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6 नवम्बर 2026, शुक्र

हवाई किराए पर नए नियम 2 हफ्ते में: केंद्र ने SC को बताया—सर्ज प्राइसिंग, बैगेज शुल्क पर नियम तैयार; 16 नवंबर को सुनवाई

दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1 पर खड़ा इंडिगो का विमान—हवाई किराए और सर्ज प्राइसिंग पर नए नियमों की खबर

त्योहारों में अचानक दोगुने-तिगुने हो जाने वाले हवाई किराए पर आखिरकार नियम आने वाले हैं। केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बने नए नियम—जिनमें हवाई किराए, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त शुल्क से जुड़े प्रावधान होने की उम्मीद है—अंतिम रूप ले चुके हैं, उन्हें प्रशासनिक मंज़ूरी मिल गई है और ये दो हफ्ते के भीतर प्रकाशित कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की है, जब तक प्रकाशित नियम उसके सामने रखने होंगे। दिवाली से ठीक पहले यह खबर क्यों अहम है और आपके टिकट पर इसका क्या मतलब है—यहां पूरी जानकारी है।

सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?

LiveLaw और द हिंदू बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका (PIL) सुन रही थी। केंद्र और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और प्रशासनिक मंज़ूरी मिल गई है। इन्हें दो हफ्ते में प्रकाशित कर दिया जाएगा।”

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने नियम बनाने में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि इस साल भी दिवाली से पहले वही समस्या फिर सामने आ गई है। बेंच ने मामले को 16 नवंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि तब तक प्रकाशित नियम अदालत के सामने रखे जाएं।

याचिका में क्या मांगा गया है?

  • मनमाने किराए पर लगाम: याचिका में एल्गोरिद्म आधारित डायनेमिक प्राइसिंग और कम समय में टिकट के दाम अचानक बढ़ने पर सवाल उठाए गए हैं।
  • स्वतंत्र रेगुलेटर: याचिका के मुताबिक अभी देश में कोई ऐसी संस्था नहीं है जिसके पास हवाई किराए की समीक्षा करने या उस पर सीमा (कैप) लगाने का अधिकार हो।
  • बैगेज और अतिरिक्त शुल्क: मुफ़्त चेक-इन बैगेज सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो किए जाने और दूसरे “एंसिलरी” चार्ज पर भी आपत्ति जताई गई है।
  • कमज़ोर वर्ग पर असर: याचिका कहती है कि आपात स्थिति या त्योहार में मजबूरी में टिकट खरीदने वाले आम यात्रियों पर सर्ज प्राइसिंग का बोझ सबसे ज़्यादा पड़ता है, जबकि संपन्न यात्री पहले से बुकिंग कर लेते हैं।

अब तक का सफ़र: अदालत ने कब क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर पिछले साल 17 नवंबर को केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। जनवरी की सुनवाई में अदालत ने कहा था कि वह किराए में “अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव” के मुद्दे पर दखल देगी और त्योहारों व महाकुंभ के दौरान बढ़े किरायों पर चिंता जताई थी। बिज़नेसलाइन के अनुसार बेंच ने एक सुनवाई में टिप्पणी की थी कि एक ही दिन, एक ही रूट पर एक एयरलाइन इकोनॉमी के ₹8,000 लेती है तो दूसरी ₹18,000।

13 जुलाई को कोर्ट ने केंद्र से नियम सीलबंद लिफ़ाफ़े में पेश करने को कहा। 17 अगस्त को केंद्र ने ड्राफ़्ट नियम सीलबंद कवर में दिए, जिन्हें देखने के बाद कोर्ट ने लौटा दिया; तब सरकार ने अंतिम रूप देने के लिए तीन हफ्ते मांगे थे। बेंच ने उस समय यह भी कहा था कि प्रस्तावित व्यवस्था में प्रभावी रेगुलेटर को लेकर स्पष्टता नहीं है। केंद्र ने अपने हलफ़नामे में बताया था कि नए नियम पुराने एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 की जगह लेंगे, और सरकार की नीति “नियंत्रण वाले मॉडल से ज़रूरी सुरक्षा उपायों के साथ डीरेगुलेटेड व्यवस्था” की है, जिसमें बाज़ार का व्यवहार जनहित के ख़िलाफ़ जाने पर वह दखल देती है—जैसा महामारी और महाकुंभ के दौरान हुआ।

क्या किराए पर कैप लगेगा? अभी क्या साफ़ है, क्या नहीं

सबसे बड़ा सवाल यही है, और इसका ईमानदार जवाब है—अभी पता नहीं। नियमों का अंतिम टेक्स्ट सार्वजनिक नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार इनमें किराया निर्धारण, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त बैगेज शुल्क जैसे मुद्दे शामिल होने की संभावना है, लेकिन किराए की कोई ऊपरी सीमा तय होगी या सिर्फ़ पारदर्शिता और निगरानी के नियम आएंगे, यह प्रकाशन के बाद ही साफ़ होगा। इसलिए सोशल मीडिया पर “अब फ्लाइट सस्ती” जैसे दावों पर फिलहाल भरोसा न करें।

पृष्ठभूमि के लिए: भारत में घरेलू हवाई किराए 1990 के दशक से बाज़ार आधारित हैं—एयरलाइंस मांग के हिसाब से किराए की अलग-अलग “बकेट” तय करती हैं, और जैसे-जैसे सस्ती सीटें भरती हैं, किराया ऊपर की बकेट में चला जाता है। त्योहारों, लंबे वीकेंड या किसी रूट पर उड़ानें घटने पर यही सिस्टम किराए को अचानक बहुत ऊपर ले जाता है।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

  • इस दिवाली तुरंत राहत नहीं: नियम प्रकाशित होने और लागू होने में समय लगेगा, इसलिए दशहरा के लंबे वीकेंड (19-20 अक्टूबर की छुट्टियां) या दिवाली की बुकिंग पर अभी पुराने हालात ही रहेंगे। लंबे वीकेंड की तारीखें जानने के लिए हमारी दशहरा बैंक हॉलिडे लिस्ट देखें।
  • बुकिंग टिप्स: जितना जल्दी हो सके बुक करें, एक से ज़्यादा एयरलाइंस और नज़दीकी एयरपोर्ट के किराए मिलाएं, फ़ेयर अलर्ट लगाएं, और चेकआउट से पहले बैगेज, सीट और सुविधा शुल्क जुड़कर कुल कीमत ज़रूर देखें।
  • शिकायत कहां करें: रिफंड, कैंसिलेशन या ज़्यादा शुल्क की शिकायत पहले एयरलाइन से करें, फिर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के AirSewa पोर्टल/ऐप पर दर्ज कराएं। फ्लाइट कैंसिल होने पर रिफंड-रीशेड्यूल के तरीकों के लिए हमारी सऊदी फ्लाइट्स कैंसिलेशन गाइड भी काम आएगी।

आगे क्या?

अगले दो हफ्तों में नियम अधिसूचित होने चाहिए। उसके बाद 16 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट देखेगा कि नियम याचिका में उठाए मुद्दों—सर्ज प्राइसिंग, बैगेज शुल्क, पारदर्शिता और रेगुलेटर—पर कितने ठोस हैं। अगर अदालत को नियम नाकाफ़ी लगे, तो वह और निर्देश दे सकती है। यात्रियों के लिए असली राहत इसी पर निर्भर करेगी कि नियमों में निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था कितनी मज़बूत है। TrendFlash नियम प्रकाशित होते ही उनके मुख्य बिंदु आपके लिए आसान भाषा में लाएगा।

स्रोत: LiveLaw (16 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिज़नेसलाइन, द इकोनॉमिक टाइम्स। नियमों के प्रकाशित होने तक इनके प्रावधानों पर कोई भी दावा अनुमान है।

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