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6 नवम्बर 2026, शुक्र

आधार नहीं, वोटर आईडी से मिलेगा योजनाओं का पैसा? केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान पर बवाल; जानें अभी क्या नियम है और आप पर असर

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभालते हुए

सरकारी योजनाओं का पैसा पाने के लिए क्या अब आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी जरूरी हो जाएगा? यह सवाल इन दिनों गांव-कस्बों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा में है। वजह है केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का एक बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि आगे लाभार्थियों को भुगतान का मुख्य आधार आधार कार्ड नहीं रहेगा, बल्कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ वोटर आईडी यानी EPIC नंबर का इस्तेमाल होगा। इस बयान पर बिहार में सियासत भी गर्म हो गई है।

ललन सिंह ने क्या कहा?

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, ललन सिंह ने यह बात बीते शुक्रवार (30 अक्टूबर) को पंचायती राज मंत्रालय की ओर से जन योजना अभियान 2026-27 पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “एक बात और कह देना चाहता हूं कि अब आधार लाभार्थियों को भुगतान करने का जो आधार है वह आधार कार्ड नहीं रहेगा। अब आधार कार्ड बनाने वाली संस्थाएं हैं हर गली में उपलब्ध हैं। आप जिसका कहिए अभी 5 मिनट में आधार कार्ड बनाकर तैयार कर देंगे।”

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने कहा कि अभी लाभार्थियों को भुगतान के लिए आधार का इस्तेमाल होता है, लेकिन आगे यह पहचान का मुख्य आधार नहीं रहेगा और इसकी जगह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ EPIC नंबर का उपयोग किया जाएगा। इसी कार्यशाला में उन्होंने आत्मनिर्भर और विकसित पंचायतों की बात भी की और कहा कि प्रदर्शन अनुदान (परफॉर्मेंस ग्रांट) के लिए पात्र बनने के लिए ग्राम पंचायतों को अपने स्रोतों से कमाई बढ़ानी होगी।

अभी यह सिर्फ बयान है, आदेश नहीं

यह समझना जरूरी है कि अभी तक सामने आई रिपोर्ट्स में मंत्री के बयान का जिक्र है, किसी लिखित सरकारी आदेश या अधिसूचना का नहीं। यानी फिलहाल किसी भी योजना में भुगतान का नियम नहीं बदला है। जिन योजनाओं में आज आधार से जुड़े बैंक खाते में पैसा आता है, उनमें वही व्यवस्था जारी है। कोई भी बदलाव तभी लागू माना जाएगा जब संबंधित मंत्रालय उसका औपचारिक आदेश जारी करेगा।

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट यह भी बताती है कि पंचायती राज मंत्रालय की ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें पैसा सीधे किसी लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता हो। हालांकि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की कुछ योजनाओं में भुगतान के लिए आधार जरूरी है। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए आधार नंबर होने का सबूत या आधार ऑथेंटिकेशन मांगा जाता है।

किन बड़ी योजनाओं में आधार से होता है भुगतान

देश की कई बड़ी योजनाओं में पैसा आधार से जुड़े बैंक खातों के जरिए भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें ये शामिल हैं:

  • ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (मनरेगा) की मजदूरी
  • पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्तें
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
  • वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन

ये योजनाएं दूसरे मंत्रालयों के अधीन आती हैं, इसलिए ललन सिंह के बयान का इन पर सीधा असर तभी होगा जब केंद्र सरकार इस बारे में कोई व्यापक फैसला ले।

RJD ने उठाए सवाल, BJP ने किया समर्थन

बयान के बाद बिहार में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं। आजतक के अनुसार RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि भारत सरकार ने अपनी योजनाओं के लिए आधार को मान्यता दी है, तो फिर वोटर आईडी को जोड़ने की जरूरत क्यों है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसका मकसद लाभार्थियों को योजनाओं से वंचित करना है।

वहीं बिहार BJP के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने इस कदम का समर्थन किया। उनका कहना है कि आधार आसानी से बन जाने के कारण फर्जी लाभार्थी बढ़ते थे और वोटर आईडी व बायोमेट्रिक से लाभ सिर्फ असली और योग्य लोगों तक पहुंचेगा। उन्होंने इसे पारदर्शी शासन और ग्राम पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया।

आधार और वोटर आईडी में फर्क क्या है?

आधार 12 अंकों की पहचान संख्या है, जिसे UIDAI जारी करता है और यह बच्चों समेत किसी भी उम्र के निवासी के लिए बन सकता है। आधार अधिनियम 2016 की धारा 7 के तहत सरकार सब्सिडी और लाभ के लिए आधार मांग सकती है, और सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के अपने फैसले में कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार के इस्तेमाल को सही ठहराया था।

वोटर आईडी यानी EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) चुनाव आयोग जारी करता है और यह सिर्फ 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के भारतीय नागरिकों को मिलता है, जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो। यही वजह है कि अगर किसी योजना में EPIC को मुख्य पहचान बनाया जाता है, तो नाबालिगों से जुड़ी योजनाओं या जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, उनके लिए व्यवस्था कैसे होगी, यह सवाल अहम रहेगा। इस पर सरकार की ओर से अभी कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • अभी घबराने की जरूरत नहीं: किसी योजना में भुगतान का नियम अभी नहीं बदला है। आपकी किस्त या पेंशन पहले की तरह आधार से जुड़े खाते में ही आएगी।
  • आधार अपडेट रखें: आधार से बैंक खाता लिंक और मोबाइल नंबर अपडेट रखना अब भी जरूरी है, क्योंकि ज्यादातर DBT भुगतान इसी पर चलते हैं।
  • वोटर आईडी भी दुरुस्त करा लें: अगर आप 18 साल से ऊपर हैं और आपका नाम, पता या फोटो वोटर आईडी में गलत है, तो उसे ठीक करा लेना समझदारी होगी, ताकि आगे किसी नियम में बदलाव हो तो परेशानी न हो।
  • अफवाहों से बचें: “आधार बंद होने” जैसे दावे वाले मैसेज पर भरोसा न करें। आधार बंद करने की कोई घोषणा नहीं हुई है।

आगे क्या

अब नजर इस बात पर रहेगी कि पंचायती राज या मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय इस बारे में कोई लिखित दिशा-निर्देश जारी करता है या नहीं, और अगर करता है तो वह किन योजनाओं पर लागू होगा। जब तक औपचारिक आदेश नहीं आता, यह एक नीति संकेत भर है। TrendFlash इस मामले से जुड़ा कोई भी आधिकारिक अपडेट आने पर आपको जानकारी देगा।

स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान, आजतक और द लल्लनटॉप की रिपोर्ट्स।

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