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7 नवम्बर 2026, शनि

महंगे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- ‘हवाई यात्रा मत करिए’; 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए किराया नियम, जानें आप पर असर

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की इमारत

महंगे हवाई टिकटों से परेशान यात्रियों को सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। बढ़ते हवाई किराए के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया और उसे खारिज कर दिया। दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जे. विक्रम नाथ की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “आप हवाई यात्रा मत करिए, आगे बढ़िए।” इसी बीच केंद्र सरकार ने हवाई किराए को लेकर नए नियम भी अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। आइए समझते हैं पूरा मामला और यह भी कि इन नियमों से आम यात्री पर क्या असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

रिपोर्ट्स के अनुसार, याचिकाकर्ता के वकील ने बेंच के सामने दलील दी कि विमान का किराया 700% तक बढ़ गया है। उनका कहना था कि हवाई यात्रा अब एक जरूरी सेवा बन चुकी है और किराए में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों पर विस्तार से सुनवाई नहीं की और याचिका खारिज कर दी। 700% बढ़ोतरी का आंकड़ा याचिकाकर्ता का दावा है; कोर्ट ने इस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कोर्ट ने किराए को सही या गलत नहीं ठहराया, बल्कि इस याचिका पर दखल देने से इनकार किया। यानी हवाई किराया तय करने का सवाल फिलहाल सरकार और नियामक (DGCA) के दायरे में ही रहेगा।

किराए क्यों बढ़े हैं?

त्योहारी सीजन में इस बार कई रूटों पर हवाई किराए पिछले साल के मुकाबले काफी ऊपर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का महंगा होना और कुछ रूटों पर उड़ानों की कमी बताई जा रही है। भास्कर के मुताबिक, नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि ATF की कीमतें बढ़ने से किराए को काबू में रखना चुनौती बन गया है।

एअर इंडिया और इंडिगो ने भी हाल ही में जेट फ्यूल महंगा होने का हवाला देकर किराए बढ़ाए थे। एअर इंडिया ने 9 अक्टूबर से घरेलू उड़ानों पर 1,200 रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 17,800 रुपये तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान किया था। यही चार्ज एअर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू है, क्योंकि दोनों टाटा ग्रुप की एयरलाइंस हैं।

भारत में हवाई सफर का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इससे लगाइए कि नागर विमानन मंत्रालय और DGCA के 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक देश में सालाना करीब 24 करोड़ हवाई यात्राएं होती हैं। इनमें 16.55 करोड़ घरेलू और 7.39 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्री यात्राएं शामिल हैं। इसलिए किराए में हर बढ़ोतरी का असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है।

नए नियम: भारतीय वायुयान नियम, 2026

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नागर विमानन मंत्रालय ने भारतीय वायुयान नियम (Bharatiya Vayuyan Niyam), 2026 को 26 अक्टूबर को अधिसूचित किया और 31 अक्टूबर को इसे भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और करीब 90 साल पुराने एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 की जगह लेंगे। ये नियम भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए हैं, जिसने एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 की जगह ली थी और जो 1 जनवरी 2025 से लागू है।

किराए से जुड़े अहम प्रावधान इस तरह हैं:

  • किराया एयरलाइंस ही तय करेंगी: सामान्य हालात में किराए पर कोई स्थायी सीमा (कैप) नहीं होगी और हर टिकट की कीमत के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी नहीं होगी। एयरलाइंस को किराया संचालन लागत जैसे कारकों के आधार पर तय करना होगा।
  • असाधारण हालात में सरकार का दखल: अगर केंद्र सरकार को लगे कि कोई असाधारण स्थिति बन गई है, तो वह जनहित में एयरलाइंस को लिखित निर्देश दे सकती है। ये निर्देश हालात के अनुपात में होंगे और सिर्फ तय अवधि तक ही लागू रहेंगे।
  • पूरा ब्रेक-अप दिखाना होगा: नियम 192 के तहत एयरलाइंस को अपनी बुकिंग वेबसाइट और टिकट पर कुल देय राशि के साथ किराया, टैक्स, फीस, कैंसिलेशन चार्ज, रिफंड की शर्तें और बाकी शुल्क अलग-अलग दिखाने होंगे।
  • DGCA की निगरानी: भारतीय एयरलाइंस को अपने टैरिफ DGCA को तय फॉर्मेट और अंतराल पर जमा करने होंगे, और DGCA इनकी निगरानी करेगा। यह नियम भारत आने-जाने वाली विदेशी एयरलाइंस पर भी टैरिफ प्रकाशित करने के मामले में लागू होगा।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे पहले साफ समझ लें कि नए नियमों से किराया अपने-आप सस्ता नहीं होगा। सामान्य दिनों में मांग और सीटों की उपलब्धता के हिसाब से किराया ऊपर-नीचे होता रहेगा। लेकिन 1 जनवरी 2027 के बाद दो बड़े फायदे होंगे। पहला, टिकट बुक करते समय ही आपको कैंसिलेशन चार्ज और रिफंड की शर्तें साफ-साफ दिखेंगी, जिससे बाद में “छिपे चार्ज” की शिकायत कम होगी। दूसरा, किसी आपदा, बड़ी उड़ान रुकावट या आपात स्थिति में किराए अचानक आसमान छूने लगें तो सरकार के पास दखल देने का कानूनी अधिकार रहेगा।

तब तक यात्रियों के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव काम आ सकते हैं: त्योहारों और छुट्टियों की यात्रा के टिकट कुछ हफ्ते पहले बुक करें, एक से ज्यादा एयरलाइन और तारीखों की तुलना करें, बुकिंग से पहले कैंसिलेशन व रिफंड की शर्तें जरूर पढ़ें, और किराए की तुलना करते समय फ्यूल चार्ज समेत कुल राशि देखें, सिर्फ बेस फेयर नहीं।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद अब हवाई किराए पर नजर रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से DGCA और नागर विमानन मंत्रालय पर है। DGCA को अभी यह तय करना है कि एयरलाइंस किस फॉर्मेट में और कितने अंतराल पर टैरिफ जमा करेंगी। नए नियम लागू होने के बाद ही साफ होगा कि सरकार “असाधारण स्थिति” की व्याख्या कैसे करती है और जरूरत पड़ने पर किराए पर कितनी तेजी से कदम उठाती है।

स्रोत: दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू बिजनेसलाइन और भारत का राजपत्र (G.S.R. 957(E))।

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