पंजाब विधानसभा ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सत्र के आखिरी दिन नदी जल पर राज्य के अधिकारों से जुड़े पांच प्रस्ताव पारित किए। इनमें यमुना के जल में हिस्सेदारी, तीन हेडवर्क्स पर पंजाब का नियंत्रण, बांध सुरक्षा कानून को रद्द करने, राजस्थान से रॉयल्टी और रावी के पानी का इस्तेमाल जैसी मांगें शामिल हैं। हिंदुस्तान टाइम्स, द ट्रिब्यून और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तावों का ब्योरा यहां है।
किसने पेश किए, कौन मौजूद था
सभी प्रस्ताव जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पेश किए। हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ये कांग्रेस और भाजपा (इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार शिरोमणि अकाली दल भी) विधायकों की गैरमौजूदगी में पारित हुए। हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा कि विपक्षी कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने उसी दिन पहले वॉकआउट किया था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और बसपा विधायक नछत्तर पाल सदन में मौजूद थे। द ट्रिब्यून ने प्रस्तावों के सर्वसम्मति से पारित होने की बात लिखी और कहा कि इन दोनों विधायकों ने समर्थन किया। यानी रिपोर्टों में विवरण थोड़ा अलग है, पर सदन में मौजूद विधायकों की सहमति पर सभी एकमत हैं।
पांच प्रस्ताव क्या कहते हैं
1. यमुना के पानी में हिस्सा
पहले प्रस्ताव में कहा गया कि 1966 में राज्य के पुनर्गठन से पहले यमुना अविभाजित पंजाब से होकर बहती थी, इसलिए पंजाब का उस पर ऐतिहासिक और कानूनी दावा है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार गोयल ने 12 मार्च 1954 के पंजाब-उत्तर प्रदेश समझौते का हवाला दिया, जिसके मुताबिक पंजाब यमुना के जल के दो-तिहाई का हकदार था। 1994 के दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के बीच हुए सहमति-पत्र में पंजाब को शामिल नहीं किया गया था। ट्रिब्यून के अनुसार राज्य ने 25 अप्रैल 2025 को जल शक्ति मंत्रालय में शिकायत देकर जल विवाद अधिकरण बनाने की मांग की थी, और प्रस्ताव में बताया गया कि राज्य के 72% ब्लॉकों में भूजल स्तर गिर चुका है।
2. रोपड़, हरीके और फिरोजपुर हेडवर्क्स पर नियंत्रण
दूसरे प्रस्ताव में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 79(1)(c) को असंवैधानिक बताया गया, जिसके तहत इन हेडवर्क्स का नियंत्रण भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को दिया गया है। ट्रिब्यून के अनुसार गोयल ने हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक और ओडिशा का उदाहरण दिया, जहां हेडवर्क्स राज्य सरकारों के नियंत्रण में हैं।
3. बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 रद्द हो
तीसरे प्रस्ताव में केंद्र से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 को तुरंत रद्द करने की मांग दोहराई गई। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सदन ने 5 मई 2025 को भी सर्वसम्मति से यही मांग की थी, लेकिन केंद्र की ओर से कार्रवाई की कोई सूचना नहीं मिली। प्रस्ताव में कहा गया कि यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है।
4. राजस्थान से रॉयल्टी
चौथे प्रस्ताव में सतलुज, रावी और ब्यास के जल के लिए राजस्थान से भुगतान की मांग की गई। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पंजाब के जल संसाधन विभाग ने मार्च और मई 2026 में राजस्थान को पत्र लिखे और अगस्त में मांग नोटिस जारी किया, पर न जवाब मिला न भुगतान। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान पर करीब ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी बकाया होने का दावा किया। यह राज्य सरकार का दावा है। ट्रिब्यून के अनुसार 16 नवंबर 2016 को पिछली अकाली-भाजपा सरकार के समय भी गैर-नदी तटीय राज्यों से रॉयल्टी का ऐसा ही प्रस्ताव पारित हुआ था।
5. पाकिस्तान जाने वाला रावी का पानी
पांचवें प्रस्ताव में केंद्र से ऊझ बहुउद्देश्यीय परियोजना को प्राथमिकता से पूरा करने और ऊझ का पानी रणजीत सागर बांध में मोड़ने का अनुरोध किया गया, ताकि पानी का पंजाब में ही भंडारण और उपयोग हो सके। केंद्रीय जल आयोग से रावी-ब्यास लिंक परियोजना को मंजूरी देने की भी मांग की गई।
मुख्यमंत्री मान ने क्या कहा
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार मान ने कहा कि पानी राज्य का विषय है और पंजाब के हक की एक बूंद भी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने हरियाणा के रावी-ब्यास के पानी पर दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यमुना में पंजाब के हिस्से की अनदेखी हो रही है। मान ने यह भी कहा कि 2022 में सरकार बनने के समय केवल 22% जल संसाधन उपयोग में थे, जो अब करीब 80% हो गए हैं (ट्रिब्यून ने यह शुरुआती आंकड़ा 21% बताया)। उनके अनुसार 14,000 किमी पाइपलाइन बिछाई गई है।
राजनीतिक संदर्भ
ट्रिब्यून ने लिखा कि प्रस्तावों का पारित होना सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की किसानों तक पहुंच का संकेत है और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नदी जल बंटवारे के संवेदनशील मुद्दे को सामने लाता है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इस साल की शुरुआत में संयुक्त किसान मोर्चा और BKU एकता उगराहां के नेताओं से चर्चा में इनमें से कुछ प्रस्ताव पारित करने पर सहमति जताई थी। ये राजनीतिक आकलन रिपोर्टों के हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पंजाब विधानसभा ने कितने प्रस्ताव पारित किए?
पांच प्रस्ताव, 27 अक्टूबर 2026 को, जिन्हें जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पेश किया।
प्रस्तावों की मुख्य मांगें क्या हैं?
यमुना जल में हिस्सा, तीन हेडवर्क्स पर नियंत्रण, बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 की समाप्ति, राजस्थान से रॉयल्टी और ऊझ परियोजना तथा रावी-ब्यास लिंक की मंजूरी।
राजस्थान पर कितनी रॉयल्टी का दावा है?
मुख्यमंत्री मान के अनुसार करीब ₹1.44 लाख करोड़। यह राज्य सरकार का दावा है।
नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टों पर आधारित है। प्रस्ताव केंद्र पर बाध्यकारी नहीं हैं।

