श्राद्ध का भोज खाने निकले बच्चों की वह नाव कभी दूसरे किनारे तक नहीं पहुँची। बिहार के वैशाली ज़िले में मंगलवार रात हुए राघोपुर नाव हादसा ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास गंगा की धारा पार करते वक्त एक छोटी नाव पलट गई। अब तक 13 शव बरामद हो चुके हैं और ज़िलाधिकारी के मुताबिक मरने वाले सभी बच्चे 15 साल या उससे कम उम्र के थे।
कैसे हुआ हादसा: भोज में जा रहे थे बच्चे
वैशाली की ज़िलाधिकारी वर्षा सिंह के मुताबिक हादसा रात करीब 8:30 बजे हुआ। नाव पर सवार बच्चे पास के गांव भगतान टोला में एक श्राद्ध भोज में जा रहे थे। नाव बीच धारा में पहुँची और डगमगाकर डूब गई।
नाव पर असल में कितने लोग थे, यह अभी साफ नहीं है। DM ने 15-20 लोगों की बात कही है, ग्रामीण 20-25 बता रहे हैं, जबकि राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव ने करीब 30 लोगों के सवार होने का दावा किया। सात लोगों को बचाकर पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) भेजा गया है, जहाँ DM के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है।
रात में रुका सर्च ऑपरेशन, सुबह फिर तलाश
SDRF और स्थानीय गोताखोर देर रात तक तलाश करते रहे। कुछ लोगों के लापता होने की आशंका है, इसलिए बुधवार सुबह फिर तलाशी शुरू हुई। गांव में मातम है; कुछ परिवारों ने एक साथ दो-दो बेटियाँ खो दी हैं।
ग्रामीणों का गुस्सा: जर्जर नाव और देर से पहुँची मदद
DM जब स्थानीय अस्पताल पहुँचीं, तो नाराज़ लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की। सबसे पहले मौके पर पहुँचे ग्रामीण रवि यादव ने ANI से कहा कि सूचना के करीब एक घंटे बाद सरकारी मदद पहुँची और अस्पताल में ज़रूरी इंतज़ाम नहीं थे।
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि नाव सरकारी थी, उसमें छेद था और वह जर्जर हालत में थी। वहीं DM ने इसे एक छोटी प्राइवेट नाव बताया है। नाव किसकी थी और उसकी हालत कैसी थी, यह जांच के बाद ही साफ होगा।
PM और CM ने किया मुआवज़े का ऐलान
- बिहार सरकार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हर मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।
- केंद्र सरकार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PMNRF से हर मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हज़ार रुपये देने की घोषणा की है।
तेजस्वी यादव ने कहा है कि वे बुधवार को दिल्ली से लौटकर पीड़ित परिवारों से मिलेंगे।
राघोपुर दियारा में नाव क्यों है मजबूरी
राघोपुर गंगा की धाराओं के बीच बसा दियारा इलाका है, जो पटना के ठीक सामने पड़ता है। यहाँ बहुत से लोग रोज़ नाव से आते-जाते हैं। बाढ़ के दिनों में प्रशासन रात में नाव चलाने पर रोक की एडवाइज़री देता है, फिर भी भोज या इलाज जैसी ज़रूरत पर लोग रात में नाव का सहारा लेते हैं। यही मजबूरी बार-बार हादसों की वजह बनती है।
आप पर क्या असर पड़ेगा
अगर आपका परिवार नदी पार करने के लिए नाव पर निर्भर है, तो ये बातें याद रखें:
- क्षमता से ज़्यादा सवारी न बैठें: छोटी नाव में भीड़ होते ही संतुलन बिगड़ता है। नाव भरी दिखे तो अगली खेप का इंतज़ार करें।
- बच्चों को अकेले न भेजें: खासकर रात में बच्चों को बिना बड़ों के नाव पर न भेजें और हो सके तो लाइफ जैकेट पहनाएं।
- नाव की हालत देखें: नाव में पानी रिस रहा हो, तो उस पर न चढ़ें और पंचायत या अंचल कार्यालय में लिखित शिकायत करें।
- आपात स्थिति में: तुरंत 112 पर कॉल करें। मुआवज़े के लिए पीड़ित परिवार ज़िला प्रशासन के संपर्क में रहें और पोस्टमार्टम, पहचान से जुड़े कागज़ संभालकर रखें।
आगे क्या
तलाशी अभियान के बाद ही लापता लोगों की सही संख्या साफ होगी। नाव की हालत, उसके मालिकाना हक और मदद में देरी के आरोपों पर अब सबकी नज़र इस पर है कि सरकार जांच बैठाती है या नहीं। तेजस्वी यादव के दौरे के बाद मामला सियासी रंग भी ले सकता है। बड़ा सवाल यही है कि दियारा के लोगों को सुरक्षित आवाजाही कब मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राघोपुर नाव हादसा कब और कहाँ हुआ?
13 अक्टूबर 2026 की रात करीब 8:30 बजे, वैशाली के राघोपुर थाना क्षेत्र में गंगा में।
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
13 शव बरामद हुए हैं; DM के मुताबिक सभी मृतक 15 साल या उससे कम उम्र के बच्चे थे। सात लोग बचाए गए।
मुआवज़ा कितना मिलेगा?
राज्य सरकार से 4 लाख रुपये प्रति मृतक; PMNRF से 2 लाख रुपये प्रति मृतक और घायलों को 50 हज़ार रुपये।
बच्चे नाव से कहाँ जा रहे थे?
वे पास के गांव में एक श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे।
स्रोत: The Hindu, Times of India, BBC हिंदी, लाइव हिन्दुस्तान (PTI-भाषा), News9 (ANI), PMO इंडिया का X पोस्ट (13-14 अक्टूबर 2026)।

