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8 नवम्बर 2026, रवि

चक्रवात ‘मुरासु’ गंभीर तूफान बनकर 3 नवंबर को आंध्र तट से टकराएगा: नेल्लोर-नरसापुर के बीच लैंडफॉल, 120 किमी/घंटा तक हवा

नेल्लोर जिले का मायपाडु बीच और बंगाल की खाड़ी, जहां चक्रवात मुरासु के लैंडफॉल का अनुमान है

बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम तेजी से ताकतवर हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रविवार (1 नवंबर 2026) सुबह के बुलेटिन के मुताबिक दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन अब ‘डीप डिप्रेशन’ यानी गहरे दबाव क्षेत्र में बदल चुका है और अगले कुछ घंटों में यह चक्रवाती तूफान बन सकता है। तूफान बनते ही इसका नाम ‘मुरासु’ (Murasu) होगा। IMD का अनुमान है कि यह 3 नवंबर की सुबह तक दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को नेल्लोर और नरसापुर के बीच ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ (Severe Cyclonic Storm) के रूप में पार कर सकता है। आंध्र प्रदेश तट के लिए प्री-साइक्लोन वॉच (येलो मैसेज) जारी किया गया है।

अभी कहां है सिस्टम?

IMD के अनुसार डिप्रेशन पिछले 6 घंटों में करीब 23 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा और गहरे दबाव में बदल गया। रविवार सुबह 5:30 बजे (IST) यह लगभग 11.5° उत्तरी अक्षांश और 86.4° पूर्वी देशांतर के पास था। दूरी के हिसाब से देखें तो यह चेन्नई से करीब 700 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से करीब 770 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, मछलीपट्टनम से करीब 770 किमी दक्षिण-पूर्व और ओंगोल से करीब 810 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था।

कब और कितना ताकतवर होगा तूफान?

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ता रहेगा। मौसम विभाग के अनुमानित चार्ट के अनुसार:

  • 1 नवंबर: दिन में ही चक्रवाती तूफान बनने की संभावना, हवा की रफ्तार 65-75 किमी/घंटा, झोंके 85 किमी/घंटा तक।
  • 2 नवंबर: पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ बनने का अनुमान, हवा 90-100 किमी/घंटा, झोंके 110 किमी/घंटा तक।
  • 3 नवंबर सुबह: नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट पार करने की संभावना, उस समय हवा 100-110 किमी/घंटा और झोंके 120 किमी/घंटा तक।
  • 3-4 नवंबर: जमीन पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कमजोर होकर 4 नवंबर तक डिप्रेशन में बदलने का अनुमान।

गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में IMD महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा था कि फिलहाल चक्रवाती तूफान का अनुमान है और गंभीर तूफान बनने की “थोड़ी संभावना” है। रविवार के बुलेटिन में अब साफ तौर पर गंभीर चक्रवाती तूफान का पूर्वानुमान दिया गया है, यानी सिस्टम उम्मीद से ज्यादा ताकत पकड़ रहा है।

‘मुरासु’ नाम का मतलब क्या है?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार IMD महानिदेशक ने बताया था कि ‘मुरासु’ तमिल शब्द है, जिसका अर्थ ‘ढोल’ (ड्रम) होता है। उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले तूफानों के नाम पहले से तय सूची से बारी-बारी रखे जाते हैं। यह सूची भारत समेत इस क्षेत्र के देशों के सुझाए नामों से बनती है।

अर्नब के बाद दूसरा झटका

आंध्र प्रदेश अभी कुछ दिन पहले आए गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से पूरी तरह उबरा भी नहीं है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को पश्चिम गोदावरी जिले के नरसापुरम और मोगलतुर जैसे प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया था और कहा था कि सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। अब नया तूफान राज्य के दक्षिणी तट की ओर बढ़ रहा है, इसलिए राहत कार्यों के बीच ही प्रशासन को नई तैयारी करनी पड़ रही है। नरसापुर इस बार के संभावित लैंडफॉल जोन के उत्तरी छोर पर है।

बारिश का अलर्ट

IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश में 1 नवंबर को भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है, जबकि 2 और 3 नवंबर को कुछ जगहों पर बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई है। तूफान के रास्ते के आसपास के दक्षिणी तटीय जिलों, खासकर नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा और गोदावरी क्षेत्र पर नजर रखने की जरूरत है। लैंडफॉल के बाद सिस्टम उत्तर की ओर बढ़ते हुए कमजोर होगा, इसलिए तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी बादल और बारिश का असर दिख सकता है; इसके लिए IMD के अगले बुलेटिन पर नजर रखें।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

  • तटीय इलाकों में रहने वाले लोग: जिला प्रशासन की ओर से जारी निकासी या शेल्टर से जुड़ी सूचना का पालन करें। कच्चे मकानों और निचले इलाकों में रहने वालों को सबसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
  • मछुआरे: ऐसे सिस्टम के दौरान समुद्र में हालात बहुत खराब हो जाते हैं। IMD और राज्य मत्स्य विभाग की सलाह के बिना समुद्र में न जाएं, और जो नावें बाहर हैं, वे तट पर लौट आएं।
  • यात्री: 2-3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के तटीय रूट पर ट्रेन या फ्लाइट से यात्रा करने वाले लोग निकलने से पहले रेलवे और एयरलाइंस से अपडेट जरूर लें।
  • किसान: कटाई के लिए तैयार फसल हो तो उसे सुरक्षित जगह रखने और खेतों से पानी निकासी का इंतजाम पहले से करने की कोशिश करें।

आगे क्या?

IMD हर कुछ घंटों में तूफान का ट्रैक और ताकत अपडेट करता है। लैंडफॉल की सटीक जगह और समय में अगले 24-36 घंटों में बदलाव संभव है। इसलिए किसी भी फैसले के लिए IMD की वेबसाइट (mausam.imd.gov.in), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचना को ही आधार बनाएं और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारी से बचें। TrendFlash इस खबर पर नजर बनाए हुए है।

स्रोत: IMD (RSMC नई दिल्ली) बुलेटिन, 1 नवंबर 2026; हिंदुस्तान टाइम्स।

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