Breaking
7 नवम्बर 2026, शनि

‘काम नहीं हुआ तो हाईकोर्ट गेट पर धरना देंगे’: मथुरा रोड पैदल क्रॉसिंग पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को 25 नवंबर की डेडलाइन, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली के मथुरा रोड पर भारी ट्रैफिक और किनारे का फुटपाथ (फ़ाइल फोटो)

दिल्ली के मथुरा रोड पर दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल ज़ूलॉजिकल पार्क (चिड़ियाघर) के पास सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त लेकिन अनोखी चेतावनी दी है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि अगर 25 नवंबर से पहले ज़मीन पर ठोस काम पूरा नहीं हुआ, तो दोनों जज दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ जाएंगे और काम पूरा होने तक घर नहीं जाएंगे।

यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई है, लेकिन इसके पीछे का मुद्दा बेहद गंभीर है: देश में सड़क हादसों में मरने वाला हर पांचवां व्यक्ति पैदल यात्री होता है। इस रिपोर्ट में जानिए कोर्ट ने क्या कहा, यह मामला कब से चल रहा है, उसी सुनवाई में और किन बातों पर सरकार से जवाब मांगा गया, और दिल्ली के आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है।

सुनवाई में क्या हुआ

लाइव लॉ और बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी ने बेंच को बताया कि मथुरा रोड क्रॉसिंग का मामला केंद्र की बनाई एक हाई-लेवल कमेटी के सामने है, जो देख रही है कि वहां क्या किया जाना चाहिए। इस पर बेंच ने नाराज़गी जताई और पूछा कि इतने बुनियादी ट्रैफिक सुधार के लिए हाई-लेवल कमेटी की क्या ज़रूरत है।

बार एंड बेंच के अनुसार बेंच ने ASG से कहा (अंग्रेज़ी-हिंदी में कही गई बात का भावार्थ): “अगर आप अगली तारीख से पहले यह नहीं करते, तो हम दोनों दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर होंगे और जब तक आप काम पूरा नहीं करते, हम घर नहीं जाएंगे। बैठ जाएंगे वहां धरना करने के लिए, और मिस्टर बनर्जी को भी घर नहीं जाने देंगे।”

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ “समाधान” बताने से काम नहीं चलेगा, ठोस काम 25 नवंबर से पहले पूरा होना चाहिए, वरना अगली बार मुख्य सचिव को भी कोर्ट में मौजूद रहना होगा। बेंच ने सुझाव दिया कि केंद्र की कमेटी अपनी बैठकों में इस मामले के एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र), वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को भी शामिल करे, जो मौके की असली समस्या बता सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि धरने वाली बात मौखिक टिप्पणी थी और बार एंड बेंच ने इसे “हल्के अंदाज़” (lighter vein) में कही गई बात बताया है। यह कोई लिखित आदेश नहीं है, लेकिन इससे साफ है कि कोर्ट अब और देरी स्वीकार करने के मूड में नहीं है। (इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बेंच के दूसरे जज का नाम जस्टिस के.वी. विनोद चंद्रन लिखा है, जबकि लाइव लॉ और बार एंड बेंच दोनों ने जस्टिस के.वी. विश्वनाथन बताया है।)

मथुरा रोड क्रॉसिंग इतनी अहम क्यों है

दिल्ली हाईकोर्ट मथुरा रोड और शेरशाह रोड के इलाके में है, जिसके पास ही नेशनल ज़ूलॉजिकल पार्क है। यह बेहद व्यस्त सड़क है, जहां दिन भर भारी ट्रैफिक रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 के अपने आदेश में खुद लिखा था कि यहां रोज़ हज़ारों कर्मचारी, वादी, वकील, बच्चे और परिवार बिना रेड लाइट, फुट ओवरब्रिज या किसी ट्रैफिक-काल्मिंग उपाय के सड़क पार करते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

