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7 नवम्बर 2026, शनि

GST में 1 नवंबर से बड़े बदलाव: ई-कॉमर्स विक्रेताओं का आसान रजिस्ट्रेशन, ऑटोमैटिक रिफंड; जानिए कारोबारियों पर क्या असर

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जीएसटी काउंसिल बैठक के बाद नेशनल मीडिया सेंटर में मीडिया को जानकारी देती हुईं, फाइल फोटो

नई दिल्ली: जीएसटी (GST) से जुड़े कारोबारियों, खासकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए 1 नवंबर 2026 से कई बड़े बदलाव शुरू होने जा रहे हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के मेंबर (GST) संजय मंगल ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को अहमदाबाद में मीडिया से बातचीत में बताया कि 57वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में मंजूर हुए प्रक्रिया सुधार चरणों में लागू होंगे। जिन बदलावों के लिए कानून में संशोधन की जरूरत नहीं है, वे तय तौर पर 1 नवंबर 2026 से शुरू होंगे, जबकि कानून संशोधन वाले फैसलों के लिए 1 अप्रैल 2027 का लक्ष्य रखा गया है।

इकोनॉमिक टाइम्स और हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया है कि इन प्रक्रिया सुधारों से जुड़े नोटिफिकेशन और सर्कुलर को विधि विभाग की मंजूरी मिल चुकी है और ये शुक्रवार को जारी हो सकते हैं। यानी आधिकारिक अधिसूचना आने के बाद ही हर बदलाव की अंतिम शर्तें साफ होंगी।

पृष्ठभूमि: 57वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में क्या हुआ था?

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई थी। इस बैठक का फोकस टैक्स की दरें बदलने पर नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को आसान बनाने पर था। संजय मंगल के मुताबिक, इस बैठक में जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और दरों से जुड़े मुद्दे आगे की किसी बैठक में अलग से उठाए जाएंगे, जिसकी तारीख अभी तय नहीं है। इससे पहले सितंबर 2025 की बैठक में करीब 400 वस्तुओं की दरों को तर्कसंगत बनाया गया था।

1 नवंबर से कौन-से बदलाव लागू होने की संभावना है?

1. ई-कॉमर्स के छोटे विक्रेताओं के लिए आसान रजिस्ट्रेशन

अभी अगर कोई छोटा विक्रेता Amazon या Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कई राज्यों में माल रखकर बेचता है, तो उसे हर राज्य में अलग रजिस्ट्रेशन और वहां कारोबार का मुख्य स्थान (Principal Place of Business) दिखाने में दिक्कत आती है। नए नियम के तहत ऐसे विक्रेता, जिनकी उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भौतिक मौजूदगी नहीं है, ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना मुख्य कारोबारी स्थान घोषित कर सकेंगे। इसके लिए तय शर्तें होंगी, जिनमें हर महीने अधिकतम 2.5 लाख रुपये तक का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) आगे पास करने की सीमा शामिल है।

विक्रेता को कम से कम एक राज्य में असली मौजूदगी दिखानी होगी, जहां भौतिक सत्यापन और आधार ऑथेंटिकेशन होगा। इसके बाद बाकी राज्यों में रजिस्ट्रेशन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सहमति से, टैक्स अधिकारी की अलग भूमिका के बिना मिल सकेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इससे करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को फायदा हो सकता है।

2. रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज एक जगह साफ

सरकार एक विस्तृत सर्कुलर जारी करेगी, जिसमें बताया जाएगा कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज और जानकारी देनी है। रजिस्ट्रेशन फॉर्म GST REG-01 में तय दस्तावेज चुनने के लिए ड्रॉप-डाउन विकल्प होंगे और पोर्टल पर आसान नेविगेशन व टूल-टिप्स मिलेंगे। मकसद यह है कि अधूरी जानकारी की वजह से आवेदन बार-बार रिजेक्ट न हों और अधिकारी अनावश्यक सवाल न उठाएं।

3. तेज और ऑटोमैटिक रिफंड

इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में पड़ी अतिरिक्त रकम का पूरा रिफंड सिस्टम खुद मंजूर करेगा, इसमें अधिकारी का दखल नहीं होगा। रिफंड आवेदन पर पावती या कमी का मेमो (deficiency memo) जारी करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन की जाएगी। जीरो-रेटेड सप्लाई (जैसे निर्यात) और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले रिफंड दावों में 90% रकम सिस्टम के जोखिम मूल्यांकन के आधार पर अपने-आप अस्थायी तौर पर मंजूर होगी। संजय मंगल ने साफ किया कि ऑटोमैटिक रिफंड नए दावों पर लागू होगा, पहले से लंबित पुराने दावों पर नहीं। PIB के FAQ के मुताबिक, इनपुट सर्विसेज पर लिए गए ITC का रिफंड 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर मिलेगा, जबकि कैपिटल गुड्स के ITC के लिए यह तारीख 1 अप्रैल 2027 है।

1 अप्रैल 2027 से क्या बदलेगा?

जिन फैसलों के लिए केंद्रीय और राज्य जीएसटी कानूनों में संशोधन चाहिए, उन्हें 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य है। इनमें गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव (काउंसिल ने कानून से गिरफ्तारी के प्रावधान हटाने का फैसला किया है), अभियोजन की सीमाओं को तर्कसंगत बनाना, ई-वे बिल प्रावधानों में बदलाव और कारण बताओ नोटिस (show cause notice) जारी करने के लिए कम से कम 10,000 रुपये की सीमा शामिल है। मंगल ने यह भी कहा कि जो गिरफ्तारियां पहले हो चुकी हैं, उन पर इन बदलावों का असर नहीं पड़ेगा।

छोटे कारोबारियों के लिए काउंसिल ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है कि 5 करोड़ रुपये से कम सालाना टर्नओवर वाले केवल B2C (सीधे ग्राहक को) सप्लाई करने वाले कारोबारी सालाना रिटर्न भर सकें और टैक्स तिमाही आधार पर जमा करें। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले कारोबारियों पर लेट फीस नहीं लगेगी, अगर वे उसी महीने के भीतर रिटर्न भर दें जिसमें वह देय था।

फर्जी बिल और फर्जी ITC पर नई सख्ती

CBIC का कहना है कि अब फोकस गड़बड़ी होने के बाद कार्रवाई की बजाय उसे शुरू में ही रोकने पर है। रिटर्न फाइलिंग व्यवस्था बदली जाएगी ताकि सप्लायर ने जो टैक्स देय बताया है और जिसे खरीदार ITC के रूप में ले रहा है, उसका भुगतान अनिवार्य हो। इससे फर्जी इनवॉइस के जरिए क्रेडिट लेने के रास्ते बंद करने की कोशिश है।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

  • ऑनलाइन विक्रेता: अगर आप ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कई राज्यों में बेचते हैं, तो दूसरे राज्यों में दफ्तर खोले बिना रजिस्ट्रेशन आसान हो सकता है। नोटिफिकेशन में आने वाली शर्तें, खासकर 2.5 लाख रुपये मासिक ITC की सीमा, ध्यान से देखें।
  • निर्यातक और इनवर्टेड ड्यूटी वाले कारोबार: 90% अस्थायी रिफंड जल्दी मिलने से वर्किंग कैपिटल का दबाव घट सकता है।
  • नए रजिस्ट्रेशन वाले: REG-01 में तय दस्तावेजों की सूची आने के बाद आवेदन से पहले उसी हिसाब से कागज तैयार रखें।
  • आम ग्राहक: इन सुधारों से सीधे दाम कम नहीं होंगे। CBIC के मुताबिक ग्राहकों को फायदा अप्रत्यक्ष होगा, यानी कारोबार आसान होने और उद्योग द्वारा लाभ आगे बढ़ाने की स्थिति में।

आगे क्या?

सबसे अहम अगला कदम नोटिफिकेशन और सर्कुलर का जारी होना है, जो रिपोर्ट्स के अनुसार शुक्रवार को आ सकते हैं। सुधार चरणों में आएंगे और हर बदलाव की तारीख जीएसटी नेटवर्क (GSTN) पोर्टल पर जरूरी सिस्टम बदलावों पर निर्भर करेगी। कारोबारी अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से सलाह लेकर ही नियमों के हिसाब से बदलाव करें और आधिकारिक जानकारी के लिए cbic-gst.gov.in व gst.gov.in देखते रहें।

स्रोत: PTI (Rediff Money के जरिए), द इकोनॉमिक टाइम्स, द हिंदू बिजनेसलाइन, PIB FAQ। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कर संबंधी फैसलों के लिए आधिकारिक अधिसूचना देखें।

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