केंद्र सरकार ने गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) देर रात पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में फिर बदलाव कर दिया। नए आदेश के मुताबिक पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 50 पैसे से बढ़कर 2.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल निर्यात पर यह 16 रुपये से घटकर 8.50 रुपये प्रति लीटर रह गया है। नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हैं।
पेट्रोल डीजल विंडफॉल टैक्स की यह खबर आते ही सुबह-सुबह “पेट्रोल” गूगल ट्रेंड्स में ऊपर दिखा तो कई लोगों ने यही सोचा कि पंप पर दाम बढ़ गए। ऐसा नहीं है। यह फैसला देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन पर है, घरेलू बिक्री पर नहीं।
नई दरें एक नजर में
- पेट्रोल निर्यात: 0.50 रुपये से बढ़कर 2.50 रुपये प्रति लीटर
- डीजल निर्यात: 16 रुपये से घटकर 8.50 रुपये प्रति लीटर
- ATF (विमान ईंधन) निर्यात: कोई बदलाव नहीं। 1 अक्टूबर की समीक्षा में यह 10.50 रुपये प्रति लीटर तय हुआ था
- घरेलू बिक्री वाले पेट्रोल-डीजल पर शुल्क: कोई बदलाव नहीं
Reuters के हवाले से Business Standard, The Hindu और BusinessLine ने यही आंकड़े दिए हैं। Economic Times के मुताबिक केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने भी साफ किया कि ATF पर दर जस की तस है और घरेलू खपत वाले ईंधन की ड्यूटी नहीं बदली गई।
विंडफॉल टैक्स आखिर है क्या?
सीधी भाषा में, जब किसी बाहरी वजह से कंपनियों को अचानक बहुत ज्यादा मुनाफा होने लगे, जैसे युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम उछल जाएं, तो सरकार उस “अचानक मिले मुनाफे” पर अलग से टैक्स लगाती है। भारत में यह टैक्स विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और सड़क-इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के रूप में ईंधन निर्यात पर लगता है।
मकसद दोहरा है। पहला, रिफाइनरियां ऊंचे अंतरराष्ट्रीय दामों के लालच में सारा माल बाहर न भेज दें और देश में सप्लाई बनी रहे। दूसरा, अतिरिक्त कमाई का कुछ हिस्सा सरकारी खजाने में आए।
हर 15 दिन में क्यों बदलती है दर
सरकार यह दर हर पखवाड़े पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के औसत दाम देखकर तय करती है। इसी वजह से इस बार डीजल पर शुल्क आधा हुआ, जबकि पेट्रोल पर पांच गुना हो गया। यानी पिछले पखवाड़े में दोनों उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय भाव अलग-अलग दिशा में चले।
पिछली समीक्षा (1 अक्टूबर) में PTI के मुताबिक डीजल निर्यात शुल्क 20 से घटाकर 16 रुपये और ATF पर 15 से घटाकर 10.50 रुपये किया गया था, जबकि पेट्रोल पर 50 पैसे ही रखा गया था।
पृष्ठभूमि
भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था और करीब दो साल बाद इसे हटा दिया था। Reuters के अनुसार मार्च 2026 में ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के दाम उछले तो यह टैक्स दोबारा लाया गया। PTI के मुताबिक डीजल और ATF पर यह 27 मार्च से और पेट्रोल पर 16 मई से लगा। ET ने LSEG डेटा के हवाले से लिखा है कि फिलहाल कच्चा तेल करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- पंप पर दाम: यह फैसला सीधे आपकी जेब पर असर नहीं डालता, क्योंकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की ड्यूटी नहीं बदली। पंप कीमतें तेल कंपनियां और सरकार अलग से तय करती हैं।
- डीजल की सप्लाई: डीजल निर्यात पर टैक्स घटने से रिफाइनरियों के लिए बाहर बेचना पहले से कुछ आसान होगा। सरकार यह टैक्स घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के मकसद से ही लगाती है, इसलिए आगे की समीक्षाओं में इसी संतुलन पर नजर रहेगी।
- शेयर बाजार: जो रिफाइनिंग कंपनियां बड़ी मात्रा में ईंधन निर्यात करती हैं, उनके मार्जिन पर इसका सीधा असर पड़ता है। डीजल पर राहत और पेट्रोल पर बोझ, दोनों को मिलाकर देखें। निवेश से पहले कंपनी के निर्यात मिक्स को समझें, सिर्फ हेडलाइन पर फैसला न लें।
- आगे क्या: अगली समीक्षा पखवाड़े भर बाद होगी। अगर कच्चा तेल ऊंचा रहा तो दरें फिर बढ़ सकती हैं, नरम पड़ा तो घट सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह सरकार का नियमित “फोर्टनाइटली” समायोजन है, कोई नया टैक्स नहीं। आम उपभोक्ता के लिए असली खबर तब होगी जब घरेलू पंप कीमतों पर कोई फैसला आए। उस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या पेट्रोल पंप पर पेट्रोल महंगा हो गया?
नहीं। बढ़ोतरी सिर्फ पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में है। घरेलू बिक्री वाले पेट्रोल-डीजल की ड्यूटी नहीं बदली।
नई दरें कब से लागू हैं?
16 अक्टूबर 2026 से।
डीजल निर्यात पर अब कितना टैक्स है?
8.50 रुपये प्रति लीटर, जो पहले 16 रुपये था।
ATF पर क्या बदला?
कुछ नहीं। विमान ईंधन के निर्यात पर दर पहले जैसी ही है।
विंडफॉल टैक्स कितनी बार बदलता है?
फिलहाल हर पखवाड़े, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पादों के दाम के हिसाब से।