बार एंड बेंच के अनुसार कोर्ट के आदेश के बाद वहां पैदल यात्रियों के लिए एक सिग्नल लगाया गया था, लेकिन एमिकस गौरव अग्रवाल ने बेंच को बताया कि यह अक्सर काम नहीं करता। इसलिए सिंक्रनाइज़्ड सिग्नल और रफ्तार कम करने वाली रंबल स्ट्रिप्स की ज़रूरत बताई गई। लाइव लॉ के मुताबिक 15 सितंबर 2026 की सुनवाई में भी बेंच ने स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स का सुझाव दिया था और कहा था कि जज खुद जाकर देख सकते हैं कि काम हुआ या नहीं।

पृष्ठभूमि: 2012 की जनहित याचिका और 7 महीने की डेडलाइन

यह सुनवाई सड़क सुरक्षा पर 2012 में दायर एक जनहित याचिका, एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ (W.P.(C) No. 295/2012) में हो रही है। याचिका ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन ने दायर की थी, और इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर सड़क सुरक्षा पर देशव्यापी निर्देश देता रहा है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2025 को इसी बेंच ने निर्देश दिया था कि:

  • सड़क दुर्घटना रिपोर्ट 2023 में दर्ज 50 बड़े शहरों की सड़क-स्वामी एजेंसियां और NHAI एक्शन प्लान बनाकर चरणबद्ध सर्वे करें कि कहां अतिरिक्त पैदल क्रॉसिंग चाहिए।
  • एक साल में इन शहरों की कम से कम 20% सड़कों का सर्वे हो और ज़रूरत हो तो क्रॉसिंग बनाई जाए। भीड़भाड़ वाली और हादसों के रिकॉर्ड वाली सड़कों से शुरुआत की जाए।
  • शहरों और गांवों से गुज़रने वाले नेशनल हाईवे के हिस्सों पर भी NHAI क्रॉसिंग की ज़रूरत देखे।
  • सबसे पहली प्राथमिकता दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल ज़ूलॉजिकल गार्डन वाली मथुरा रोड क्रॉसिंग को दी जाए और यह काम सात महीने के भीतर पूरा हो।

यानी सात महीने की वह समय-सीमा मई 2026 में ही बीत चुकी है, और एक साल बाद भी कोर्ट को उसी क्रॉसिंग के लिए चेतावनी देनी पड़ रही है। यही वजह है कि बेंच ने इस बार “कमेटी” वाले जवाब को नाकाफी माना।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 19(1)(d) (आवाजाही की आज़ादी) से जुड़ा अधिकार बता चुका है। कोर्ट ने राज्यों से अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ, इंडियन रोड्स कांग्रेस के मानकों (जैसे IRC 103:2022) का पालन, फुटपाथ और क्रॉसिंग के सेफ्टी ऑडिट और शिकायत के लिए ऑनलाइन व्यवस्था जैसे कदम उठाने को कहा है।

उसी सुनवाई में दो और बड़े मुद्दे

1. हादसा पीड़ितों के लिए अंतरिम राहत योजना: मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 164A में मुआवज़े का दावा करने वालों को अंतरिम राहत देने वाली योजना का प्रावधान है। लाइव लॉ के मुताबिक एमिकस ने याद दिलाया कि 28 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट की एक दूसरी बेंच (जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां) ने इस योजना को चार महीने में अधिसूचित करने को कहा था। सुनवाई में ASG ने बताया कि सरकार ने 23 फरवरी को योजना बना ली है, लेकिन एमिकस ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में पहली बार सुना है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा कि योजना को इतनी गोपनीयता में क्यों रखा जा रहा है, और कहा कि कानून का प्रकाशन ज़रूरी है ताकि लोग उसे जान सकें। बेंच ने सुझाव दिया कि धारा 212 के तहत इसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाए और इसका व्यापक प्रचार हो, ताकि पीड़ितों को इसकी जानकारी मिले।

2. सड़क दुर्घटना की सालाना रिपोर्ट में देरी: कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) कैलेंडर वर्ष खत्म होने के छह महीने के भीतर सालाना सड़क दुर्घटना रिपोर्ट जारी करे। एमिकस ने बताया कि 2024 की रिपोर्ट 11 जून 2026 को आई और 2025 की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है, जबकि उसकी समय-सीमा 30 जून थी। इस अवमानना याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर MoRTH से जवाब मांगा है।

