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7 नवम्बर 2026, शनि

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को ₹10,000 करोड़ की “कंटेनर निर्माण प्रोत्साहन योजना” (Container Manufacturing Promotion Scheme, CMPS) को मंजूरी दी। इसका मकसद देश में विश्वस्तरीय शिपिंग कंटेनर बनाने का तंत्र खड़ा करना, आयात पर निर्भरता घटाना और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। पीआईबी, प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट और बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्टों के आधार पर योजना की मुख्य बातें यहां हैं।

योजना का मकसद और अवधि

पीआईबी के अनुसार यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी और वित्त वर्ष 2027-28 से 2039-40 तक चलेगी। इसमें तीन साल सुविधाएं लगाने के लिए और दस साल उत्पादन सहायता के लिए रखे गए हैं। कैबिनेट ब्रीफिंग के अनुसार कुल परिव्यय ₹10,000 करोड़ है और अवधि 13 साल। योजना नई फैक्टरियों के साथ मौजूदा इकाइयों के विस्तार को भी मदद देगी। सरकार का लक्ष्य देश की सालाना कंटेनर निर्माण क्षमता को करीब दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) तक ले जाना है। पीआईबी ने बताया कि मौजूदा क्षमता करीब 70,000 TEU है।

चार प्रमुख घटक

1. ब्याज सहायता (₹859 करोड़)

पात्र टर्म लोन (पूंजी ऋण) पर 3% सालाना ब्याज सब्सिडी मिलेगी। ग्रीनफील्ड संयंत्र की सालाना क्षमता कम से कम 1,00,000 TEU और ब्राउनफील्ड विस्तार कम से कम 25,000 TEU का होना चाहिए। परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी के तीन साल के भीतर चालू करना और वैश्विक कंटेनर मानकों का पालन करना होगा। ग्रीनफील्ड का मतलब बिल्कुल नई परियोजना है, जबकि ब्राउनफील्ड में मौजूदा संपत्ति का उन्नयन या नया उपयोग शामिल है।

2. परिचालन खर्च सहायता (₹8,891 करोड़)

वैश्विक शिपिंग मानकों पर बने और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे गए कंटेनरों पर मदद दी जाएगी, ताकि आयातित कंटेनरों से लागत का अंतर पाटा जा सके। पीआईबी की सूची के अनुसार सहायता इस प्रकार है:

  • 20 फुट का कंटेनर: ₹49,500 प्रति कंटेनर;
  • 40 फुट का कंटेनर: ₹86,625 प्रति कंटेनर;
  • 20 फुट का विशेष कंटेनर: ₹37,125 से ₹74,250 प्रति कंटेनर।

सहायता के लिए न्यूनतम स्थानीय सामग्री वित्त वर्ष 2031-32 तक 70% और 2032-33 से 90% होनी चाहिए।

3. परीक्षण और प्रमाणन (₹150 करोड़)

डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी साझा सुविधाएं बनाई जाएंगी, ताकि विदेशी परीक्षण पर निर्भरता घटे।

4. बंदरगाहों पर जमीन

प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण कंटेनर निर्माण इकाइयों को अधिसूचित दर की 25% रियायती दर पर जमीन पट्टे पर दे सकेंगे। पीआईबी के अनुसार योजना प्रबंधन के लिए ₹100 करोड़ अलग रखे गए हैं। योजना के दिशानिर्देश और सहायता की मंजूरी बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति करेगी।

रोजगार और अनुमानित असर

सरकार के अनुसार योजना से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार बनने का अनुमान है। इससे कॉर्नर कास्टिंग, विशेष इस्पात, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी सहारा मिलेगा। पीआईबी का कहना है कि सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2039-40 तक करीब ₹75,000 करोड़ का आर्थिक उत्पादन होगा, जो दी गई सहायता के सात गुना से ज्यादा है। मांग वैश्विक बेड़े के प्रतिस्थापन, भारत कंटेनर शिपिंग लाइन और वाढवण तथा गैलाथिया बे जैसे नए बड़े बंदरगाहों से आने की उम्मीद है। ये सरकारी अनुमान हैं।

भारत के लिए क्यों जरूरी

पीआईबी के अनुसार फरवरी 2026 तक भारत का समुद्री क्षेत्र देश के व्यापार का 95% मात्रा के हिसाब से और 70% मूल्य के हिसाब से संभालता था। क्षेत्र का योगदान जीडीपी में 4-5% है। केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए इसे आयात निर्भरता घटाने और लॉजिस्टिक्स श्रृंखला सुरक्षित करने की दिशा में मजबूत कदम बताया। बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा कि यह योजना देश के नवजात कंटेनर निर्माताओं को वित्तीय मदद देगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कंटेनर निर्माण प्रोत्साहन योजना का कुल बजट कितना है?

₹10,000 करोड़, वित्त वर्ष 2039-40 तक।

योजना का लक्ष्य क्या है?

सालाना घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता को करीब दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU करना।

कितने रोजगार का अनुमान है?

करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष।

नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक सरकारी विज्ञप्तियों और रिपोर्टों पर आधारित है। योजना के विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी होने हैं।

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