उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन अयोध्या सीट को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, योगी ने उसे स्वीकार करते हुए उल्टा अखिलेश को भी वहीं से नामांकन करने का न्योता दे दिया। और फिर अखिलेश ने जवाब दिया कि उनका उम्मीदवार पवन पांडे ही बीजेपी के लिए काफी है।
सोमवार को योगी ने गोरखपुर में कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। यानी पिछले हफ्ते शुरू हुई जुबानी जंग अब और तेज हो गई है।
कैसे शुरू हुई Ayodhya Seat पर योगी-अखिलेश की जंग?
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा था कि सपा के उम्मीदवार घोषित करने के बाद से बीजेपी “सर्वे पर सर्वे” करा रही है और अयोध्या के लिए नया उम्मीदवार नहीं ढूंढ पा रही। उन्होंने कहा कि अगर बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री इतने ही आश्वस्त हैं, तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं।
इसके जवाब में शनिवार (10 अक्टूबर) को बलरामपुर में करीब 800 करोड़ रुपये से ज्यादा की 78 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के दौरान योगी ने मंच से कहा, “अखिलेश जी, मैं आपको ऑफर करता हूं। आइए, आप भी श्री अयोध्या धाम में नामांकन करिए और मैं भी करता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई आमने-सामने की होनी चाहिए, समर्थकों के जरिए क्यों।
योगी ने यह भी जोड़ा कि बीजेपी के लिए अयोध्या आस्था का केंद्र है, सिर्फ चुनावी मैदान नहीं। उन्होंने सपा सरकार के दौर में अयोध्या में बिजली की कमी, गंदगी और रामलीला पर पाबंदियों के आरोप भी लगाए।
अखिलेश का पलटवार: ‘पवन का झोंका आएगा’
अखिलेश ने घंटों के भीतर X पर जवाब दिया कि अयोध्या में “चढ़ावा-चंदा-दान” के चोरों को हराने के लिए उनका एक युवा ‘पीडीए प्रहरी’ ही काफी है। उन्होंने याद दिलाया, “लोकसभा भूल गये क्या?”
रविवार को लखनऊ में जेपी इंटरनेशनल सेंटर पर जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने और तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि सपा ने सबसे पहले अयोध्या से तेज नारायण उर्फ पवन पांडे का टिकट तय किया था, और “पवन का झोंका आएगा, अहंकार सब उड़ जाएगा।”
अखिलेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्या मुख्यमंत्री टिकट बांटते हैं। उनके मुताबिक, योगी को खुद अपने टिकट के लिए लाइन में लगना पड़ता है, इसलिए पहले अपना टिकट पक्का करें, फिर चुनौती दें।
फैजाबाद की हार का जिक्र क्यों?
अखिलेश बार-बार 2024 के लोकसभा चुनाव की याद दिला रहे हैं। तब अयोध्या जिस फैजाबाद लोकसभा सीट में आती है, वहां सपा के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को हराया था। राम मंदिर के उद्घाटन के कुछ महीनों बाद आया यह नतीजा बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना गया था। सपा इसी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना रही है।
फिलहाल अयोध्या विधानसभा सीट बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता के पास है, जबकि योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर सीट से विधायक हैं।
सोमवार को कांग्रेस पर बरसे योगी
अयोध्या वाली बहस के बीच सोमवार को गोरखपुर में योगी ने दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस को घेरा। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि यूपी ने 41 साल पहले कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था और अगर पार्टी अपनी नाकामियां छिपाने के लिए अराजकता फैलाना बंद नहीं करती, तो जनता उसका बचा-खुचा अस्तित्व भी खत्म कर देगी।
ANI से बातचीत में योगी ने कहा कि “जीतें तो उनकी काबिलियत, हारें तो EVM और चुनाव आयोग पर दोष”, यह कांग्रेस की आदत बन गई है। उन्होंने कांग्रेस को अपना “अविश्वासी नेतृत्व” बदलने की सलाह भी दी।
आगे क्या?
साफ है कि 2027 की लड़ाई में अयोध्या सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनती जा रही है। क्या योगी सच में गोरखपुर छोड़कर अयोध्या से उतरेंगे? क्या अखिलेश खुद मैदान में आएंगे? दोनों में से किसी ने अभी औपचारिक घोषणा नहीं की है। फैसला पार्टियों के टिकट ऐलान के बाद ही होगा। तब तक बयानों की यह जंग थमने वाली नहीं दिखती।
FAQ: अयोध्या सीट पर योगी-अखिलेश विवाद
प्रश्न 1: क्या योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे?
उत्तर: योगी ने अखिलेश की चुनौती स्वीकार करते हुए दोनों के अयोध्या से लड़ने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन बीजेपी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
प्रश्न 2: सपा ने अयोध्या से किसे उम्मीदवार बनाया है?
उत्तर: सपा ने तेज नारायण उर्फ पवन पांडे को अयोध्या सीट से उम्मीदवार घोषित किया है।
प्रश्न 3: अभी अयोध्या सीट से विधायक कौन हैं?
उत्तर: बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता।
प्रश्न 4: योगी अभी किस सीट से विधायक हैं?
उत्तर: योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर (गोरखपुर अर्बन) सीट से विधायक हैं।

