है।
- गुजरात और अहमदाबाद के लिए: कैबिनेट की 2025 की रिलीज़ में खेलों से रोज़गार, पर्यटन और इवेंट मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स, ब्रॉडकास्ट, IT जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़ने की बात कही गई थी।
- टैक्सपेयर्स के लिए: यह जनता का पैसा है, इसलिए पारदर्शिता अहम होगी। 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर लागत बढ़ने और गड़बड़ियों के आरोपों पर लंबी बहस हुई थी। अहमदाबाद के मामले में ग्रांट “मांग पर” जारी होने और ऊपरी सीमा तय होने से खर्च पर नज़र रखना आसान हो सकता है। हालांकि कुल बजट सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
- दूसरे खेलों के लिए: ANSF बजट का बड़ा हिस्सा CWG ग्रांट में जाने के बाद बाकी खेल महासंघों की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के लिए कितना पैसा बचता है, इस पर खेल जगत की नज़र रहेगी। हाल में एशियाई पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर हमारी रिपोर्ट यहां है।
आगे क्या
अगले कदमों में तीन बातें अहम होंगी: पहली, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट और आयोजकों की ओर से 2030 के खेलों की अंतिम सूची। दूसरी, गुजरात सरकार की ओर से आयोजन का कुल बजट और वेन्यू प्लान। तीसरी, ANSF के तहत ग्रांट की पहली किस्त कब और कितनी जारी होती है। खेल मंत्रालय ने संशोधित योजना की पूरी गाइडलाइंस अपनी वेबसाइट sports.yas.gov.in पर जारी की हैं। नई आधिकारिक जानकारी आने पर हम इस खबर को अपडेट करेंगे।
स्रोत: PIB (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय) की 16 अक्टूबर 2026 की प्रेस रिलीज़; PTI की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट (News18 और Sportstar पर प्रकाशित); केंद्रीय कैबिनेट का 27 अगस्त 2025 का फैसला (pmindia.gov.in); कॉमनवेल्थ स्पोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट; Reuters (26 नवंबर 2025)।

