दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे पिंक ई-ऑटो
दिल्ली सरकार महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को रोज़गार से जोड़ने के लिए 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो बांटने जा रही है। यह काम DURGA ई-ऑटो योजना के तहत होगा। DURGA का पूरा नाम है, Driving, Upliftment and Rozgar for Women and Transgender।
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने रविवार, 11 अक्टूबर को योजना की डिटेल्स साझा कीं। योजना को पिछले महीने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी। अब इसे ज़मीन पर उतारने की तैयारी है।
किसे कितने ऑटो मिलेंगे?
पहले चरण में कुल 1,300 पिंक ई-ऑटो दिए जाएंगे। इनका बंटवारा कुछ इस तरह है:
- 1,170 ई-ऑटो महिलाओं के लिए आरक्षित
- 130 ई-ऑटो ट्रांसजेंडर लाभार्थियों के लिए आरक्षित
- हर रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट में अधिकतम 90 ऑटो महिलाओं और 10 ऑटो ट्रांसजेंडर लाभार्थियों को
यानी कोटा ज़िलेवार तय है। किसी एक इलाके में सारे ऑटो नहीं जाएंगे, बल्कि पूरी दिल्ली में बराबर तरीके से बांटे जाएंगे।
आवेदन और चयन कैसे होगा?
सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होगी। इसके लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) एक अलग डिजिटल पोर्टल तैयार कर रहा है।
ज़िला स्तर पर जांच
आवेदनों की जांच ज़िला स्तरीय समितियां करेंगी। इन समितियों की अध्यक्षता संबंधित ज़िले के डीएम (District Magistrate) करेंगे। वेरिफिकेशन हर हफ्ते होगा, ताकि फाइलें महीनों अटकी न रहें।
ज़्यादा आवेदन आए तो लॉटरी
अगर किसी ज़िले में योग्य आवेदकों की संख्या उपलब्ध कोटे से ज़्यादा होती है, तो ऑनलाइन ड्रॉ ऑफ लॉट्स यानी लॉटरी से चयन होगा। यह तरीका उन योजनाओं में अपनाया जाता है जहां मांग ज़्यादा और सीटें कम होती हैं।
EV पॉलिसी का फायदा भी मिलेगा
लाभार्थी दिल्ली EV पॉलिसी 2026 के तहत लागू खरीद प्रोत्साहन (परचेज़ इंसेंटिव) का लाभ भी ले सकेंगे। मतलब ई-ऑटो खरीदने में सरकारी मदद अलग से मिल सकती है, बशर्ते शर्तें पूरी हों। हर लाभार्थी को आख़िर में कितना भुगतान करना होगा, इसकी पूरी जानकारी पोर्टल और आधिकारिक अधिसूचना से ही साफ होगी।
मंत्री ने क्या कहा?
पंकज सिंह के मुताबिक, “इसका मकसद सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बांटना नहीं है। यह महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को अपनी आजीविका खुद खड़ी करने, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ज़्यादा भागीदारी करने और आत्मनिर्भर बनने का मौका देने के बारे में है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इन ई-ऑटो से साफ-सुथरी आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा और लास्ट-माइल ट्रांसपोर्ट ज़्यादा सुलभ और समावेशी बनेगा। लास्ट-माइल यानी मेट्रो स्टेशन या बस स्टॉप से घर-दफ्तर तक का आख़िरी हिस्सा, जो दिल्ली में अक्सर सबसे मुश्किल सफ़र होता है।
यह योजना क्यों अहम है?
दिल्ली में ऑटो चलाना अब तक ज़्यादातर पुरुषों का पेशा रहा है। ऐसे में 1,300 ऑटो सीधे महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के हाथ में देना एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे दो फायदे एक साथ दिखते हैं, एक तरफ़ कमाई का ज़रिया, दूसरी तरफ़ महिला यात्रियों के लिए भरोसेमंद विकल्प।
हालांकि असली परीक्षा तब होगी जब पोर्टल खुलेगा। आवेदन की तारीख, पात्रता की पूरी शर्तें और ज़रूरी दस्तावेज़ों की लिस्ट अभी आधिकारिक तौर पर आनी बाकी है। जो लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें परिवहन विभाग की घोषणाओं पर नज़र रखनी चाहिए और किसी बिचौलिए के झांसे में नहीं आना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
DURGA ई-ऑटो योजना क्या है?
यह दिल्ली सरकार की योजना है, जिसके तहत पहले चरण में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लाभार्थियों को 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो दिए जाएंगे।
महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए कितने ऑटो आरक्षित हैं?
1,170 ऑटो महिलाओं के लिए और 130 ऑटो ट्रांसजेंडर लाभार्थियों के लिए। हर रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट में अधिकतम 90 और 10 का कोटा है।
आवेदन कहां करना होगा?
NIC द्वारा तैयार किए जा रहे एक अलग डिजिटल पोर्टल पर। आवेदनों की जांच डीएम की अध्यक्षता वाली ज़िला समितियां करेंगी।
ज़्यादा आवेदन आने पर चयन कैसे होगा?
अगर योग्य आवेदक कोटे से ज़्यादा हुए, तो ऑनलाइन लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) से चयन होगा।

