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6 नवम्बर 2026, शुक्र

यूट्यूबर और बिग बॉस OTT विजेता एल्विश यादव 10 जनवरी 2025 को सांप और सांप के ज़हर से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला अदालत में पेश हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 6 फरवरी 2025 की तारीख दी। यह पोस्ट उसी समय की है। पुरानी पोस्ट में पेशी की तारीख 6 जनवरी लिखी थी, जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक पेशी शुक्रवार, 10 जनवरी को हुई थी। इसे ठीक कर दिया गया है। साथ ही केस की पृष्ठभूमि और बाद में हुए बड़े कानूनी फैसले भी जोड़े गए हैं।

मामला क्या है

यह केस नोएडा के सेक्टर-49 थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) संस्था से जुड़े गौरव गुप्ता ने की थी। आरोप था कि एल्विश और उनके साथियों ने वीडियो शूट में सांपों का इस्तेमाल किया, और ऐसी पार्टियों से उनका संबंध था जहां सांप के ज़हर का नशे के लिए इस्तेमाल होता था। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, IPC और NDPS एक्ट की धाराएं लगाई गईं। पुलिस ने NDPS एक्ट में एल्विश को गिरफ्तार भी किया था, और बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई। एल्विश शुरू से खुद को बेकसूर बताते रहे हैं।

पुरानी पोस्ट में इसे “सांप तस्करी” का मामला कहा गया था। मीडिया में यही नाम चला, लेकिन कानूनी तौर पर केस सांपों और उनके ज़हर के गैरकानूनी इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा था।

10 जनवरी की पेशी में क्या हुआ

पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी, और अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी। एल्विश के वकील प्रशांत कुमार राठी ने पुष्टि की कि बचाव पक्ष को चार्जशीट की प्रमाणित कॉपी मिल गई है। वकील का कहना था कि उनके मुवक्किल पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। (पुरानी पोस्ट में वकील के नाम से एक सीधा उद्धरण दिया गया था, जिसकी पुष्टि नहीं हो सकी, इसलिए उसे उनकी दलील के सार के रूप में लिखा गया है।) कोर्ट के बाहर समर्थक और मीडियाकर्मी मौजूद थे, और सोशल मीडिया पर समर्थकों ने #WeStandWithElvish जैसे हैशटैग चलाए।

कानूनी पेच समझिए

भारत में सांपों की कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। ऐसे जीवों को पकड़ना, रखना, बेचना या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करना अपराध है। इस कानून की एक खास शर्त है: धारा 55 के तहत अदालत इन अपराधों पर तभी संज्ञान ले सकती है जब शिकायत किसी अधिकृत अधिकारी, जैसे वन विभाग के अफसर, ने दर्ज कराई हो। आगे चलकर यही बिंदु इस केस में सबसे अहम साबित हुआ।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

यह केस सोशल मीडिया क्रिएटर्स और उनके दर्शकों, दोनों के लिए एक सबक है। वीडियो में सांप या किसी भी संरक्षित जीव का इस्तेमाल करना कानूनी मुसीबत बन सकता है, चाहे इरादा सिर्फ “कंटेंट” बनाने का हो। अगर आप किसी जानवर के साथ क्रूरता या उसका गैरकानूनी इस्तेमाल होते देखें, तो वन विभाग या पुलिस को सूचना दे सकते हैं। किसी लोकप्रिय व्यक्ति पर लगे आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर फैसला सुनाने से पहले अदालत की कार्यवाही का इंतज़ार करना चाहिए, क्योंकि आरोप और दोष साबित होना दो अलग बातें हैं।

बाद में क्या हुआ: एल्विश ने चार्जशीट और समन आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसने 12 मई 2025 को उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी। 19 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने FIR और उससे जुड़ी पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि वन्यजीव कानून के तहत शिकायत अधिकृत अधिकारी ने दर्ज नहीं कराई थी, और बरामद पदार्थ NDPS एक्ट की सूची में नहीं आता। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष पर फैसला नहीं दिया है, और सक्षम अधिकारी कानून के मुताबिक नई शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एल्विश यादव किस मामले में कोर्ट में पेश हुए थे?

नोएडा में दर्ज उस केस में, जिसमें वीडियो में सांपों के इस्तेमाल और पार्टियों में सांप के ज़हर के इस्तेमाल के आरोप थे।

पेशी कहां और कब हुई थी?

10 जनवरी 2025 को ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला अदालत में। अगली तारीख 6 फरवरी 2025 तय हुई थी।

क्या एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली?

हां। सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को कानूनी आधार पर FIR रद्द कर दी, लेकिन सक्षम अधिकारी को नई शिकायत दर्ज करने की छूट दी।

क्या वीडियो में सांप दिखाना अपराध है?

संरक्षित प्रजाति के सांप को पकड़ना, रखना या प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध हो सकता है। ऐसा करने से बचें।

स्रोत: ETV भारत, पंजाब केसरी, LiveLaw, India Today, The Economic Times, ThePrint

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