कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के आर्टिकल तैयार कर रहा है। अगर वे खुद इस्तीफा नहीं देते, तो विपक्ष उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
थरूर का यह बयान चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। विपक्ष लंबे समय से SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है और CEC के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
थरूर ने क्या कहा—कानूनी सुरक्षा और संविधान
थरूर के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को 2023 के CEC अधिनियम की धारा 16 के तहत कानूनी इम्यूनिटी मिली हुई है। यह धारा आधिकारिक कार्यों के लिए सिविल और आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाती है। लेकिन थरूर ने साफ कहा कि यह संवैधानिक सुरक्षा नहीं है। संविधान में महाभियोग का प्रावधान है, और उसी रास्ते पर विपक्ष आगे बढ़ सकता है।
धारा 16 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। जनवरी में शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया था, लेकिन स्थगन (stay) देने से इनकार कर दिया था। यानी फिलहाल कानूनी इम्यूनिटी बनी हुई है, लेकिन राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई जारी है।
SIR पर विपक्ष की मांगें
विपक्ष केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रहना चाहता। थरूर ने उन मांगों को दोहराया जो विपक्षी दलों ने बार-बार रखी हैं:
- SIR प्रक्रिया तुरंत स्थगित हो
- जो मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें बहाल किया जाए
- उपयोग में आए सॉफ्टवेयर की समीक्षा हो
- फॉर्म 6 और 7 में किए गए बदलाव रद्द किए जाएं
आरोप यह भी है कि एक सॉफ्टवेयर ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को गलत डिलीशन को ओवरराइड करने से रोका। Indian Express की गोवा में लगभग 97 मामलों की जांच का हवाला देते हुए इस बात को उठाया गया। थरूर ने कहा कि करीब 13 करोड़ नाम सूची से काटे गए बताए गए हैं। उन्होंने अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन की मां की उम्र में गड़बड़ी वाले नोटिस का जिक्र भी किया—ताकि आम आदमी समझ सके कि सूची की गलतियां कितनी दूर तक पहुंच सकती हैं।
जंतर मंतर डिनोटिफिकेशन पर नाराजगी
थरूर ने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाने की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड बताए गए हैं, लेकिन जंतर मंतर लंबे समय से दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध का केंद्र रहा है। इस फैसले को विपक्ष लोकतंत्र की आवाज दबाने जैसा बता रहा है।
आप पर क्या असर पड़ेगा
यह विवाद सिर्फ संसद या पार्टियों की लड़ाई नहीं है। SIR का सीधा मतलब है—आपका नाम मतदाता सूची में सही है या नहीं। अगर नाम गलत तरीके से कट जाए, तो वोट डालने का हक प्रभावित हो सकता है। विपक्ष कह रहा है कि लाखों-करोड़ों नामों पर सवाल हैं; चुनाव आयोग प्रक्रिया को नियमित बताता रहा है। आम नागरिक के लिए सबसे जरूरी कदम है:
- अपना वोटर स्टेटस NVSP / राज्य चुनाव आयोग पोर्टल पर चेक करें
- नाम कटने या गलत एंट्री पर फॉर्म 6/7/8 की सही प्रक्रिया समझें
- स्थानीय BLO से संपर्क रखें
पृष्ठभूमि में याद रखें: CEC को हटाना आसान नहीं। महाभियोग जैसी प्रक्रिया संवैधानिक बहुमत और लंबी बहस मांगती है। धारा 16 की इम्यूनिटी कोर्ट में विचाराधीन है। यानी निकट भविष्य में “तुरंत इस्तीफा” से ज्यादा सियासी दबाव, कोर्ट और जनमत की लड़ाई देखने को मिलेगी। जो लोग प्रदर्शन में जाना चाहते हैं, उनके लिए जंतर मंतर के विकल्प अब बुराड़ी, रामलीला और शाहदरा CBD बताए गए हैं—अनुमति और स्थान की जानकारी पहले लें।
आगे क्या—थरूर की नैतिक अपील
थरूर ने ज्ञानेश कुमार से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की अपील की। उनके शब्दों में यह “graceful thing to do” यानी शिष्ट और उचित कदम होगा। विपक्ष कह रहा है कि अगर इस्तीफा नहीं आता, तो महाभियोग के आर्टिकल आगे बढ़ाए जाएंगे। दोनों तरफ से सियासी तापमान ऊंचा है; आम मतदाता के लिए साफ संदेश यही है—अपनी सूची खुद जांचें, अफवाहों पर निर्भर न रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शशि थरूर ने CEC के खिलाफ क्या कहा?
उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के आर्टिकल तैयार कर रहा है और अगर वे इस्तीफा नहीं देते तो हटाने की प्रक्रिया चलेगी।
धारा 16 क्या है?
2023 CEC अधिनियम की धारा 16 आधिकारिक कार्यों के लिए सिविल/आपराधिक कार्यवाही से इम्यूनिटी देती है। थरूर कहते हैं कि इससे संवैधानिक महाभियोग का रास्ता बंद नहीं होता।
विपक्ष SIR पर क्या मांग कर रहा है?
SIR स्थगित हो, हटाए गए मतदाता बहाल हों, सॉफ्टवेयर की समीक्षा हो और फॉर्म 6/7 के बदलाव रद्द हों।
जंतर मंतर के विकल्प कौन से हैं?
दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी ग्राउंड, रामलीला मैदान और CBD ग्राउंड (शाहदरा) विकल्प बताए हैं।
स्रोत: India Today, Free Press Journal (13 अक्टूबर 2026)। आंकड़े और उद्धरण रिपोर्टेड बयानों पर आधारित।

