पंजाब के मालवा इलाके में रविवार रात से हुई जोरदार बारिश ने अनाज मंडियों को तालाब बना दिया। सबसे बुरी हालत फजिल्का मंडी की बताई गई, जहां धान के दाने पानी में तैरते दिखे। इंडियन एक्सप्रेस, ट्रिब्यून और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्टों के मुताबिक कई जगह 3–4 फीट पानी खड़ा हो गया।
किसान और आढ़तिए नुकसान का आकलन करोड़ों में बता रहे हैं। प्रदर्शन में मंडी के अंदर किश्ती तक लाई गई—तस्वीर साफ है कि पानी सड़क और प्लेटफॉर्म दोनों पर हावी था।
Fazilka Mandi Flood: नुकसान कितना बताया जा रहा है?
जिला आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव सचदेवा गोल्डी ने कहा कि सिर्फ फजिल्का में नुकसान कम से कम ₹20 करोड़ का अनुमान है। उन्होंने बताया कि आसपास की सड़कें डूबी होने के कारण पहली बार मंडी में नाव लानी पड़ी। उनके मुताबिक मंडी का इंफ्रास्ट्रक्चर 1971 से अपग्रेड नहीं हुआ और ड्रेनेज पर्याप्त नहीं है।
BKU लखोवाल, BKU डकोंडा समेत किसान संगठनों ने सरकार पर खराब खरीद व्यवस्था और स्टोरेज की कमी का आरोप लगाया। केंद्र खरीद के लिए CCL उपलब्ध कराता है, लेकिन मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी राज्य सरकार की बताई जाती है।
DC का बयान और पंप तैनाती
फजिल्का डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू ने कहा कि 2–3 घंटे में करीब 12 मिमी बारिश हुई, जो अप्रत्याशित थी। मंडी करीब 100 एकड़ में फैली है और निचले कोनों में पानी जमा हो गया। प्रशासन ने तुरंत पंप लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया। DC के अनुसार सीवेज सिस्टम है, लेकिन पानी की मात्रा ज्यादा होने से जमाव हो गया।
मलौट में भी डूबे बोरे
श्री मुक्तसर साहिब के मलौट मंडी में भी पानी नदी जैसा बहने की शिकायत आई। किसान बलकार सिंह ने कहा कि उनके 600 बोरे पानी में डूब गए। वे आठ दिनों से मंडी में बैठे बताए गए। उन्होंने मुआवजे और जिम्मेदारी का सवाल उठाया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही। विपक्षी नेताओं ने खरीद व्यवस्था की खामियां गिनवाईं। बाद में स्थानीय AAP विधायक नरिंदर पाल सिंह सावना प्रदर्शन स्थल पहुंचे। किसानों-आढ़तियों ने नारेबाजी की, फिर सावना ने लिखित आश्वासन दिया कि मंडी अपग्रेड होगी और रविवार बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा राज्य सरकार देगी। इसके बाद प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया।
मंडी क्यों बार-बार पानी में डूबती है?
फजिल्का की कहानी सिर्फ एक रात की बारिश की नहीं है। पुराना इंफ्रा, कमजोर ड्रेनेज और कटाई के मौसम में खुले में रखे अनाज—तीनों मिलकर जोखिम बढ़ाते हैं। जब फसल मंडी पहुंच चुकी हो और बारिश अचानक आए, तो नुकसान सीधा किसान की जेब पर पड़ता है।
प्रदर्शन में नाव लाना प्रतीकात्मक भी था और व्यावहारिक भी। गोल्डी और यूनियनों का कहना है कि बिना स्टोरेज और निकासी व्यवस्था के खरीद अभियान अधूरा रह जाता है। लिखित आश्वासन के बाद फिलहाल प्रदर्शन थमा है, लेकिन मुआवजे और अपग्रेड का अमल अभी बाकी है।
मालवा की दूसरी मंडियों में भी नुकसान की खबरें आईं। प्रशासन पंप चला रहा है, किसान दाने सुखाकर बोरे दोबारा भरने की बात कर रहे हैं। असली परीक्षा ये होगी कि लिखित वादे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं।
FAQ: Fazilka Mandi Flood
प्रश्न 1: फजिल्का मंडी में पानी कितना बताया गया?
उत्तर: रिपोर्टों में धान 3–4 फीट पानी में डूबा और दाने तैरते बताए गए।
प्रश्न 2: नुकसान का अनुमान किसने दिया?
उत्तर: आढ़तिया संघ अध्यक्ष संजीव सचदेवा गोल्डी ने फजिल्का में कम से कम ₹20 करोड़ नुकसान बताया।
प्रश्न 3: प्रशासन ने क्या कहा?
उत्तर: DC अमरप्रीत कौर संधू ने 12 मिमी अप्रत्याशित बारिश, 100 एकड़ मंडी और पंप तैनाती का जिक्र किया।
प्रश्न 4: प्रदर्शन क्यों थमा?
उत्तर: MLA नरिंदर पाल सिंह सावना के लिखित आश्वासन—अपग्रेड और मुआवजे—के बाद प्रदर्शन उठा लिया गया।

