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7 नवम्बर 2026, शनि

कैंसर की 543 दवाएं 9 नवंबर से सस्ती: NPPA ने जारी की नई MRP लिस्ट, कुछ दाम 93% तक घटे; कीट्रूडा जैसी महंगी दवाओं पर राहत क्यों नहीं

कैंसर की कीमोथेरेपी दवाओं की शीशियां, NPPA ने 543 ब्रांड की MRP घटाई

कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। दवाओं की कीमत तय करने वाली सरकारी संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 28 अक्टूबर 2026 को कैंसर की दवाओं के 543 ब्रांड की नई अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की सूची जारी कर दी है। ये नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। कुछ दवाओं के दाम 90% से भी ज्यादा घटे हैं, लेकिन कीट्रूडा जैसी कुछ सबसे महंगी दवाओं की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सरकार ने क्या जारी किया?

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 28 अक्टूबर की रिलीज के मुताबिक, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग के तहत आने वाली NPPA ने एंटी-कैंसर दवाओं के 543 ब्रांड की संशोधित MRP सूची जारी की है। यह सूची उन आंकड़ों पर आधारित है जो दवा कंपनियों ने 27 अक्टूबर 2026 तक जमा किए थे। NPPA ने साफ किया है कि जैसे-जैसे बाकी कंपनियां अपनी नई कीमतें भेजेंगी, सूची लगातार अपडेट होती रहेगी। यानी अभी जिस ब्रांड का नाम सूची में नहीं है, वह बाद में जुड़ सकता है।

पूरा मामला क्या है: 30% ट्रेड मार्जिन की सीमा

17 अक्टूबर 2026 को NPPA ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड (जिनकी कीमत पहले से सरकार तय नहीं करती थी) कैंसर दवाओं पर “ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन” लागू किया था। इसके तहत डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, केमिस्ट और अस्पताल फार्मेसी की कुल कमाई यानी ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित कर दिया गया। अब तक कई दवाओं में कंपनी जिस कीमत पर दवा बेचती थी और मरीज जिस MRP पर खरीदता था, उसके बीच भारी अंतर होता था। सरकार ने उम्मीद जताई थी कि इस कदम से प्रभावित दवाओं की MRP 70% तक घट सकती है और मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। कंपनियों को नई कीमतें NPPA को भेजने का निर्देश दिया गया था, और अब उसी की पहली सूची सामने आई है।

PIB के अनुसार, इन 137 दवाओं में 20 से ज्यादा तरह के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को दी जाने वाली डेनोसुमैब, कीमोथेरेपी के दौरान संक्रमण से बचाने वाली पेगफिलग्रास्टिम और कोलन, ओवरी व सर्वाइकल कैंसर में दी जाने वाली बेवासिजुमैब जैसी दवाएं शामिल हैं।

किन दवाओं के दाम कितने घटे?

PIB ने कुछ ब्रांड की पुरानी और नई कीमतें उदाहरण के तौर पर दी हैं, जबकि Mint और India Today ने सूची से सबसे बड़ी कटौतियों का ब्योरा छापा है। कुछ प्रमुख उदाहरण:

  • Palbopro (पाल्बोसिक्लिब, ब्रेस्ट कैंसर): 125 mg के 21 कैप्सूल का पैक 40,421.33 रुपये से घटकर 2,720 रुपये, यानी करीब 93.3% सस्ता (Mint)।
  • Samtepa (थायोटेपा, कीमोथेरेपी): 100 mg वायल 80,071.86 रुपये से घटकर 7,150.33 रुपये, यानी 72,921 रुपये से ज्यादा की कटौती (Mint)।
  • Bevacizab 400 mg (बेवासिजुमैब): 65,205.09 रुपये से घटकर 8,956.75 रुपये (Mint)। इसी ब्रांड का 100 mg/4 ml वायल 21,767.70 से घटकर 5,930.13 रुपये (PIB)।
  • Abirat 250 mg (एबिरेटेरोन, प्रोस्टेट कैंसर): 120 टैबलेट की बोतल 36,088.81 रुपये से घटकर 4,064.48 रुपये (Mint)।
  • Brcaone 150 mg (ओलापैरिब): 46,364.05 रुपये से घटकर 11,573.68 रुपये (Mint)।
  • Anarzole 1 mg (एनास्ट्रोजोल): 10 टैबलेट 695.76 रुपये से घटकर 73 रुपये (PIB)।
  • Debrumab 60 mg (डेनोसुमैब): 22,031.25 रुपये से घटकर 5,941 रुपये (PIB)।
  • Fulbreca (फुल्वेस्ट्रेंट): 26,072.16 रुपये से घटकर 5,491 रुपये (PIB)।

कीट्रूडा जैसी महंगी दवाएं सस्ती क्यों नहीं हुईं?

