मुंह पर पट्टी, हाथों में तख्तियां और एक ही नारा—”समान काम, समान वेतन”। लखनऊ के हज़रतगंज में इस हफ्ते बॉन्ड डॉक्टरों का प्रदर्शन सुर्खियों में रहा, जब सरकारी बॉन्ड के तहत तैनात MBBS डॉक्टर सड़क पर उतरे। उनका आरोप है कि एक जैसी डिग्री, एक जैसा बॉन्ड और एक जैसी ज़िम्मेदारी होने के बावजूद उन्हें तनख्वाह में भारी फर्क झेलना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।
विवाद की जड़: एक डिग्री, दो तनख्वाह
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्ड डॉक्टरों को हर महीने करीब 1 लाख रुपये या उससे ज़्यादा वेतन मिलता है। वहीं गांवों और कस्बों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात बॉन्ड डॉक्टरों को सिर्फ 50 हज़ार से 65 हज़ार रुपये महीना मिलते हैं।
डॉक्टरों का तर्क सीधा है—जो डॉक्टर दूर-दराज़ के इलाकों में कम सुविधाओं के बीच मरीज़ देख रहा है, उसे कम पैसा क्यों? उनका कहना है कि यह फर्क न सिर्फ नाइंसाफी है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से युवा डॉक्टरों का मन भी खट्टा करता है।
बॉन्ड डॉक्टर कौन होते हैं?
सरकारी मेडिकल कॉलेजों से बेहद कम फीस में MBBS करने वाले छात्रों को पढ़ाई के बाद एक तय अवधि तक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवा देने का बॉन्ड भरना पड़ता है। मकसद यह है कि सरकारी पैसे से तैयार डॉक्टर कुछ समय जनता की सेवा करें, खासकर उन इलाकों में जहाँ डॉक्टरों की कमी है। बॉन्ड तोड़ने पर तय रकम चुकानी पड़ती है।
2 सितंबर का वादा, जो पूरा नहीं हुआ
इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह एक अधूरा भरोसा है। डॉक्टरों के मुताबिक 2 सितंबर को भी उन्होंने प्रदर्शन किया था, तब उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने आश्वासन दिया था कि अगले दिन (3 सितंबर) तक वेतन से जुड़ा शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। इस भरोसे पर डॉक्टरों ने तब आंदोलन खत्म कर दिया था।
डॉक्टरों का आरोप है कि करीब 40 दिन बीतने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुआ। इस बीच वे कई बार अधिकारियों से मिले, ज्ञापन दिए, आश्वासन भी मिले, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। इसी नाराज़गी में वे दोबारा हज़रतगंज स्थित GPO पहुँचे।
पुलिस ने कई डॉक्टरों को हिरासत में लिया
मंगलवार को जब डॉक्टर गांधी प्रतिमा के पास जुटे, तो पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया और कई डॉक्टरों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई के वीडियो भी तेज़ी से शेयर हुए। डॉक्टरों ने अफसरों को ज्ञापन सौंपकर जल्द फैसले की मांग दोहराई है।
आप पर क्या असर पड़ेगा
- ग्रामीण मरीज़: अगर कार्य बहिष्कार लंबा खिंचता है, तो जिन CHC-PHC पर ये डॉक्टर तैनात हैं, वहाँ OPD और रूटीन इलाज पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ज़रूरत पड़ने पर नज़दीकी ज़िला अस्पताल का विकल्प ध्यान में रखें। आपात स्थिति में एम्बुलेंस के लिए 108 पर कॉल करें।
- MBBS छात्र और अभिभावक: सरकारी कॉलेज में दाखिला लेते समय बॉन्ड की शर्तें, तैनाती की जगह और मानदेय की जानकारी ध्यान से पढ़ें। यह विवाद दिखाता है कि तैनाती की जगह के हिसाब से आमदनी में बड़ा फर्क आ सकता है।
- स्वास्थ्य व्यवस्था: ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी पहले से एक चुनौती है। वेतन को लेकर असंतोष बढ़ा तो युवा डॉक्टरों को गांवों में रोके रखना और मुश्किल होगा।
आगे क्या
गेंद अब पूरी तरह सरकार के पाले में है। डॉक्टर साफ कह चुके हैं कि वेतन विसंगति पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अगर स्वास्थ्य विभाग जल्द शासनादेश जारी करता है, तो मामला शांत हो सकता है; वरना कार्य बहिष्कार लंबा खिंचने का सीधा असर ग्रामीण मरीज़ों पर पड़ेगा। डॉक्टरों के मुताबिक अब तक इस पर कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
बॉन्ड डॉक्टर किस बात का विरोध कर रहे हैं?
वे वेतन में भेदभाव का विरोध कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्ड डॉक्टरों को करीब 1 लाख रुपये+, जबकि CHC-PHC वालों को 50-65 हज़ार रुपये मिलते हैं।
प्रदर्शन कहाँ हुआ?
लखनऊ के हज़रतगंज में GPO और गांधी प्रतिमा के पास।
सरकार ने क्या वादा किया था?
डॉक्टरों के मुताबिक 2 सितंबर को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अगले दिन तक वेतन संबंधी शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया था, जो अब तक जारी नहीं हुआ।
क्या इससे अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित होंगी?
डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। यह लंबा चला तो ग्रामीण CHC-PHC पर OPD सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
स्रोत: Times of India, हिन्दुस्तान, The Lucknow Post (12-14 अक्टूबर 2026)।

