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6 नवम्बर 2026, शुक्र

जनगणना 2027 के डिजिटल टूल में जाति के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एक याचिका का निपटारा कर दिया। OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया चाहता था कि मान्यता प्राप्त OBC जातियों की पहले से भरी हुई ड्रॉप-डाउन सूची दी जाए, ताकि लोगों को जाति हाथ से न लिखनी पड़े। अदालत ने इसे नीतिगत मामला बताया और याचिकाकर्ता को जनगणना अधिकारियों के पास जाने की छूट दी। द हिंदू, न्यू इंडियन एक्सप्रेस और इकोनॉमिक टाइम्स (PTI) की रिपोर्टों के आधार पर पूरा मामला यहां है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह मुद्दा नीतिगत फैसले से जुड़ा है। पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के पास जाने की छूट है और इस याचिका की एक प्रति उन्हें प्रतिनिधित्व (representation) के रूप में भेजी जा सकती है। द हिंदू के अनुसार अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए दर्ज किया कि याचिका को जनगणना अधिकारी प्रतिनिधित्व के तौर पर देखें।

द हिंदू के मुताबिक न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि जनगणना संचालन के बारीक स्तर के फैसले नीति-निर्माण का हिस्सा होते हैं, इनमें संवैधानिक कुछ नहीं है और जनगणना संवैधानिक वर्गीकरण को संबोधित नहीं करती। मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि इस मुद्दे को नीति-निर्माण के स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता की दलीलें

  • फेडरेशन के वकील ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 342A सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) को मान्यता देता है और तीन सूचियां हैं: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और SEBC।
  • द हिंदू के अनुसार वकील ने बताया कि जनगणना 2027 के लिए ₹11,000 करोड़ से ज्यादा का बजट रखा गया है, लेकिन ड्रॉप-डाउन मेन्यू नहीं है।
  • याचिका के अनुसार अगस्त 2026 में अधिसूचित जनसंख्या गणना अनुसूची के कॉलम 10 में जाति की जानकारी भरनी है। SC और ST को छोड़कर इसमें जाति और उपजाति हाथ से लिखने के लिए खुला टेक्स्ट फील्ड है।
  • याचिका में कहा गया कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) में खुले तरीके से जाति भरने से गणना में गलतियां हुई थीं।

जनगणना अधिकारियों का मौजूदा रुख

न्यू इंडियन एक्सप्रेस और PTI की रिपोर्ट के अनुसार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने जाति गणना के लिए पहले से भरे मेन्यू की जगह जाति पर खुला (open-ended) सवाल रखने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक यह जाति गणना जनसंख्या गणना चरण के साथ होनी है। द हिंदू लिखता है कि जाति की गणना जनगणना के दूसरे चरण में होती है और याचिका के समय दूसरा चरण शुरू होने वाला था। दोनों रिपोर्टों के विवरण में यह अंतर है, इसलिए समय-सारणी के लिए जनगणना कार्यालय की आधिकारिक घोषणा देखना बेहतर होगा।

इस आदेश का मतलब

अदालत ने याचिका की गुण-दोष के आधार पर सुनवाई नहीं की। इसका मतलब है कि अभी मेन्यू पर कोई न्यायिक निर्देश नहीं आया है और अंतिम फैसला रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त के पास है। फेडरेशन अब अपनी मांग उनके सामने रख सकता है और अधिकारी चाहें तो इस पर विचार कर सकते हैं।

खुले सवाल बनाम ड्रॉप-डाउन: बहस क्या है

याचिकाकर्ता का तर्क है कि मान्यता प्राप्त सूची से चुनने की सुविधा होने पर एक ही जाति के अलग-अलग वर्तनी वाले नाम दर्ज नहीं होंगे और आंकड़े ज्यादा साफ रहेंगे। दूसरी ओर रजिस्ट्रार जनरल ने खुला सवाल चुना है। इस पर रिपोर्टों में अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत कारण नहीं दिया गया है, इसलिए यहां कोई अनुमान नहीं लगाया जा रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

पीठ ने इसे नीतिगत मामला बताते हुए याचिका का निपटारा किया और याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के पास जाने की छूट दी।

याचिका किसने दायर की थी?

OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया ने।

क्या जनगणना 2027 में OBC जातियों की ड्रॉप-डाउन सूची होगी?

रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल रजिस्ट्रार जनरल ने खुला सवाल रखने का फैसला किया है। अंतिम निर्णय जनगणना अधिकारियों के पास है।

कौन सी पीठ थी?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ।

नोट: जानकारी 28 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टों पर आधारित है; आगे के घटनाक्रम अलग हो सकते हैं।

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