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8 नवम्बर 2026, रवि

इजराइल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं: नेतन्याहू और आइजेनकोट में फंसा पेंच, भारत के रिश्तों पर क्या असर?

यरुशलम में इजराइल की संसद नेसेट की इमारत

इजराइल के 27 अक्टूबर 2026 के संसदीय चुनाव में किसी भी गुट को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नहीं दिख रहीं। BBC की रिपोर्ट के अनुसार 85 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद न तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और न ही उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट का गुट बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में भारत में भी सवाल उठ रहा है कि इजराइल की राजनीति बदलने से भारत-इजराइल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा। 28 अक्टूबर तक की जानकारी के आधार पर यहां पूरा मामला आसान भाषा में समझिए।

चुनाव में क्या हुआ?

BBC के मुताबिक चुनाव की रात आए एक प्रमुख एग्जिट पोल में शुरुआत में आइजेनकोट के गुट को बढ़त दिखाई गई थी, पर बाद में उसमें संशोधन हुआ और नेतन्याहू आगे निकलते दिखे। AP ने इसे अनिर्णायक चुनाव कहा है और BBC की लाइव रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश वोट गिने जाने तक नेतन्याहू का गुट मामूली बढ़त पर है, लेकिन बहुमत से दूर है। अंतिम और आधिकारिक नतीजे आने बाकी हैं, इसलिए आंकड़े बदल सकते हैं।

BBC ने बताया कि इजराइल के अरब दलों का प्रदर्शन रिकॉर्ड स्तर पर रहने के आसार हैं। संयुक्त सूची के लगभग 12 और यूनाइटेड अरब लिस्ट के करीब 7 सीटें जीतने का अनुमान है, यानी कुल 19 के आसपास। देश की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी अरब नागरिकों की है और इस बार उनके मतदान में असाधारण बढ़ोतरी बताई गई।

अब सरकार बनाने के चार रास्ते

  • नेतन्याहू के नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता सरकार: इसके लिए आइजेनकोट को अपनी मुख्य चुनावी लाइन छोड़नी होगी, जो नेतन्याहू को सत्ता से हटाने पर टिकी है।
  • आइजेनकोट के नेतृत्व में अरब दलों के साथ गठबंधन: यह इजराइली राजनीति में बड़ा बदलाव होगा, पर आइजेनकोट और उनके गुट की लगभग सभी यहूदी पार्टियां इसे पहले खारिज कर चुकी हैं।
  • नेतन्याहू का विपक्ष के दक्षिणपंथी दलों के साथ बहुमत: नफ्ताली बेनेट और अविगदोर लिबरमैन के नाम चर्चा में हैं, पर दोनों ने उन्हें हटाने के नाम पर प्रचार किया था।
  • नए चुनाव: अगर कोई रास्ता न निकला तो यही तय रास्ता है। BBC के अनुसार 2019 से 2022 के बीच इजराइल पांच बार चुनाव करा चुका है।

भारत-इजराइल रिश्तों पर असर

The Diplomat के विश्लेषण के मुताबिक चुनाव राजनीतिक माहौल बदल सकता है, पर दोनों देशों के रिश्तों की संस्थागत नींव को मिटाना आसान नहीं है। भारत और इजराइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध जनवरी 1992 में बने थे और तब से रक्षा, खेती, पानी प्रबंधन, तकनीक और व्यापार में सहयोग बढ़ा है।

रक्षा सहयोग

विश्लेषण के अनुसार DRDO और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर बराक-8 वायु रक्षा प्रणाली बनाई है। दोनों देश आयरन डोम और तमीर इंटरसेप्टर जैसी प्रणालियों के भारत में सह-उत्पादन की संभावना भी देख रहे हैं। 2021 से 2025 के बीच भारत इजराइल के हथियार निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जो उसकी कुल बिक्री का 29 प्रतिशत था। नवंबर 2025 में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

व्यापार और मुक्त व्यापार समझौता

2025-26 में दोनों देशों के बीच करीब 3.93 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। फरवरी 2026 की मोदी की इजराइल यात्रा में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत और AI व साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश समझौता जुलाई 2026 में लागू हो चुका है।

असली चिंता: पश्चिम एशिया

भारत के लिए बड़ा मुद्दा नेतृत्व नहीं, क्षेत्रीय स्थिरता है। खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापार मार्ग भी इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं। इजराइल और उसके पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ने पर भारत के लिए संतुलन साधना मुश्किल हो सकता है। लेख में कहा गया कि भारत इजराइल से व्यावहारिक सहयोग बढ़ाते हुए क्षेत्रीय शांति और फिलिस्तीनियों के लिए राजनीतिक समाधान के समर्थन की नीति पर चल सकता है।

आगे क्या?

आधिकारिक नतीजों के बाद इजराइल के राष्ट्रपति सबसे बड़े दल के नेता या किसी सांसद को सरकार बनाने का मौका देते हैं। गठबंधन वार्ता में हफ्तों लग सकते हैं। इस दौरान नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

इजराइल की संसद में बहुमत के लिए कितनी सीटें चाहिए?

कुल 120 सीटों में से 61।

क्या नेतन्याहू फिर प्रधानमंत्री बनेंगे?

अभी कुछ तय नहीं है। BBC के अनुसार सबसे संभावित नतीजा नए चुनाव हो सकता है, और तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहेंगे।

क्या भारत-इजराइल रिश्तों पर तुरंत असर पड़ेगा?

विश्लेषकों के अनुसार रक्षा, व्यापार और तकनीक के संस्थागत रिश्तों में निरंतरता की संभावना ज्यादा है, पर सरकार बदलने पर कुछ प्राथमिकताओं की समीक्षा हो सकती है।

नोट: चुनाव के अंतिम नतीजे आने बाकी हैं। आंकड़े 28 अक्टूबर की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।

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