भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पद संभालने के अगले ही दिन, रविवार 1 नवंबर 2026 को, अपनी प्राथमिकताओं का खाका देश के सामने रखा। उन्होंने इसे ‘VAYU’ नाम दिया है, जिसका हर अक्षर एक लक्ष्य बताता है। उन्होंने साफ कहा कि वायुसेना की लड़ाकू स्क्वॉड्रन की संख्या को स्वीकृत स्तर की ओर वापस ले जाना उनका “सबसे पहला काम” होगा। एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने 31 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की जगह कमान संभाली है।
VAYU का मतलब क्या है
द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना प्रमुख ने अपनी चार प्राथमिकताएं इस तरह समझाईं:
- V – विजिलेंस और रेडीनेस (सतर्कता और तैयारी): हर स्क्वॉड्रन, हर रडार, हर एयर डिफेंस यूनिट और हर वायु योद्धा एक पल के नोटिस पर जवाब देने को तैयार रहे।
- A – आत्मनिर्भरता: भारतीय सेंसर, प्लेटफॉर्म और हथियार सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगे। तेजस Mk1A, तेजस Mk2 और स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA पर खास जोर रहेगा।
- Y – युक्ति (नवाचार): नेटवर्क आधारित और AI से लैस कमांड-एंड-कंट्रोल, कई परतों वाली काउंटर-ड्रोन सुरक्षा, तेज मेंटेनेंस, फोर्स प्रोटेक्शन और ‘नियर-स्पेस’ को एक ऑपरेशनल क्षेत्र की तरह इस्तेमाल करना।
- U – यूनिटी ऑफ एफर्ट (एकजुट प्रयास): थलसेना, नौसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर योजना बनाना और लड़ना।
उन्होंने कहा, “हम भारतीय समाधानों के साथ लड़ेंगे और उन्हें इतनी संख्या में रखेंगे कि लंबे ऑपरेशन की जरूरतें पूरी हो सकें। हमारी जिम्मेदारी लड़ना और जीतना है, लेकिन सबसे अहम है विश्वसनीय वायु शक्ति के जरिए युद्ध को रोकना।”
क्यों अहम है स्क्वॉड्रन की कमी का मुद्दा
भारतीय वायुसेना के लिए 42 लड़ाकू स्क्वॉड्रन स्वीकृत हैं, लेकिन असल संख्या इससे काफी कम है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक हाल के वर्षों में कई मिग-21 स्क्वॉड्रन रिटायर हो चुके हैं, कुछ और स्क्वॉड्रन 2029-30 के अंत तक बाहर होने वाले हैं और तेजस की डिलीवरी में देरी हुई है। यानी एक तरफ पुराने विमान हट रहे हैं और दूसरी तरफ नए विमान उतनी तेजी से नहीं आ रहे। यही वजह है कि नए प्रमुख ने इसे अपनी पहली प्राथमिकता बताया है।
वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि सुरक्षा माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हथियार, अंतरिक्ष, साइबर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसी नई तकनीकें युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं। इसलिए वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के हिसाब से बदलते हुए भी हर समय लड़ने और जीतने को तैयार रहना होगा।
कौन हैं एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के मुताबिक, नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र आशुतोष दीक्षित 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। वह फाइटर पायलट, क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं और मिराज-2000, मिग के कई वेरिएंट, जगुआर और ट्रांसपोर्ट विमानों समेत 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव रखते हैं। उन्होंने जगुआर और मिग-27 अपग्रेड प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने और तेजस Mk-I के IOC व FOC (शुरुआती और अंतिम ऑपरेशनल मंजूरी) में अहम भूमिका निभाई।
वह मिराज-2000 स्क्वॉड्रन और एयर फोर्स स्टेशन बीदर की कमान संभाल चुके हैं, सेंट्रल एयर कमांड के प्रमुख रहे हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ थे। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ थे। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल मिल चुके हैं।
देश और आम नागरिक के लिए इसका मतलब
तेजस और AMCA पर जोर का सीधा असर देश के रक्षा उद्योग पर पड़ेगा। HAL, DRDO और इनसे जुड़ी सैकड़ों छोटी-मझोली कंपनियों को ज्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे रोजगार और तकनीकी क्षमता दोनों बढ़ेंगी। काउंटर-ड्रोन सुरक्षा पर फोकस इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के संघर्षों में सस्ते ड्रोन बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल यानी ‘जॉइंटनेस’ पर जोर थिएटर कमांड जैसे बड़े सुधारों की दिशा में भी इशारा करता है।
आगे क्या
नए वायुसेना प्रमुख के सामने सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि तेजस Mk1A की डिलीवरी समय पर हो और AMCA कार्यक्रम तेज रफ्तार पकड़े। आने वाले महीनों में विमान खरीद, स्वदेशी इंजन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों से जुड़े फैसलों पर नजर रहेगी। देशवासियों के नाम संदेश में उन्होंने कहा, “विश्वास रखिए, आपकी वायुसेना सतर्क, तैयार और दृढ़ है।”
स्रोत: PIB, द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस

