केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दी। पीआईबी, बिजनेस स्टैंडर्ड और मनीकंट्रोल की रिपोर्टों के अनुसार इसका मकसद भारत में शिपिंग कंटेनर बनाने की क्षमता करीब दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) सालाना करना और आयात पर निर्भरता घटाना है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में हुई थी।
योजना की अवधि और ढांचा
पीआईबी के अनुसार योजना वित्त वर्ष 2027-28 से 2039-40 तक चलेगी, जिसमें सुविधाएं लगाने के लिए तीन साल और उत्पादन सहायता के लिए दस साल मिलेंगे। यह नए कारखानों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार, दोनों को सहायता देगी। एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति, जिसकी अध्यक्षता पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव करेंगे, दिशानिर्देश तय करेगी और सहायता मंजूर करेगी।
किस मद में कितना पैसा
पीआईबी, डीडी न्यूज़ और बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार योजना के मुख्य घटक ये हैं:
- ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस: ₹8,891 करोड़ – वैश्विक शिपिंग मानकों पर बने और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे गए हर कंटेनर के लिए सहायता, ताकि आयातित कंटेनर से लागत का अंतर पाटा जा सके।
- ब्याज सहायता: ₹859 करोड़ – पात्र टर्म लोन पर सालाना 3% की सब्सिडी। पीआईबी के अनुसार नए संयंत्र के लिए कम से कम 1,00,000 TEU सालाना और विस्तार के लिए कम से कम 25,000 TEU सालाना क्षमता जरूरी है।
- परीक्षण व प्रमाणन: ₹150 करोड़ – साझा सुविधाओं, जैसे डायनामिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग, के लिए।
- योजना प्रबंधन: ₹100 करोड़ (पीआईबी)। साथ ही बड़े बंदरगाहों पर जमीन अधिसूचित दर के 25% पर पट्टे पर देने का प्रावधान।
पीआईबी के अनुसार सहायता पाने के लिए घरेलू सामग्री (डोमेस्टिक कंटेंट) 70% से बढ़ाकर 90% करनी होगी।
क्षमता और रोजगार के लक्ष्य
सरकार के अनुसार भारत की मौजूदा क्षमता लगभग 70,000 TEU सालाना है। मनीकंट्रोल ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के हवाले से लिखा कि सरकार का लक्ष्य वैश्विक कंटेनर निर्माण में 15-20% हिस्सेदारी हासिल करना है, और उनके अनुसार वैश्विक उत्पादन का करीब 95% एक ही देश में केंद्रित है। योजना से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान है, तथा पीआईबी के अनुसार FY40 तक करीब ₹75,000 करोड़ का आर्थिक उत्पादन होगा, जो सहायता राशि से सात गुना से अधिक है। ये सरकारी अनुमान हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने याद दिलाया कि 2023 के आसपास से वैश्विक संकटों के बाद भारतीय व्यापारियों को ऊंची माल-भाड़ा दरों और कंटेनर की अस्थिर लीज़ व खरीद दरों का सामना करना पड़ा है, जिससे घरेलू आपूर्ति की जरूरत और बढ़ी है।
लागत का अंतर और उद्योग की रुचि
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार शिपिंग कंपनियां अब तक ज्यादातर कंटेनर चीन से खरीदती रही हैं। एक निर्माता के हवाले से अखबार ने बताया कि एक TEU का चीनी कंटेनर करीब $1,700 में मिलता है, जबकि अन्य जगह के कंटेनर की कीमत लगभग $2,200-2,400 है; यह एक निर्माता का दावा है, कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं। अखबार के अनुसार अदाणी पोर्ट्स एंड SEZ ने भारत में कंटेनर बनाने में रुचि जताई बताई गई है, और फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM ने इस साल की शुरुआत में भारतीय निर्माता DCM कंटेनर्स एंड इंजीनियरिंग को पहला ऑर्डर दिया था।
बंदरगाह मंत्री का बयान
पीआईबी के अनुसार पत्तन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह योजना आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में मजबूत कदम है। विज्ञप्ति में मांग के स्रोतों के रूप में वैश्विक बेड़े का प्रतिस्थापन, भारत कंटेनर शिपिंग लाइन और वाढवण व गैलेथिया बे जैसे नए बड़े बंदरगाह गिनाए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम का कुल बजट कितना है?
₹10,000 करोड़, जो FY 2039-40 तक के लिए है।
इससे क्षमता कितनी बढ़ेगी?
करीब 70,000 TEU से बढ़ाकर लगभग 7.5 लाख TEU सालाना का लक्ष्य है।
कितने रोजगार का अनुमान है?
करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार।
नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की सरकारी विज्ञप्तियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

