उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की नदियों और जलमार्गों में चलने वाली नावों और जलयानों के लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया है। उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 को योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को मंजूरी दी (PTI के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स)। इसमें हर नाव का पंजीकरण, बीमा, घाटों पर सुरक्षा इंतजाम और नाविकों के कल्याण के प्रावधान हैं। हिंदुस्तान टाइम्स और द स्टेट्समैन की रिपोर्टों के आधार पर मुख्य बातें यहां हैं।
नियमावली क्यों लाई जा रही है
परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि अब तक राज्य के जल में चलने वाली नावों और जलयानों के लिए कोई व्यापक नियामक ढांचा नहीं था। उनके अनुसार नियमों का मकसद नाव संचालन को एक समान ढांचे में लाना, यात्री सुरक्षा बेहतर करना और खासकर असंगठित क्षेत्र के जलयानों और नाविकों का केंद्रीकृत डेटाबेस बनाना है। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों और अधिकारियों के पास जानकारी अलग-अलग जगह बिखरी है। उदाहरण के तौर पर वाराणसी में करीब 1,200 नाविकों का आंकड़ा मिला है, लेकिन मथुरा, अयोध्या और प्रयागराज जैसी जगहों के लिए तुलनात्मक जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं है।
पंजीकरण की व्यवस्था
- यांत्रिक (मैकेनाइज्ड) जलयानों को 10 अंकों या अक्षरों वाला विशिष्ट पहचान नंबर मिलेगा, जबकि गैर-यांत्रिक नावों को 12 अंकों या अक्षरों वाला (द स्टेट्समैन के अनुसार)।
- हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पारंपरिक, गैर-यांत्रिक नावों का पंजीकरण शुल्क ₹50 होगा। यांत्रिक जलयानों का शुल्क यात्री क्षमता और ढुलाई क्षमता के अनुसार अलग-अलग होगा।
- यांत्रिक जलयानों का पंजीकरण जिला स्तर पर सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) करेंगे। गैर-यांत्रिक नावों के लिए जिला स्तर पर मोटर वाहन निरीक्षक और तहसील स्तर पर सहायक मोटर वाहन निरीक्षक पंजीकरण प्राधिकारी होंगे।
- जलयानों के सर्वेक्षण और आकलन के लिए नेशनल इनलैंड नेविगेशन इंस्टीट्यूट (NINI), पटना को नामित किया गया है।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने श्रेणियां तय करने से पहले नौ अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन किया। पांच यात्रियों तक, पांच से दस यात्रियों तक और उससे अधिक यात्रियों या ज्यादा क्षमता वाले जलयान अलग-अलग श्रेणियों में रखे जाएंगे।
बीमा और जलमार्ग प्राधिकरण
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार नियमों में यात्रियों और नाविकों दोनों के लिए बीमा कवर का प्रावधान है। मंत्री ने कहा कि बड़ी कंपनियां आमतौर पर बीमा देती हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र के छोटे नाविकों के पास अक्सर ऐसा कवर नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र द्वारा गठित प्राधिकरण की तर्ज पर राज्य में जलमार्ग प्राधिकरण बनाया गया है, जिसके अध्यक्ष के रूप में वे फिलहाल काम देख रहे हैं और यह राज्य भर में जलयान पंजीकरण की निगरानी करेगा।
घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम
- घाटों पर स्थायी रोशनी, साइनबोर्ड, लाइफ बॉय और गोताखोर जरूरी होंगे।
- घाटों के पट्टे, रखरखाव, संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण और जिला समितियां तय करेंगी।
- नाव दुर्घटनाएं रोकने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनेगी।
- हर यात्रा से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
- नाव पर तय यात्री क्षमता से 10% अधिक लाइफ जैकेट (द स्टेट्समैन के अनुसार), 10 मीटर की रस्सी और प्राथमिक चिकित्सा किट रखनी होगी।
- हर 10 जलयान पर एक आपातकालीन बचाव नाव की व्यवस्था होगी।
दो कोष और 90 दिन की मोहलत
रिपोर्टों के अनुसार यांत्रिक जलयानों के लिए राज्य विकास कोष बनेगा, जो जल परिवहन से मिलने वाले शुल्क और जुर्माने से बनेगा, जबकि गैर-यांत्रिक नावों और नाविकों के कल्याण के लिए जिला कल्याण कोष होगा। ये नियम अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2021 के तहत तैयार हुए हैं और उत्तर प्रदेश के 2002 के नियमों की जगह लेंगे। इनमें 16 अध्याय हैं: पहले 14 यांत्रिक जलयानों पर, अध्याय 15 गैर-यांत्रिक नावों पर और अध्याय 16 दोनों के लिए सामान्य प्रावधानों पर। पहले से चल रहे जलयानों को नियम लागू होने से पहले नए मानकों के पालन के लिए 90 दिन मिलेंगे। केंद्रीय कानून से टकराव की स्थिति में केंद्रीय कानून और नियम प्रभावी होंगे।
द स्टेट्समैन ने इन्हें “प्रस्तावित” नियम बताया है, जबकि हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार कैबिनेट ने इन्हें मंजूरी दे दी है। अधिसूचना के बाद ही ये लागू होंगे।
किन नदियों पर असर
रिपोर्टों के अनुसार इसका फायदा गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, गंडक और बेतवा जैसी प्रमुख नदियों पर यात्री परिवहन, नदी पर्यटन, पारंपरिक नाव संचालन और माल ढुलाई को मिलेगा। मंत्री के अनुसार गंगा, सरयू और गोमती जैसी नदियों पर नाव संचालन के लिहाज से ये नियम खास तौर पर प्रासंगिक होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या हर नाव का पंजीकरण जरूरी होगा?
रिपोर्टों के अनुसार हां, यांत्रिक और गैर-यांत्रिक दोनों तरह की नावों को पंजीकृत किया जाएगा।
पारंपरिक नाव के पंजीकरण की फीस कितनी होगी?
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ₹50।
पहले से चल रही नावों को कितना समय मिलेगा?
नए मानकों के पालन के लिए 90 दिन।
लाइफ जैकेट कितने जरूरी हैं?
परमिटेड यात्री क्षमता से 10% अधिक, यानी क्षमता का 110% (द स्टेट्समैन के अनुसार)।
नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम नियम अधिसूचना में बदल सकते हैं।

