दिल्ली में PG में रहकर पढ़ाई या नौकरी करने वाले हज़ारों युवाओं के लिए यह खबर सीधे उनकी सुरक्षा से जुड़ी है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी के 2,400 से ज़्यादा पेइंग गेस्ट (PG) मकानों के मालिकों और संचालकों को नोटिस देना शुरू कर दिया है। इन्हें 15 दिन के भीतर अपनी इमारत का स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, यानी इमारत की मज़बूती का प्रमाण पत्र, जमा करना होगा। दिल्ली PG स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट से जुड़ा यह नियम हर किरायेदार और PG मालिक के लिए जानना ज़रूरी है।
नोटिस में क्या कहा गया है?
MCD के ज़ोनल बिल्डिंग विभाग ये नोटिस जारी कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक:
- PG मालिकों को MCD से अधिकृत निजी स्ट्रक्चरल इंजीनियरों से अपनी इमारत की जांच करानी होगी। इन इंजीनियरों की सूची MCD के पोर्टल पर उपलब्ध है।
- इंजीनियर के जारी सर्टिफिकेट के आधार पर ही तय होगा कि इमारत सुरक्षित है या नहीं।
- नोटिस का पालन नहीं करने पर इमारत खाली कराकर सील की जा सकती है।
- तकनीकी जांच में जो इमारतें असुरक्षित पाई जाएंगी, उन पर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
ज़ोनल अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 15 दिन में पूरी कराने का निर्देश दिया गया है।
सर्वे में क्या निकला
दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर MCD ने 2,453 PG का सर्वे किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इनमें करीब 50 हज़ार छात्र और दूसरे लोग रहते हैं। सर्वे में चार इमारतें खतरनाक पाई गईं, जिन्हें खाली कराने के नोटिस की प्रक्रिया चल रही है।
बाकी इमारतों के लिए सर्टिफिकेट मांगने की वजह भी दिलचस्प है—कई PG के बिल्डिंग प्लान (नक्शे) ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि निर्माण नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं, और इमारत कितनी मज़बूत है।
सबसे ज़्यादा PG कहाँ हैं?
- सिविल लाइंस ज़ोन (डीयू नॉर्थ कैंपस वाला इलाका): 608 PG
- केशवपुरम ज़ोन: 410 PG
- साउथ ज़ोन: 390 PG
- करोल बाग ज़ोन: 365 PG
- सत्य निकेतन इलाके में अकेले 101 PG
पृष्ठभूमि: सत्य निकेतन हादसा
यह सख्ती 6 सितंबर 2026 को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे के बाद शुरू हुई, जब छात्रों के PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक बहुमंज़िला इमारत गिर गई थी और सात लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद MCD ने अवैध और असुरक्षित निर्माणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया और 1,000 से ज़्यादा संपत्तियों पर कार्रवाई की। मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुँचा, जिसके निर्देश पर PG का यह सर्वे हुआ।
आप पर क्या असर पड़ेगा
अगर आप PG में रहते हैं (या आपका बच्चा रहता है):
- अपने PG मालिक से पूछें कि MCD का नोटिस आया है या नहीं और स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट कब तक मिलेगा।
- दीवारों या छत में बड़ी दरारें, बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर पर चल रही तोड़फोड़, झुकी हुई दीवार जैसी चीज़ें दिखें तो इसे हल्के में न लें—शिकायत करें।
- नया PG चुनते समय इमारत की हालत, आग से बचाव के इंतज़ाम और निकलने के रास्ते ज़रूर देखें।
- अगर आपका PG सील होने की नौबत आती है, तो एडवांस और सिक्योरिटी डिपॉज़िट की लिखित रसीद संभालकर रखें।
PG मालिकों के लिए: 15 दिन की मियाद छोटी है। देर किए बिना MCD पोर्टल पर दर्ज इंजीनियर से जांच कराएं, ताकि सीलिंग जैसी कार्रवाई से बचा जा सके।
आगे क्या
15 दिन की समय-सीमा खत्म होने के बाद MCD सर्टिफिकेट जमा न करने वाले PG पर कार्रवाई शुरू कर सकती है। जिन इमारतों की रिपोर्ट में कमज़ोरी निकलेगी, वहाँ मरम्मत, खाली कराने या सीलिंग जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। नॉर्थ कैंपस, केशवपुरम, करोल बाग और साउथ ज़ोन जैसे इलाकों में रहने वाले छात्रों को आने वाले हफ्तों में इसका असर दिख सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
MCD ने कितने PG को नोटिस दिया है?
MCD 2,400 से ज़्यादा PG को नोटिस दे रही है। ये वही PG हैं जो हाईकोर्ट के निर्देश पर हुए 2,453 PG के सर्वे में शामिल थे।
सर्टिफिकेट जमा करने की समय-सीमा क्या है?
नोटिस मिलने के बाद 15 दिन के भीतर स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जमा करना होगा।
सर्टिफिकेट कौन जारी करेगा?
MCD से अधिकृत निजी स्ट्रक्चरल इंजीनियर, जिनकी जानकारी MCD के पोर्टल पर उपलब्ध है।
नियम न मानने पर क्या होगा?
इमारत को खाली कराकर सील किया जा सकता है। असुरक्षित पाई गई इमारतों पर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
स्रोत: The Tribune, दैनिक जागरण, Indian Express, The Hindu, Times of India (सितंबर-अक्टूबर 2026)।

