कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। देश की दवा कीमत नियामक संस्था राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर 137 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन (डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट और केमिस्ट का कुल मुनाफा) को MRP के 30% पर सीमित कर दिया है। नई, घटी हुई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। सरकार का अनुमान है कि इन दवाओं की MRP 70% तक कम हो सकती है, हालांकि हर दवा पर कटौती अलग होगी। 8 अक्टूबर को सरकार ने इस फैसले को मंज़ूरी दी थी, अब दवाओं की सूची और लागू होने की तारीख तय हो गई है। नीचे आसान भाषा में समझिए कि क्या बदला, किन दवाओं पर असर होगा, नई कीमत कैसे तय होगी और मरीज क्या करें।
फैसले की 6 बड़ी बातें
- कितनी दवाएं: 137 पहचानी गई नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाएं। यह सूची स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की एक्सपर्ट कमेटी ने तय की, जिसमें देश के बड़े ऑन्कोलॉजिस्ट, विशेषज्ञ डॉक्टर, अस्पतालों के जानकार और सरकारी अधिकारी शामिल थे। सरकार के मुताबिक यह सूची समय-समय पर अपडेट होगी।
- कौन सी दवाएं: PIB के मुताबिक सूची में 20 से ज़्यादा तरह के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को दी जाने वाली डेनोसुमैब (Denosumab), कीमोथेरेपी के दौरान सफेद रक्त कोशिकाएं घटने (न्यूट्रोपेनिया) से बचाने वाली पेगफिलग्रास्टिम (Pegfilgrastim) और कोलन, ओवरी व सर्वाइकल कैंसर में दी जाने वाली बेवासिज़ुमैब (Bevacizumab) शामिल हैं। सरकार ने खास तौर पर पेम्ब्रोलिज़ुमैब (Pembrolizumab), डुरवालुमैब (Durvalumab) और ओसिमर्टिनिब (Osimertinib) के सस्ते होने की उम्मीद जताई है। बिज़नेसलाइन के मुताबिक निवोलुमैब और पैल्बोसिक्लिब भी सूची में हैं।
- कानूनी आधार: NPPA ने ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 (DPCO) के पैराग्राफ 19 का इस्तेमाल किया है, जो जनहित में असाधारण हालात में दाम नियंत्रित करने की ताकत देता है।
- पेटेंटेड दवाएं भी: बिज़नेसलाइन के मुताबिक कैप पेटेंटेड दवाओं पर भी लागू होगा, और सूची की किसी भी दवा वाले हर फॉर्मूलेशन पर, चाहे वह अकेली हो या कॉम्बिनेशन में, किसी भी स्ट्रेंथ या रूप में हो।
- तारीखें: कंपनियों को गजट में आदेश छपने के 7 दिन के अंदर NPPA और राज्य ड्रग कंट्रोलर को नई MRP बतानी होगी। 9 नवंबर 2026 से सभी केमिस्ट और अस्पताल घटी हुई कीमत ही वसूलेंगे।
- पारदर्शिता: कंपनियां नई प्राइस लिस्ट अपनी वेबसाइट पर डालेंगी और सभी रिटेलरों व अस्पतालों तक पहुंचाएंगी। केमिस्ट और अस्पताल फार्मेसी में नई कीमतें लगाएंगे, और अस्पतालों को इन्हें अपनी वेबसाइट पर भी प्रमुखता से दिखाना होगा।
ट्रेड मार्जिन क्या है और 30% कैप का मतलब क्या है
कंपनी जिस दाम पर दवा स्टॉकिस्ट या डिस्ट्रीब्यूटर को बेचती है, उसे PTS/PTD (प्राइस टू स्टॉकिस्ट/डिस्ट्रीब्यूटर) कहते हैं। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर और केमिस्ट अपना-अपना मुनाफा जोड़ते हैं और आखिर में MRP बनती है। इसी अंतर को ट्रेड मार्जिन कहते हैं। मिंट के मुताबिक NPPA की बैठक के मिनट्स में दर्ज है कि नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर औसत मार्क-अप करीब 170% था और कुछ मामलों में 700% तक पहुंच गया था।
नए नियम में ट्रेड मार्जिन GST से पहले की MRP का अधिकतम 30% हो सकता है। आसान भाषा में, बिचौलिये कंपनी के PTS पर ज़्यादा से ज़्यादा 42.86% जोड़ सकते हैं, फिर उस पर GST लगेगा।
उदाहरण से समझिए: नई MRP कैसे बनेगी
बिज़नेसलाइन ने नोटिफिकेशन के फॉर्मूले को एक उदाहरण से समझाया है:
- मान लीजिए कंपनी किसी दवा को स्टॉकिस्ट को ₹1,000 में बेचती है और उस पर GST 5% है।
- ₹1,000 पर 42.86% मार्जिन जोड़ने से करीब ₹1,428.6 बनते हैं, और 5% GST जोड़ने पर नई अधिकतम MRP ₹1,500 होगी।
- अगर उस दवा की मौजूदा MRP ₹1,800 है, तो कंपनी को इसे घटाकर ₹1,500 करना होगा, यानी मरीज को एक यूनिट पर ₹300 की बचत।
- अगर मौजूदा MRP पहले से ₹1,400 है, यानी सीमा से कम, तो कंपनी वही कम कीमत रख सकती है। इसलिए जिन दवाओं पर मार्जिन पहले से कम है, उनके दाम में खास फर्क नहीं पड़ेगा।
शुरुआती कीमत आम तौर पर मार्च 2026 की बिक्री से तय होगी: उस महीने दवा की कुल नेट बिक्री को बिकी हुई यूनिट्स से भाग दिया जाएगा, और इसमें सरकारी खरीद शामिल नहीं होगी। मार्च में बिक्री न हुई हो तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 का डेटा लिया जाएगा। 31 मार्च 2026 के बाद लॉन्च हुई दवाओं के लिए मौजूदा PTS माना जाएगा। जहां कंपनी सीधे अस्पताल को दवा देती है, वहां अस्पताल को ही स्टॉकिस्ट माना जाएगा।