आंकड़े क्या कहते हैं: हर पांचवीं मौत पैदल यात्री की

MoRTH की “Road Accidents in India 2024” रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 2024 में देश में 4,87,707 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 1,77,175 लोगों की मौत हुई और 4,71,441 लोग घायल हुए।
  • मरने वालों में 36,526 पैदल यात्री थे, यानी कुल मौतों का 20.6%। 2023 में यह संख्या 35,221 थी, यानी एक साल में 3.7% की बढ़ोतरी।
  • दोपहिया सवारों (46.2%) के बाद पैदल यात्री सड़क हादसों के सबसे बड़े शिकार हैं।
  • ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में तेज़ रफ्तार (over-speeding) सबसे बड़ा कारण रही, जिससे जुड़े हादसों में कुल मौतों का 70.3% हिस्सा दर्ज हुआ।
  • दस लाख से ज़्यादा आबादी वाले 50 शहरों में दिल्ली में सबसे ज़्यादा 1,551 मौतें दर्ज हुईं।

इन आंकड़ों से समझ आता है कि कोर्ट रंबल स्ट्रिप्स और स्पीड ब्रेकर जैसे रफ्तार कम करने वाले उपायों पर क्यों ज़ोर दे रहा है। व्यस्त सड़क पर गाड़ियों की रफ्तार घटे, तो पैदल चलने वालों के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

आप पर क्या असर पड़ेगा

  • हाईकोर्ट, चिड़ियाघर या इस इलाके में आने वाले लोग: 25 नवंबर से पहले क्रॉसिंग पर सिग्नल, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, रंबल स्ट्रिप्स या दूसरे बदलाव दिख सकते हैं। काम के दौरान ट्रैफिक डायवर्ज़न भी संभव है, लेकिन अभी तक किसी एजेंसी ने काम की तारीख या डिज़ाइन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
  • देश के बाकी शहरों के लिए: 50 शहरों में पैदल क्रॉसिंग के सर्वे का आदेश पहले से है। अगर आपके शहर में किसी खतरनाक जगह पर क्रॉसिंग नहीं है, तो स्थानीय नगर निकाय, ट्रैफिक पुलिस या NHAI के शिकायत चैनलों पर लिखित शिकायत करें और उसका रिकॉर्ड रखें।
  • पैदल चलते समय: जहां सिग्नल और ज़ेब्रा क्रॉसिंग हो, वहीं से सड़क पार करें; चलती गाड़ियों के बीच से न निकलें; बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ पकड़कर पार कराएं; रात में हल्के रंग के कपड़े पहनें और सड़क पार करते समय फोन से नज़र हटाकर रखें।
  • हादसा होने पर: तुरंत 112 पर कॉल करें। धारा 164A वाली अंतरिम राहत योजना अधिसूचित और प्रचारित होने के बाद पीड़ितों को मुआवज़े का इंतज़ार कुछ कम करना पड़ सकता है, लेकिन फिलहाल उसकी आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार है।

दिल्ली में नागरिक सुरक्षा से जुड़ी हाल की एक और खबर: MCD ने 2,400 से ज़्यादा PG को स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए नोटिस दिया। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र से नियम प्रकाशित कराने का एक और मामला: हवाई किराए के नए नियम दो हफ्ते में।

आगे क्या

अब सबकी नज़र 25 नवंबर की सुनवाई पर है। तब तक केंद्र और संबंधित एजेंसियों को मथुरा रोड क्रॉसिंग पर ठोस काम दिखाना होगा, धारा 164A योजना की अधिसूचना पर स्थिति साफ करनी होगी, और 2025 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट में देरी पर जवाब देना होगा। अगर काम नहीं हुआ, तो कोर्ट मुख्य सचिव को तलब करने जैसा सख्त कदम उठा सकता है। TrendFlash इस मामले के हर अपडेट पर नज़र रखेगा।

स्रोत: LiveLaw (16 अक्टूबर 2026 और 7 अक्टूबर 2025); Bar & Bench (16 अक्टूबर 2026); India Today (17 अक्टूबर 2026); The New Indian Express और The Economic Times (16-17 अक्टूबर); Live Hindustan; सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, “Road Accidents in India 2024” रिपोर्ट। कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का हिंदी भावार्थ TrendFlash ने किया है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *