मुंबई: हॉटमेल के सह-संस्थापक और टेक उद्यमी सबीर भाटिया के वीडियो निबंध (डॉक्यूमेंट्री) को लेकर विवाद अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X तक पहुंच गया है। मुंबई पुलिस ने X (पहले ट्विटर) को कानूनी नोटिस भेजकर ऐसी 24 पोस्ट हटाने या उन तक पहुंच रोकने को कहा है, जिनमें यह वीडियो या उसके अंश शेयर किए गए थे। समाचार एजेंसी PTI के हवाले से The Hindu और Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नोटिस 18 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए। इसके अगले दिन, 19 अक्टूबर को एक और नोटिस भेजा गया, जिसमें खुद भाटिया के अकाउंट की तीन पोस्ट का जिक्र है।
यह मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि नोटिस पाने वालों में कुछ जाने-माने नाम शामिल बताए जा रहे हैं, और कई यूजर्स ने नोटिस की कॉपी खुद X पर पोस्ट कर इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। वहीं पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई मानहानि से जुड़े प्रावधानों के तहत की गई है।
नोटिस में क्या लिखा है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पहला नोटिस मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के तहत आने वाले वेस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन ने जारी किया। टेक-पॉलिसी वेबसाइट MediaNama ने नोटिस की जो प्रति प्रकाशित की है, उसके मुताबिक इस पर इंस्पेक्टर संदीप पाटिल के हस्ताक्षर हैं और इसे X के सैन फ्रांसिस्को और मुंबई, दोनों दफ्तरों को भेजा गया।
नोटिस में कहा गया है कि पुलिस को एक शिकायत मिली है कि कई X हैंडल ने एक “जानी-मानी कंपनी” को निशाना बनाते हुए “बेहद आपत्तिजनक” सामग्री फैलाई है। नोटिस के मुताबिक इन पोस्ट में कथित तौर पर “झूठे, भ्रामक और अपमानजनक” बयान हैं, जो “बिना किसी तथ्य या कानूनी आधार” के फैलाए जा रहे हैं और इससे कंपनी की साख और छवि को लगातार नुकसान हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि नोटिस में न तो किसी कंपनी का नाम है और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उद्योगपति गौतम अडानी का। हालांकि PTI और HT की रिपोर्ट के अनुसार, जिन पोस्ट का जिक्र है वे भाटिया की उसी डॉक्यूमेंट्री से जुड़ी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अडानी के बारे में कथित तौर पर झूठे और अपमानजनक दावे किए गए हैं।
पुलिस ने इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग कराने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और धारा 356 (मानहानि) के तहत दंडनीय बताया है, और X से आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने को कहा है।
किन लोगों की पोस्ट पर सवाल?
MediaNama के अनुसार, नोटिस में दर्ज 24 पोस्ट में स्वतंत्र पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश इकाई वाले अकाउंट की पोस्ट भी शामिल बताई गई हैं। PTI के मुताबिक, नोटिस में दिए गए लिंक भाटिया के X अकाउंट की ओर ले जाते थे। कुछ यूजर्स ने वीडियो क्लिप हटा दी, जबकि कुछ ने नोटिस सार्वजनिक कर पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाया।
19 अक्टूबर का दूसरा नोटिस मुंबई के DCP (साइबर क्राइम) कार्यालय से भेजा गया, जिसे “टॉप प्रायोरिटी” बताया गया है। MediaNama के मुताबिक इसमें सिर्फ तीन URL हैं, और तीनों भाटिया के अपने अकाउंट (@sabeer) के हैं। इस नोटिस में कहा गया है कि पोस्ट में किसी निजी व्यक्ति/संस्था पर एक बंदरगाह के जरिये ड्रग तस्करी जैसे “गंभीर और बिना पुष्टि वाले आरोप” लगाए गए हैं और भाषा अभद्र है।
सबीर भाटिया ने क्या कहा?