दवा की कमी न हो, इसके लिए शर्तें
- कंपनियों को इन दवाओं का मौजूदा उत्पादन और सप्लाई बनाए रखनी होगी। औसत मासिक उत्पादन घटाने से पहले NPPA की इजाज़त लेनी होगी।
- कोई कंपनी दवा बनाना या आयात करना बंद करना चाहे तो उसे कम से कम 6 महीने पहले NPPA को बताना होगा (बिज़नेसलाइन)।
- कंपनियां DPCO के पैराग्राफ 20(1) के तहत साल में एक बार कीमत बढ़ा सकती हैं, लेकिन 30% मार्जिन की सीमा के अंदर ही।
- पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम के तहत मरीजों को मुफ्त दी जाने वाली दवा को कुछ शर्तों और रिकॉर्ड के साथ हिसाब से बाहर रखा जा सकता है।
- जो कंपनियां नई कीमत की जानकारी नहीं देंगी, उन्हें कीमत न घटाने वाला माना जाएगा और NPPA ज़्यादा वसूली गई रकम की रिकवरी कर सकता है।
पृष्ठभूमि: 2019 का प्रयोग और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
यह पहली बार नहीं है। फरवरी 2019 में NPPA ने 42 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर इसी तरह 30% ट्रेड मार्जिन की सीमा लगाई थी। सरकार के मुताबिक तब 526 ब्रांड्स की MRP 90% तक घटी थी और 8 अक्टूबर की PIB विज्ञप्ति के अनुसार मरीजों को सालाना करीब ₹984 करोड़ की बचत हुई थी। इस बार दायरा तीन गुना से भी बड़ा है और सरकार ने 8 अक्टूबर को सालाना करीब ₹2,500 करोड़ की बचत का अनुमान बताया था।
दवाओं के मनमाने मार्जिन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। 12 अक्टूबर की सुनवाई में केंद्र ने अदालत को कैंसर दवाओं पर 30% कैप के फैसले की जानकारी दी थी, जिस पर कोर्ट ने पूछा था कि सिर्फ कैंसर दवाएं ही क्यों, बाकी दवाओं का क्या। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को है, जिसमें केंद्र को बाकी दवाओं की कीमतों पर लगाम के तरीके बताने हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा: मरीज और परिवार क्या करें
- 9 नवंबर से बिल ज़रूर जांचें: इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी पर चल रहे मरीज 9 नवंबर के बाद केमिस्ट या अस्पताल का बिल देखें कि नई MRP लगी है या नहीं।
- नई कीमत खुद चेक करें: सरकार ने कहा है कि नई कीमतें “फार्मा सही दाम” (Pharma Sahi Daam) ऐप और NPPA की वेबसाइट nppa.gov.in पर देखी जा सकेंगी।
- अस्पताल की फार्मेसी पर खास नज़र: सरकार के मुताबिक कैंसर दवाओं का बड़ा हिस्सा सीधे अस्पतालों को सप्लाई होता है, इसलिए नई कीमत लागू करने की ज़िम्मेदारी अस्पतालों की भी होगी। अस्पताल की वेबसाइट पर भी प्राइस लिस्ट होनी चाहिए।
- ज़्यादा वसूली हो तो शिकायत करें: राज्य के ड्रग कंट्रोलर को नियम लागू कराने की ज़िम्मेदारी दी गई है। ज़्यादा कीमत वसूलने की शिकायत राज्य ड्रग कंट्रोलर या NPPA से की जा सकती है।
- दवा अपने आप न बदलें: सस्ती होने की उम्मीद में ब्रांड या दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न बदलें। इलाज का फैसला हमेशा ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ करें।
ध्यान रखें कि जो ज़रूरी कैंसर दवाएं पहले से शेड्यूल्ड सूची (NLEM) में हैं, उन पर पहले से सरकारी सीलिंग प्राइस लागू है। नया फैसला उन नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के लिए है जो अब तक इस नियंत्रण से बाहर थीं, और इनमें कई महंगी इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड दवाएं शामिल हैं, जिनका खर्च ज़्यादातर परिवार अपनी जेब से उठाते हैं।
आगे क्या
अगले एक हफ्ते में कंपनियों को नई MRP जमा करनी है, इसके बाद NPPA की वेबसाइट और ऐप पर ब्रांडवार कीमतें दिखने लगेंगी। 9 नवंबर से नई कीमतें लागू होंगी। 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह भी साफ हो सकता है कि क्या सरकार दूसरी दवाओं पर भी ऐसा ही कदम उठाएगी। ब्रांडवार नई कीमतें आने पर TrendFlash यह खबर अपडेट करेगा।
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स्रोत: PIB (डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स, 17 अक्टूबर और 8 अक्टूबर 2026), आकाशवाणी न्यूज़, द हिंदू बिज़नेसलाइन, बिज़नेस टुडे, मिंट और मनीकंट्रोल/PTI की 17 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स। गजट नोटिफिकेशन NPPA की वेबसाइट nppa.gov.in पर उपलब्ध बताया गया है। यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है, इलाज से जुड़ी सलाह नहीं।