India Today और IBTimes की रिपोर्ट के मुताबिक, इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (पेम्ब्रोलिजुमैब) का 100 mg वायल पहले की तरह 2,16,500 रुपये का ही रहेगा, जबकि यह 21 से ज्यादा तरह के कैंसर में दी जाती है। ब्रेस्ट कैंसर की दवा राइबोसिक्लिब (Kryxana) 24,435 रुपये पर बनी हुई है, और Tagrisso, Tecentriq, Darzalex व Imfinzi जैसे ओरिजिनल ब्रांड की लिस्टेड MRP में भी बदलाव नहीं दिखा है।

इसकी वजह समझना जरूरी है। सरकार ने सीधे दवा की कीमत तय नहीं की है, बल्कि सिर्फ बिक्री चेन के मुनाफे (ट्रेड मार्जिन) पर सीमा लगाई है। जानकारों के मुताबिक, जिन पेटेंट वाली दवाओं का कोई सस्ता जेनेरिक या बायोसिमिलर विकल्प नहीं है और जिनमें पहले से मार्जिन ज्यादा नहीं था, उनकी MRP पर इस नियम का असर कम या बिल्कुल नहीं पड़ता। सबसे ज्यादा फायदा उन जेनेरिक और बायोसिमिलर ब्रांड में दिखा है जिनकी MRP कंपनी की असल बिक्री कीमत से कई गुना ज्यादा रखी गई थी। The Hindu में छपी रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि इतनी तेज कटौती से पता चलता है कि पहले कीमतें कितनी ज्यादा रखी जा रही थीं।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

अगर परिवार में किसी का कैंसर का इलाज चल रहा है, तो 9 नवंबर 2026 के बाद खरीदी जाने वाली दवाओं पर नई MRP से ज्यादा पैसे नहीं लिए जा सकते। इसका फायदा केमिस्ट की दुकान के साथ अस्पताल की फार्मेसी में भी मिलना चाहिए, क्योंकि ट्रेड मार्जिन की सीमा पूरी बिक्री चेन पर लागू है। कीमोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी पर हर महीने हजारों रुपये खर्च करने वाले परिवारों के लिए यह बड़ी बचत हो सकती है, खासकर उन मरीजों के लिए जो जेनेरिक या बायोसिमिलर ब्रांड ले रहे हैं।

ध्यान रखने वाली बातें:

  • नई कीमत हर ब्रांड, स्ट्रेंथ और पैक साइज के हिसाब से अलग है। इसलिए सिर्फ दवा का नाम नहीं, बल्कि ब्रांड, mg और पैक साइज मिलाकर देखें।
  • पूरी सूची NPPA की वेबसाइट पर उपलब्ध है और लगातार अपडेट हो रही है। अगर आपकी दवा अभी सूची में नहीं है, तो कुछ दिन बाद दोबारा देखें।
  • डॉक्टर से पूछें कि आपकी दवा का कोई बायोसिमिलर या जेनेरिक ब्रांड सस्ता है या नहीं। कई बार एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड की कीमत में बड़ा अंतर होता है।
  • अगर 9 नवंबर के बाद कोई दुकान या अस्पताल नई MRP से ज्यादा पैसे ले, तो आप NPPA में शिकायत कर सकते हैं।

आगे क्या?

NPPA ने कहा है कि सूची में बाकी कंपनियों की कीमतें आते ही जोड़ी जाएंगी, इसलिए आने वाले दिनों में 543 से ज्यादा ब्रांड सूची में दिख सकते हैं। इसके साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार पेटेंट वाली महंगी इम्यूनोथेरेपी दवाओं के लिए कोई अलग कदम उठाएगी, क्योंकि ट्रेड मार्जिन की सीमा से उनकी कीमत नहीं घटी है। फिलहाल मरीजों के लिए सबसे जरूरी तारीख 9 नवंबर है, जिसके बाद नई कीमतें लागू हो जाएंगी।

स्रोत: PIB (28 अक्टूबर 2026), Mint, India Today, IBTimes India, The Hindu। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; दवा बदलने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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