PTI के अनुसार, भाटिया ने X पर लिखा कि मुंबई पुलिस ने उनसे कुछ “बेहद आपत्तिजनक” ट्वीट हटाने को कहा था और उन्होंने आदेश का पालन करते हुए उन्हें हटा दिया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पोस्ट सिर्फ “सत्ता के शीर्ष स्तर पर कथित भ्रष्टाचार” की ओर इशारा कर रही थीं, और सरकार देश के लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी में कटौती कर रही है। ध्यान रहे, ये भाटिया के अपने आरोप और राय हैं; डॉक्यूमेंट्री में किए गए दावों की किसी अदालत या स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। उपलब्ध रिपोर्ट्स में अडानी समूह या सरकार की ओर से इन नोटिसों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
पूरा मामला: YouTube से X तक
भाटिया ने यह वीडियो निबंध 9 अक्टूबर 2026 को YouTube पर अपलोड किया था। Mint और MediaNama की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ही दिनों में YouTube ने इसे भारत में ब्लॉक कर दिया। भाटिया द्वारा साझा किए गए YouTube के ईमेल में बताया गया कि प्लेटफॉर्म को एक “सरकारी संस्था” से कानूनी शिकायत मिली थी और “समीक्षा के बाद” वीडियो को भारत में रोका गया। उस नोटिस में यह नहीं बताया गया कि शिकायत किस विभाग ने की या कौन-सा कानून लागू किया गया।
YouTube पर रोक के बाद भाटिया ने वीडियो X पर पोस्ट किया, जहां MediaNama के मुताबिक इसे 18 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद कई लोगों ने इसकी कॉपी शेयर कीं, और अब पुलिस ने उन्हीं पोस्ट पर कार्रवाई की मांग की है।
धारा 79(3)(b) क्या है, आसान भाषा में
आईटी एक्ट की धारा 79 सोशल मीडिया कंपनियों को “सेफ हार्बर” देती है, यानी यूजर्स की पोस्ट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। लेकिन धारा 79(3)(b) कहती है कि अगर सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी प्लेटफॉर्म को बताती है कि किसी कंटेंट का इस्तेमाल गैरकानूनी काम में हो रहा है, और प्लेटफॉर्म उसे तय समय में नहीं हटाता, तो यह सुरक्षा खत्म हो सकती है। इसी वजह से ऐसे नोटिस प्लेटफॉर्म पर दबाव बनाते हैं। X ने इसी तरह के सरकारी नोटिसों के लिए बने “सहयोग पोर्टल” को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां सितंबर 2025 में उसकी याचिका खारिज हो गई थी।
आप पर क्या असर पड़ेगा?
- शेयर करने से पहले सोचें: मानहानि का मामला सिर्फ मूल पोस्ट करने वाले तक सीमित नहीं रहता; किसी आपत्तिजनक कंटेंट को दोबारा शेयर करने पर भी नोटिस आ सकता है, जैसा इस मामले में 24 पोस्ट पर हुआ।
- नोटिस का मतलब गिरफ्तारी नहीं: इस मामले में भेजा गया नोटिस मुख्य रूप से प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का अनुरोध है। फिर भी अगर आपको कोई पुलिस नोटिस मिले, तो घबराने की बजाय उसकी कॉपी संभालकर रखें और किसी वकील से सलाह लें।
- कानूनी रास्ता खुला है: किसी यूजर या प्लेटफॉर्म को लगता है कि कार्रवाई गलत है, तो वह अदालत का रुख कर सकता है। YouTube जैसे प्लेटफॉर्म शिकायत/अपील का फॉर्म भी देते हैं।
आगे क्या?
MediaNama के मुताबिक यह साफ नहीं है कि X ने नोटिस पर पूरी तरह अमल किया है या नहीं, क्योंकि खबर लिखे जाने तक कुछ पोस्ट भारत में दिख रही थीं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि X इस पर क्या रुख अपनाता है, क्या कोई यूजर इन नोटिसों को अदालत में चुनौती देता है, और क्या शिकायत करने वाली कंपनी की पहचान आधिकारिक रूप से सामने आती है। TrendFlash इस मामले पर नजर बनाए हुए है और नए अपडेट आते ही यह खबर अपडेट की जाएगी।
स्रोत: PTI (The Hindu), Hindustan Times, MediaNama (नोटिस की प्रकाशित प्रतियां), Mint। यह रिपोर्ट नोटिस और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है; डॉक्यूमेंट्री में लगाए गए आरोपों की TrendFlash स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।

