केंद्र सरकार की GOBARdhan योजना अब औपचारिक रूप से मैदान में है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत में नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्कीम लॉन्च की। द हिंदू और पीएम इंडिया/पीआईबी दस्तावेजों के अनुसार कुल परिव्यय ₹23,731 करोड़ है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी — करीब दस साल का ढांचा।
लक्ष्य साफ है: कृषि अवशेष, गोबर, प्रेस मड, नगर निगम का जैविक कचरा और अन्य बायोमास से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर स्वच्छ ऊर्जा का घरेलू उत्पादन बढ़ाना। सरकार का दावा है कि इससे CBG उत्पादन में करीब दस गुना वृद्धि हो सकती है।
कीमत और ऑफटेक का भरोसा
योजना का बड़ा आकर्षण स्थिर कीमत है। प्रशासित CBG कीमत ₹2,110 प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) तय की गई है। द हिंदू की रिपोर्ट में इसे लगभग ₹98 प्रति किलोग्राम के बराबर बताया गया। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन इकाइयों के जरिए ऑफटेक आश्वासन भी है, ताकि उत्पादकों को बाजार का अंदेशा कम रहे।
CBG बाध्यता (obligation) ट्रैजेक्टरी भी जुड़ी है — वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से आगे 5% तक CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) सेगमेंट में। लंबी अवधि का डिमांड सिग्नल निवेशकों के लिए जरूरी माना गया।
पूंजी सहायता और पाइपलाइन
ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड प्लांट्स के लिए पूंजीगत सहायता का प्रावधान है। कैबिनेट नोट और लॉन्च रिपोर्टों में प्रति टन प्रति दिन क्षमता पर सहायता के आंकड़े दिए गए हैं; सटीक स्लैब परियोजना श्रेणी पर निर्भर करते हैं। पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर से CBG को ट्रंक लाइन और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ने पर जोर है। MSME परियोजनाओं के लिए क्रेडिट गारंटी और इकोसिस्टम चैलेंज फंड भी शामिल हैं।
मंत्री पुरी ने कहा कि पूंजी सहायता के साथ गारंटीड ऑफटेक से मौजूदा करीब 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन से उत्पादन 4–6 MMSCMD तक पहुंचने की उम्मीद है। प्राकृतिक गैस की ऊर्जा बास्केट में हिस्सेदारी 2030 तक 15% बढ़ाने के बड़े लक्ष्य से भी इसे जोड़ा गया।
किसान से ऊर्जादाता तक
पुरी के लॉन्च भाषण में एक वाक्य बार-बार दोहराया गया — किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, ऊर्जादाता भी बनें। योजना से ईंधन आयात में बचत, जीडीपी में योगदान और रोजगार सृजन के बड़े अनुमान लगाए गए हैं (सरकारी आंकड़ों के अनुसार)। कार्बन उत्सर्जन घटाने और जैविक खाद (FOM/LFOM) का बाजार बढ़ाने का दावा भी है।
GOBARdhan पहले से चल रही SATAT, जैविक खाद MDA, बायोमास मशीनरी और नेशनल बायोएनर्जी कार्यक्रम जैसी पहलों को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाती है। देश में 200 से ज्यादा CBG प्लांट पहले ही कमीशन हो चुके बताए गए हैं; नई स्कीम उन्हें स्केल पर ले जाने का ढांचा देती है।
योजना की मुख्य बातें
- परिव्यय: ₹23,731 करोड़
- अवधि: FY 2026-27 से FY 2035-36
- CBG कीमत: ₹2,110 प्रति MMBTU (प्रशासित)
- लक्ष्य: घरेलू CBG उत्पादन में करीब 10 गुना वृद्धि
- मंत्रालय: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
GOBARdhan योजना क्या है?
यह केंद्र की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी/कंप्रेस्ड बायोगैस योजना है, जो जैविक कचरे से CBG बनाकर स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आय बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
योजना का बजट कितना है?
कैबिनेट-स्वीकृत परिव्यय ₹23,731 करोड़ है। अवधि करीब दस वर्ष — FY 2026-27 से FY 2035-36 तक।
CBG की कीमत क्या तय हुई?
प्रशासित कीमत ₹2,110 प्रति MMBTU है। लॉन्च रिपोर्टों में इसे करीब ₹98/किग्रा के बराबर बताया गया।
किसानों को क्या फायदा?
कृषि अवशेष और गोबर की आपूर्ति से अतिरिक्त आय, जैविक खाद का बाजार और स्थानीय रोजगार — सरकार इन्हीं बिंदुओं पर जोर दे रही है।

