दिल्ली की हवा बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की सुबह फिर “खराब” (poor) श्रेणी में पहुंच गई। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर सुबह 7 बजे शहर का AQI 228 दर्ज हुआ। द हिंदू ने CPCB के आंकड़ों के आधार पर सुबह 9 बजे 24 घंटे का औसत AQI 232 बताया।
AQI कितना रहा और कहां सबसे ज्यादा
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के 59 निगरानी स्टेशनों में से 33 पर AQI 200 से ऊपर रहा और दो स्टेशनों पर यह 300 पार कर गया, यानी “बहुत खराब” श्रेणी में पहुंचा। मुख्य प्रदूषक PM2.5 था, जो बहुत बारीक कण होते हैं और फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं।
- विवेक विहार: 316 (सबसे ज्यादा)
- जहांगीरपुरी: 305
- नरेला: 294
- सोनिया विहार: 292
- सिरीफोर्ट: 290
पिछले दिनों से तुलना
द हिंदू के मुताबिक पिछले तीन-चार दिनों से हवा अपेक्षाकृत बेहतर थी। CPCB के दैनिक बुलेटिन में मंगलवार, 27 अक्टूबर को शाम 4 बजे AQI 197 (मध्यम) और सोमवार, 26 अक्टूबर को 174 (मध्यम) दर्ज हुआ था। बिजनेस स्टैंडर्ड ने मंगलवार का आंकड़ा 167 बताया है। अलग-अलग समय और अलग तरीके से गणना होने से आंकड़ों में फर्क दिखता है, पर दोनों में बुधवार को बढ़त साफ है।
दिल्ली के आसपास के शहर
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार सुबह 7 बजे के CPCB शहर-स्तरीय आंकड़ों में नोएडा 239, ग्रेटर नोएडा 233, गुरुग्राम 187, गाजियाबाद 179 और फरीदाबाद 126 रहा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा “खराब” श्रेणी में थे, जबकि बाकी तीन “मध्यम” में। द हिंदू ने सुबह की रिपोर्ट में मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद को भी “खराब” बताया। यह अंतर रिपोर्टिंग के समय का हो सकता है।
देशभर के 265 शहरों में बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार हरियाणा का पानीपत 328 के साथ सबसे ऊपर रहा, जो “बहुत खराब” श्रेणी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश का खोरा 283 पर रहा। द हिंदू ने भी पानीपत को “बहुत खराब” स्तर पर बताया।
AQI की श्रेणियां क्या कहती हैं
CPCB के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार 201 से 300 के बीच का AQI “खराब” माना जाता है और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। 301 से 400 के बीच “बहुत खराब” श्रेणी है, जिसमें लंबे समय तक संपर्क से सांस की बीमारी हो सकती है।
GRAP का पहला चरण पहले से लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर को पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-1 लागू किया था। यह तब लगता है जब शहर का AQI 201 से 300 के बीच हो। इसमें मशीनों से सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार बुधवार का 228 का शहरी AQI इसी दायरे में आता है। किसी एक स्टेशन पर 300 से ऊपर का आंकड़ा अपने आप में GRAP का चरण तय नहीं करता, क्योंकि यह शहर के AQI पर आधारित होता है।
आगे का पूर्वानुमान
द हिंदू ने केंद्र सरकार की “दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली” के हवाले से बताया कि 28 अक्टूबर से हवा “खराब” श्रेणी में रहने की आशंका है। इसके बाद 29 से 30 अक्टूबर तक इसमें सुधार होकर “मध्यम” श्रेणी में आने का अनुमान है। उसके अगले छह दिनों में AQI “मध्यम” और “खराब” के बीच ऊपर-नीचे हो सकता है। यह पूर्वानुमान है, इसलिए मौसम बदलने पर आंकड़े बदल सकते हैं।
हर सर्दी में क्यों बढ़ता है प्रदूषण
द हिंदू के अनुसार हर सर्दी में दिल्ली-एनसीआर समेत गंगा के मैदानी इलाकों में प्रदूषण बढ़ता है। इसकी मुख्य वजह हवा की धीमी गति और तापमान में गिरावट जैसे मौसमी कारक हैं। अक्टूबर-नवंबर में पराली जलाना और त्योहारों में पटाखे जलाना भी वाहनों और धूल से होने वाले प्रदूषण को बढ़ा देते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड ने साफ किया कि सिर्फ सुबह के आंकड़ों से बुधवार को हवा बिगड़ने का कारण तय नहीं होता।
क्या सावधानी रखें
- सुबह के समय की तेज कसरत और लंबी सैर से बचें, खासकर बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा के मरीज।
- घर से बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें।
- खुले में कचरा या पत्ते न जलाएं।
- सांस में तकलीफ बढ़े तो डॉक्टर से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का AQI कितना था?
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार सुबह 7 बजे 228 और द हिंदू के अनुसार सुबह 9 बजे 232। दोनों “खराब” श्रेणी में हैं।
सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका कौन सा रहा?
विवेक विहार, जहां AQI 316 दर्ज हुआ।
क्या हवा सुधरने की उम्मीद है?
पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार 29 से 30 अक्टूबर तक हवा “मध्यम” श्रेणी में आ सकती है।
क्या GRAP लागू है?
हां, 21 अक्टूबर से स्टेज-1 लागू है।
नोट: आंकड़े 28 अक्टूबर 2026 की सुबह तक के हैं और बिजनेस स्टैंडर्ड व द हिंदू की रिपोर्टों पर आधारित हैं।

